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टीबी मरीजों की सूचना देने पर होगा पंजीकरण
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टीबी मरीजों की सूचना देने पर होगा पंजीकरण
बिजनौर। टीबी के मरीजों की सूचना को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर हो गया है। टीबी मरीजों का निक्षय पोर्टल पर नोटिफिकेशन न करने वाले नर्सिंगहोम और प्राइवेट चिकित्सकों का पंजीकरण अथवा नवीनीकरण नहीं होगा। यह शासनादेश जनपद में लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने भारत से टीबी रोग को समूल नष्ट करने के लिए वर्ष 2025 तक का समय निर्धारित किया है।
जिले में अभी तक करीब 8400 टीबी से ग्रसित मरीज हैं। वर्तमान में जिले में 136 चिकित्सक निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जबकि 65 चिकित्सक ही अभी तक टीबी के मरीजों की सूचना दे रहे हैं। शेष सूचना नहीं देने वाले चिकित्सकों को चेतावनी दी गई है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. बीएस रावत ने बताया कि वर्ष 2020 में सरकारी स्तर पर 3152 और प्राइवेट चिकित्सकों ने 513 निजी चिकित्सकों ने टीबी मरीजों की सूचना दी थी, जबकि वर्ष 2019 में लगभग 2200 मरीज प्राइवेट चिकित्सकों द्वारा चिह्नित किए गए थे। इन सभी मरीजों का पूर्ण इलाज होने पर सफलता के संबंध में भी बताना अनिवार्य है। अभी भी कई चिकित्सकों द्वारा टीबी मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी प्राइवेट चिकित्सकों से क्षय रोगियों की सूचना अवश्य देने तथा प्राइवेट मरीजों को भी सरकारी स्तर पर ट्रूनॉट और सीबीनॉट मशीन से जांच कराने के लिए निर्देशित किया है।
सीएमओ डा. विजय कुमार यादव ने कहा कि टीबी के खात्मे के लिए हर स्तर पर पूर्ण प्रयास किया जाना जरूरी है। देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग से मुक्त करना है। उन्होंने बताया कि जब तक निजी चिकित्सक पूरी तरह से सूचना नहीं देंगे, तब तक संबंधित चिकित्सकों अथवा निजी अस्पतालों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण नहीं होगा।
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बिजनौर। टीबी के मरीजों की सूचना को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर हो गया है। टीबी मरीजों का निक्षय पोर्टल पर नोटिफिकेशन न करने वाले नर्सिंगहोम और प्राइवेट चिकित्सकों का पंजीकरण अथवा नवीनीकरण नहीं होगा। यह शासनादेश जनपद में लागू कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने भारत से टीबी रोग को समूल नष्ट करने के लिए वर्ष 2025 तक का समय निर्धारित किया है।
जिले में अभी तक करीब 8400 टीबी से ग्रसित मरीज हैं। वर्तमान में जिले में 136 चिकित्सक निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जबकि 65 चिकित्सक ही अभी तक टीबी के मरीजों की सूचना दे रहे हैं। शेष सूचना नहीं देने वाले चिकित्सकों को चेतावनी दी गई है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. बीएस रावत ने बताया कि वर्ष 2020 में सरकारी स्तर पर 3152 और प्राइवेट चिकित्सकों ने 513 निजी चिकित्सकों ने टीबी मरीजों की सूचना दी थी, जबकि वर्ष 2019 में लगभग 2200 मरीज प्राइवेट चिकित्सकों द्वारा चिह्नित किए गए थे। इन सभी मरीजों का पूर्ण इलाज होने पर सफलता के संबंध में भी बताना अनिवार्य है। अभी भी कई चिकित्सकों द्वारा टीबी मरीजों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी प्राइवेट चिकित्सकों से क्षय रोगियों की सूचना अवश्य देने तथा प्राइवेट मरीजों को भी सरकारी स्तर पर ट्रूनॉट और सीबीनॉट मशीन से जांच कराने के लिए निर्देशित किया है।
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सीएमओ डा. विजय कुमार यादव ने कहा कि टीबी के खात्मे के लिए हर स्तर पर पूर्ण प्रयास किया जाना जरूरी है। देश को वर्ष 2025 तक क्षय रोग से मुक्त करना है। उन्होंने बताया कि जब तक निजी चिकित्सक पूरी तरह से सूचना नहीं देंगे, तब तक संबंधित चिकित्सकों अथवा निजी अस्पतालों का पंजीकरण एवं नवीनीकरण नहीं होगा।
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