UP: जान जोखिम में डाल नदी पार करते हैं पीतमगढ़ वासी, जलस्तर बढ़ने पर घरों में हो जाते हैं कैद
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के पीतमगढ़ निवासी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में हालात ऐसे हो जाते हैं कि ग्रामीण अपने घरों में ही कैद हो जाते हैं। गांव पहुंचने का लोगों को आज तक कोई सही राह नहीं मिल सकी है।
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आगे कुआं और पीछे खाई होने की कहावत बिजनौर जनपद के तहसील क्षेत्र के गांव पीतमगढ़ पर सटीक बैठती है। दो नदियों के बीच बसा गांव पीतमगढ़ विकास से वंचित है। गांव के लोग जान जोखिम में डालकर दोनों नदियों के जलभराव से होकर अवागमन करते हैं।
भागूवाला क्षेत्र के गांव प्रीतमगढ़ की करीब 1200 की आबादी को आज तक अपने गांव पहुंचने की सही राह नहीं मिल सकी है। कोटावाली और कठियारी नदी के बीच बसे पीतमगढ़ उर्फ मिर्जापुर के लोगों को दोनों नदियों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात में तो हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं।
नदी के उफान के चलते ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। गांव पीतमगढ़ के दोनों ओर के रास्ते रिजर्व फॉरेस्ट में होने के कारण आज तक विकास नहीं हो सका। नदी पार करने के लिए कठियारी नदी पर न तो रपटा है और न ही पुल का निर्माण कराया गया। पीतमगढ़ में पहुंचने के लिए अन्य कोई रास्ता नहीं है।
किसान का फंस गया था ट्रैक्टर, मुश्किल से बची जान
दो दिन पूर्व गांव पीतमगढ़ के किसान बुध सिंह का ट्रैक्टर कठियारी नदी के उफान में फंस गया था। नदी का जलस्तर बढ़ता देखकर ट्रैक्टर पर बैठे अन्य किसानों ने भागकर अपनी जान बचाई। जलस्तर कम होने के बाद अन्य ट्रैक्टर की मदद से फंसे हुए ट्रैक्टर को नदी से बाहर निकाला गया था।
पीतमगढ़ के लोग प्रतिवर्ष ह्यूम पाइप डालकर आवाजाही के लिए कच्चा रास्ता बनाते हैं, लेकिन बरसात में नदी के तेज बहाव में रास्ता बह जाता है। साल दर साल यही सिलसिला चला आ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से नदी पर पुल बनाने की मांग की, लेकिन ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन मिला।