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Bijnor News: मोक्षदायिनी की धारा को शांत करने के लिए मां गलखा से याचना
Mon, 17 Jul 2023 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Mon, 17 Jul 2023 12:36 AM IST
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- गंगा की धारा तेजी से कर रही मां गलखा देवी मंदिर परिसर का कटान
- मां गलखा देवी मंदिर से शुरू हुआ पूजा-अर्चना का दौर
फोटो....
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर।
मोक्षदायिनी के रौद्र रूप को शांत करने के लिए खादरवासी मां गलखा से याचना कर रहे हैं। जी हां, मां गलखा देवी मंदिर में पूजा पाठ का दौर शुरू हो गया है। दरअसल गंगा की धारा तेजी से कटान कर रही है। कटान की जद में मां गलखा देवी मंदिर परिसर आ चुका है। मंदिर की यज्ञशाला गंगा में विलीन हो चुकी है, जबकि दो पुजारियों की समाधि और शनिदेव मंदिर से सटकर गंगा बहने लगी है।
मंडावर क्षेत्र में मां गलखा देवी मंदिर के आसपास कटान रोकने के लिए खादर के लोग पिछले कई दिनों से हल्ला कर रहे थे। प्रशासन से उम्मीद थी कि कटान रोकने के लिए कोई जतन करेगा। हालांकि प्रशासन कई दिनों तक डेरा डाले रहा। जब प्रयास नाकाम हो गए तो खादर के लोग प्रशासन को छोड़ मां गलखा देवी की शरण में पहुंचे। यानि मंदिर में रविवार शाम पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया। आसपास के लोगों ने मां गलखा देवी की पूजा कर किसी तरह से गंगा के रौद्र रूप को शांत करने की कामना की। बता दें कि गलखा देवी मंदिर परिसर की यज्ञशाला कटान के चलते धराशायी हो चुकी है। वहीं दो पुजारियों की समाधि और शनिदेव का मंदिर खतरे में है। हालांकि मां गलखा देवी का मुख्य मंदिर धारा से अभी तीस से चालीस मीटर की दूरी पर है।
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चार फीट तक बढ़ा गंगा का जलस्तर
भले ही गंगा बैराज पर जलस्तर में मामूली कमी देखने मिली, लेकिन मां गलखा देवी मंदिर के पास गंगा के जलस्तर में तीन से चार फीट का उछाल देखने को मिल रहा है। उधर, जलस्तर का उतार चढ़ाव कटान तेज कर रहा है। अब क्षेत्र के लोगों को अपनी जमीनों की नहीं, बल्कि प्राचीन गलखा देवी मंदिर की चिंता सता रही है।
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- मां गलखा देवी मंदिर से शुरू हुआ पूजा-अर्चना का दौर
फोटो....
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर।
मोक्षदायिनी के रौद्र रूप को शांत करने के लिए खादरवासी मां गलखा से याचना कर रहे हैं। जी हां, मां गलखा देवी मंदिर में पूजा पाठ का दौर शुरू हो गया है। दरअसल गंगा की धारा तेजी से कटान कर रही है। कटान की जद में मां गलखा देवी मंदिर परिसर आ चुका है। मंदिर की यज्ञशाला गंगा में विलीन हो चुकी है, जबकि दो पुजारियों की समाधि और शनिदेव मंदिर से सटकर गंगा बहने लगी है।
मंडावर क्षेत्र में मां गलखा देवी मंदिर के आसपास कटान रोकने के लिए खादर के लोग पिछले कई दिनों से हल्ला कर रहे थे। प्रशासन से उम्मीद थी कि कटान रोकने के लिए कोई जतन करेगा। हालांकि प्रशासन कई दिनों तक डेरा डाले रहा। जब प्रयास नाकाम हो गए तो खादर के लोग प्रशासन को छोड़ मां गलखा देवी की शरण में पहुंचे। यानि मंदिर में रविवार शाम पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया। आसपास के लोगों ने मां गलखा देवी की पूजा कर किसी तरह से गंगा के रौद्र रूप को शांत करने की कामना की। बता दें कि गलखा देवी मंदिर परिसर की यज्ञशाला कटान के चलते धराशायी हो चुकी है। वहीं दो पुजारियों की समाधि और शनिदेव का मंदिर खतरे में है। हालांकि मां गलखा देवी का मुख्य मंदिर धारा से अभी तीस से चालीस मीटर की दूरी पर है।
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चार फीट तक बढ़ा गंगा का जलस्तर
भले ही गंगा बैराज पर जलस्तर में मामूली कमी देखने मिली, लेकिन मां गलखा देवी मंदिर के पास गंगा के जलस्तर में तीन से चार फीट का उछाल देखने को मिल रहा है। उधर, जलस्तर का उतार चढ़ाव कटान तेज कर रहा है। अब क्षेत्र के लोगों को अपनी जमीनों की नहीं, बल्कि प्राचीन गलखा देवी मंदिर की चिंता सता रही है।
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