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चीनी मिलों में मरम्मत शुरू, नवंबर में शुरू होगा पेराई सत्र
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मिलों में मरम्मत शुरू, पेराई सत्र नवंबर से
बिजनौर। चीनी मिलों ने अगले पेराई सत्र के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मिलों में मरम्मत का काम शुरू हो गया है। मिलें अक्तूबर के अंत तक अथवा नवंबर के पहले सप्ताह से ही गन्ना पेराई शुरू कर सकती हैं। गन्ने का रकबा कम न होने की वजह से मिलें समय से ही पेराई सत्र शुरू कर सकतीं हैं।
जिले में नौ चीनी मिलों में किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। गन्ना रकबा इस बार भी पिछले साल से कम नहीं रहने का अनुमान है। गन्ना रकबा कम न होने से मिलों की मरम्मत का काम अब पहले के मुकाबले जल्दी शुरू कराया जा रहा है। पिछले साल भी चीनी मिलों ने मरम्मत का काम जल्दी शुरू कर दिया था। इससे चीनी मिलों ने अक्तूबर के अंत में पेराई शुरू कर दी थी और नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सभी चीनी मिलेँ चल गईं थी। चीनी मिलों के समय से पेराई शुरू करने से मिलों का पेराई सत्र भी जल्दी खत्म हुआ। इस बार भी गन्ने का रकबा पिछले सत्र की तरह अधिक है। इसे ध्यान में रखते हुए चीनी मिलों ने बरसात शुरू होने से पहले ही मिलों में मरम्मत का काम शुरू करा दिया है।
बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार मिल में मरम्मत का काम 32 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है। एक नवंबर से पेराई सत्र शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। बिजनौर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक राहुल चौधरी के अनुसार के अनुसार मिल में मरम्मत का काम 30 प्रतिशत हो गया है। मिल का संचालन समय से किया जाएगा।
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- चीनी मिलों की पेराई क्षमता की स्थिति
चीनी मिल पेराई क्षमता
धामपुर 14000
स्योहारा 13000
बिलाई 9000
बहादरपुर 7500
बरकातपुर 7000
बुंदकी 6500
चांदपुर 4500
बिजनौर 3500
नजीबाबाद 3000
कुल 68000
नोट: पेराई टन प्रतिदिन की है।
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बिजनौर। चीनी मिलों ने अगले पेराई सत्र के लिए तैयारी शुरू कर दी है। मिलों में मरम्मत का काम शुरू हो गया है। मिलें अक्तूबर के अंत तक अथवा नवंबर के पहले सप्ताह से ही गन्ना पेराई शुरू कर सकती हैं। गन्ने का रकबा कम न होने की वजह से मिलें समय से ही पेराई सत्र शुरू कर सकतीं हैं।
जिले में नौ चीनी मिलों में किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। गन्ना रकबा इस बार भी पिछले साल से कम नहीं रहने का अनुमान है। गन्ना रकबा कम न होने से मिलों की मरम्मत का काम अब पहले के मुकाबले जल्दी शुरू कराया जा रहा है। पिछले साल भी चीनी मिलों ने मरम्मत का काम जल्दी शुरू कर दिया था। इससे चीनी मिलों ने अक्तूबर के अंत में पेराई शुरू कर दी थी और नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सभी चीनी मिलेँ चल गईं थी। चीनी मिलों के समय से पेराई शुरू करने से मिलों का पेराई सत्र भी जल्दी खत्म हुआ। इस बार भी गन्ने का रकबा पिछले सत्र की तरह अधिक है। इसे ध्यान में रखते हुए चीनी मिलों ने बरसात शुरू होने से पहले ही मिलों में मरम्मत का काम शुरू करा दिया है।
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बिलाई चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह के अनुसार मिल में मरम्मत का काम 32 प्रतिशत से अधिक पूरा हो गया है। एक नवंबर से पेराई सत्र शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। बिजनौर चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक राहुल चौधरी के अनुसार के अनुसार मिल में मरम्मत का काम 30 प्रतिशत हो गया है। मिल का संचालन समय से किया जाएगा।
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- चीनी मिलों की पेराई क्षमता की स्थिति
चीनी मिल पेराई क्षमता
धामपुर 14000
स्योहारा 13000
बिलाई 9000
बहादरपुर 7500
बरकातपुर 7000
बुंदकी 6500
चांदपुर 4500
बिजनौर 3500
नजीबाबाद 3000
कुल 68000
नोट: पेराई टन प्रतिदिन की है।