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रावली क्षेत्र में फिर से दिखने शुरू हुए बारहसिंघा

Wed, 16 Dec 2020 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Dec 2020 12:24 AM IST
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Reindeer started reappearing in Ravali area
बिजनौर के खादर क्षेत्र में घूमता बारहसिंघा का झुंड। - फोटो : BIJNOR
रावली क्षेत्र में फिर से दिखने शुरू हुए बारहसिंघा
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बिजनौर। गंगा तट पर बारहसिंघा का कुनबा फिर से बढ़ने लगा है। रावली क्षेत्र में अब तक वन विभाग 145 बारहसिंघों को चिह्नित कर चुका है। इस साल की शुरूआत में कई साल बाद बारहसिंघा दिखे थे। इन बारहसिंघा को संरक्षित करने के लिए वन विभाग के अफसर व कर्मचारी दिन रात खादर में गश्त कर रहे हैं।
जिले का खादर क्षेत्र में बारहसिंघा बड़ी तादाद में रहते थे। उत्तराखंड से सटे राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर बारहसिंघा रावली क्षेत्र में आते थे, लेकिन साल 2013 में केदारनाथ प्रलय ने बारहसिंघों की प्रजाति को बहुत नुकसान पहुंचाया था। बारहसिंघा बाढ़ में बह गए थे। उनका प्राकृतिक आवास यानि गंगा के टापू भी पानी में पूरी तरह डूब गए थे। तब से खादर में बारहसिंघा न के बराबर ही दिखते थे। वन विभाग के कर्मचारियों को भी गश्त के समय इक्का-दुक्का बारहसिंघा ही दिखता था, लेकिन अब बारहसिंघा से गंगा का रावली क्षेत्र फिर से गुलजार होने लगा है।
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खादर में इस साल की शुरूआत में बारहसिंघा के बड़े बड़े झुंड देखने को मिले थे। अब भी बारहसिंघा के झुंड खादर में दिखने लगे हैं। राजाजी नेशनल पार्क से बारहसिंघा ने फिर से खादर में चहलकदमी शुरू कर दी है। वन विभाग के कर्मचारी अब तक खादर में 145 बारहसिंघा को चिह्नित कर चुके हैं। इनकी तादाद और भी ज्यादा हो सकती है। वन विभाग के कर्मचारी बारहसिंघा के संरक्षण के लिए सुबह शाम गश्त कर रहे हैं। शिकारियों पर भी नजर रखी जा रही है।
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गंगा की नरम मिट्टी भाती है बारहसिंघा को
बारहसिंघा के पंजे बहुत नाजुक होते हैं। वन की कठोर जमीन में बारहसिंघा ज्यादा तेज नहीं भाग सकते हैं। गंगा खादर के टापुओं की जमीन नाजुक होती है। यहां पर ये आराम से भाग सकते हैं। यहां इनके खाने के लिए मुलायम घास भी काफी संख्या में है। यहां हिंसक वन्य जीवों के शिकार बनने की गुंजाइश भी कम रहती है।

संख्या बढ़ना शुभ संकेत
डीएफओ डा.एम सेम्मारन के अनुसार रावली में बारहसिंघा की आमद पहले से बढ़ी है। बारहसिंघा का रावली में आना और उनकी संख्या बढ़ना एक अच्छा संकेत है। वन विभाग बारहसिंघा के संरक्षण के लिए पूरी तरह सजग है।
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