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Bijnor News: सड़क पर चला रहे रिक्शा, कागजों में बड़े कारोबारी
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सड़क पर चला रहे रिक्शा, कागजों में बड़े कारोबारी
बिजनौर। सड़क पर रिक्शा चला रहे व्यक्ति के नाम पर फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है। फर्म धरातल पर नहीं है, केवल जीएसटी रिर्टन दाखिल करने में उसके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ संदिग्ध फर्मों की सूची आयकर विभाग के पास पहुंची तो जांच में पूरी पोल खुल गई। ऐसे करीब 50 मामलों की बिजनौर में आयकर विभाग जांच कर रहा है।
जिले में जीएसटी विभाग में 40 हजार पंजीकरण पिछले पांच साल में हुए हैं। वर्ष 2017 से अब तक इन पंजीकरण के बाद 13 हजार पंजीकरण रद्द भी किए गए हैं। हाल ही में आयकर विभाग के पास सौ से ज्यादा मामले जांच के लिए पहुंचे हैं, इनमें से करीब 50 मामलों की बिजनौर में आयकर विभाग जांच कर रहा है। ये ऐसे मामले हैं जिनमें फर्म ने पांच से दस करोड़ रुपये तक जीएसटी क्लेम की गई है। आयकर अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। फर्जी, बोगस फर्म बनाकर जीएसटी क्लेम की जा रह है। यह फर्म किसने बनाई, इसका कुछ नहीं पता है। ऐसे मामलों की विस्तृत जांच की जरूरत है।
नूरपुर के रिक्शा चालक के घर पहुंची टीम
आयकर अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि जब वह नूरपुर में जांच करने फर्म के पते पर पहुंचे तो बदहाल सा घर दिखा और फर्म का मालिक एक रिक्शा चालक निकला। उसे फर्म के बारे में पता ही नहीं है, कब किसने, उससे उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड लिया और फर्म बनाकर पंजीकरण करा दिया किसी को कुछ पता ही नहीं था। उनके नाम पर बनी फर्म से करीब पांच करोड़ रुपये की जीएसटी क्लेम की गई थी। एक फर्म सड़क पर ठेले लगाने वाले के नाम पर भी मिली है।
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भौतिक सत्यापन न होने से बढ़े मामले
जीएसटी विभाग के जानकार कहते हैं कि यदि गंभीर कारोबार के मामलों में फर्म का भौतिक सत्यापन होता है। कुछ लोग किसी के आधार कार्ड, पैन कार्ड की मदद से लॉगइन आइडी बनाकर जीएसटी की साइट पर फर्म का पंजीकरण करा देते हैं। उस समय इनका भौतिक सत्यापन न होने से यह लोग ऐसी फर्मों को जीएसटी क्लेम के लिए इस्तेमाल करते हैं।
एक जुलाई 2017 से अब तक
-40310 व्यापारियों ने जीएसटी में कराया पंजीकरण
-13607 व्यापारियों के जीएसटी पंजीकरण हुए रद्द
-26703 व्यापारी वर्तमान में जीएसटी पंजीकृत
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बिजनौर। सड़क पर रिक्शा चला रहे व्यक्ति के नाम पर फर्म बनाकर करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है। फर्म धरातल पर नहीं है, केवल जीएसटी रिर्टन दाखिल करने में उसके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ संदिग्ध फर्मों की सूची आयकर विभाग के पास पहुंची तो जांच में पूरी पोल खुल गई। ऐसे करीब 50 मामलों की बिजनौर में आयकर विभाग जांच कर रहा है।
जिले में जीएसटी विभाग में 40 हजार पंजीकरण पिछले पांच साल में हुए हैं। वर्ष 2017 से अब तक इन पंजीकरण के बाद 13 हजार पंजीकरण रद्द भी किए गए हैं। हाल ही में आयकर विभाग के पास सौ से ज्यादा मामले जांच के लिए पहुंचे हैं, इनमें से करीब 50 मामलों की बिजनौर में आयकर विभाग जांच कर रहा है। ये ऐसे मामले हैं जिनमें फर्म ने पांच से दस करोड़ रुपये तक जीएसटी क्लेम की गई है। आयकर अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। फर्जी, बोगस फर्म बनाकर जीएसटी क्लेम की जा रह है। यह फर्म किसने बनाई, इसका कुछ नहीं पता है। ऐसे मामलों की विस्तृत जांच की जरूरत है।
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नूरपुर के रिक्शा चालक के घर पहुंची टीम
आयकर अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि जब वह नूरपुर में जांच करने फर्म के पते पर पहुंचे तो बदहाल सा घर दिखा और फर्म का मालिक एक रिक्शा चालक निकला। उसे फर्म के बारे में पता ही नहीं है, कब किसने, उससे उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड लिया और फर्म बनाकर पंजीकरण करा दिया किसी को कुछ पता ही नहीं था। उनके नाम पर बनी फर्म से करीब पांच करोड़ रुपये की जीएसटी क्लेम की गई थी। एक फर्म सड़क पर ठेले लगाने वाले के नाम पर भी मिली है।
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भौतिक सत्यापन न होने से बढ़े मामले
जीएसटी विभाग के जानकार कहते हैं कि यदि गंभीर कारोबार के मामलों में फर्म का भौतिक सत्यापन होता है। कुछ लोग किसी के आधार कार्ड, पैन कार्ड की मदद से लॉगइन आइडी बनाकर जीएसटी की साइट पर फर्म का पंजीकरण करा देते हैं। उस समय इनका भौतिक सत्यापन न होने से यह लोग ऐसी फर्मों को जीएसटी क्लेम के लिए इस्तेमाल करते हैं।
एक जुलाई 2017 से अब तक
-40310 व्यापारियों ने जीएसटी में कराया पंजीकरण
-13607 व्यापारियों के जीएसटी पंजीकरण हुए रद्द
-26703 व्यापारी वर्तमान में जीएसटी पंजीकृत