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11 साल बाद एक दिन में रिकॉर्ड बारिश
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अफजलगढ़ मे बारिश से डूडा कालोनी में भरा पानी।
- फोटो : BIJNOR
11 साल बाद एक दिन में रिकॉर्ड बारिश
बिजनौर। देर से आए मानसून ने एक ही दिन की बारिश में सारी कसर पूरी कर दी है। बारिश ने 11 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 24 घंटे में 194.4 एमएम बारिश हुई है। इससे पहले 21 जून 2010 में एक दिन में 190 एमएम बारिश हुई थी। बारिश से मौसम भी सर्द हो गया। बांगर की जमीन वाले खेत भी पानी से लबालब भर गए। बादल इतने बरसे कि खेतों की मेढ़ के ऊपर से पानी निकल गया। अभी भी बादल बरस रहे हैं और मंगलवार को भी अच्छी बारिश के आसार हैं।
जिले में मानसून जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह में आता है। इस बार पहली मानसूनी बारिश 15 जुलाई को हुई। मानसून काफी देरी से आने से धान की रोपाई पर भी असर पड़ रहा था। रविवार दोपहर को बारिश रुकने के बाद भी पूरा दिन आसमान में बादल छाए रहे। रात करीब 12 बजे तेज बारिश शुरू हो गई। पूरी रात तेज बारिश पड़ती रही। सुबह को भी लगभग पूरा दिन बूंदाबांदी होती रही। बारिश की वजह से बाजार में ग्राहक भी न के बराबर आए। पूरी रात और दिन की बारिश ने खेतों में पानी भर दिया। रेतीले खेतों वाले जंगल में भी खेतों की मेढ़ से पानी उतर गया। धान के खेत पानी से लबालब भर गए। किसी भी फसल को अब कम से कम दो सप्ताह से पहले पानी की जरूरत नहीं होगी। जिले में जुलाई में औसतन 337.5 एमएम बारिश होती है लेकिन रविवार दोपहर दो बजे से सोमवार दोपहर दो बजे तक ही 194.4 एमएम बारिश हो गई यानि पूरे महीने की बारिश की आधी से भी ज्यादा। बारिश की वजह से लोगों के काम भी प्रभावित हुए। सड़क किनारे ठेला, फड़ आदि लगाने वाले लोग सोमवार को कोई काम नहीं कर सके।
कई दिन नहीं चलेंगे नलकूप
बारिश न होने की वजह से किसानों ने धान की रोपाई की रफ्तार कम कर दी थी। इस बारिश के बाद अब धान की शत प्रतिशत रोपाई की बात कही जा रही है। जिन इलाकों में किसान खासतौर से धान की सिंचाई पंप या कुएं से करते हैं, बारिश से सबसे ज्यादा फायदा उन्हें ही हुआ है। अब काफी दिनों तक नलकूप चलाने की जरूरत नहीं होगी।
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मंगलवार को भी अच्छी बारिश के आसार
नगीना स्थित मौसम वेधशाला के प्रेक्षक सतीश कुमार के अनुसार एक दिन में इतनी बारिश पिछले काफी समय से नहीं हुई है। बारिश से किसानों को फायदा होगा। अभी मंगलवार को भी अच्छी बारिश के आसार हैं।
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बिजनौर। देर से आए मानसून ने एक ही दिन की बारिश में सारी कसर पूरी कर दी है। बारिश ने 11 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 24 घंटे में 194.4 एमएम बारिश हुई है। इससे पहले 21 जून 2010 में एक दिन में 190 एमएम बारिश हुई थी। बारिश से मौसम भी सर्द हो गया। बांगर की जमीन वाले खेत भी पानी से लबालब भर गए। बादल इतने बरसे कि खेतों की मेढ़ के ऊपर से पानी निकल गया। अभी भी बादल बरस रहे हैं और मंगलवार को भी अच्छी बारिश के आसार हैं।
जिले में मानसून जून के अंतिम या जुलाई के प्रथम सप्ताह में आता है। इस बार पहली मानसूनी बारिश 15 जुलाई को हुई। मानसून काफी देरी से आने से धान की रोपाई पर भी असर पड़ रहा था। रविवार दोपहर को बारिश रुकने के बाद भी पूरा दिन आसमान में बादल छाए रहे। रात करीब 12 बजे तेज बारिश शुरू हो गई। पूरी रात तेज बारिश पड़ती रही। सुबह को भी लगभग पूरा दिन बूंदाबांदी होती रही। बारिश की वजह से बाजार में ग्राहक भी न के बराबर आए। पूरी रात और दिन की बारिश ने खेतों में पानी भर दिया। रेतीले खेतों वाले जंगल में भी खेतों की मेढ़ से पानी उतर गया। धान के खेत पानी से लबालब भर गए। किसी भी फसल को अब कम से कम दो सप्ताह से पहले पानी की जरूरत नहीं होगी। जिले में जुलाई में औसतन 337.5 एमएम बारिश होती है लेकिन रविवार दोपहर दो बजे से सोमवार दोपहर दो बजे तक ही 194.4 एमएम बारिश हो गई यानि पूरे महीने की बारिश की आधी से भी ज्यादा। बारिश की वजह से लोगों के काम भी प्रभावित हुए। सड़क किनारे ठेला, फड़ आदि लगाने वाले लोग सोमवार को कोई काम नहीं कर सके।
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कई दिन नहीं चलेंगे नलकूप
बारिश न होने की वजह से किसानों ने धान की रोपाई की रफ्तार कम कर दी थी। इस बारिश के बाद अब धान की शत प्रतिशत रोपाई की बात कही जा रही है। जिन इलाकों में किसान खासतौर से धान की सिंचाई पंप या कुएं से करते हैं, बारिश से सबसे ज्यादा फायदा उन्हें ही हुआ है। अब काफी दिनों तक नलकूप चलाने की जरूरत नहीं होगी।
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मंगलवार को भी अच्छी बारिश के आसार
नगीना स्थित मौसम वेधशाला के प्रेक्षक सतीश कुमार के अनुसार एक दिन में इतनी बारिश पिछले काफी समय से नहीं हुई है। बारिश से किसानों को फायदा होगा। अभी मंगलवार को भी अच्छी बारिश के आसार हैं।

कासमपुरगढ़ी में वर्षा के बाद सड़कों पर भरा पानी।- फोटो : BIJNOR