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यूपी बोर्ड के स्कूलों में हो रही बिना किताब पढाई
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यूपी बोर्ड के स्कूलों में हो रही बिना किताब पढ़ाई
बिजनौर। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में बिना किताबों के पढ़ाई हो रही है। खुले बाजार में किताब उपलब्ध नहीं है। अभिभावक पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति होने के आरोप लगा रहे हैं। मामला शासन तक पहुंचा। जिस पर शासन ने बाजार में किताबों की उपलब्धता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया है। स्कूल खुले करीब चार माह हो गए हैं। शासन के विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों से पठन पाठन करने के निर्देश हैं। खुले बाजार में किताब उपलब्ध नहीं है। कुछ बच्चों ने पुरानी किताबें खरीद ली है। डीआईओएस कार्यालय के अनुसार शासन के निर्देशानुसार विद्यालय छात्रों से किताब लाने के लिए कह रहे हैं।
जिले में यूपी बोर्ड के 387 माध्यमिक विद्यालय है। जिनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यालयों में मासिक परीक्षा होती है। त्रैमासिक परीक्षा भी करीब है। आरोप है छात्रों को किताब नहीं होने यह पता नहीं चल रहा है कि परीक्षा में कितना कोर्स है। कौन से चैप्टर से सवाल पूछे जाएंगे। शिक्षक भी परेशान हैं।
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भविष्य से खिलवाड़
जिला अभिभावक संघ के अध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल, अभिभावक कौशल शर्मा, अंशु खन्ना, सुचित्रा रानी का कहना है कि बिना किताबों के पढ़ाई होना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। शासन व प्रशासन को मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए। बिना निर्धारित कोर्स की पढ़ाई के परीक्षा कैसे होगी। विद्यालय प्रकरण अधिकार क्षेत्र में नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। शासन ने सत्र शुरू होने के तीन माह बाद प्रकाशकों की घोषणा की है। सूबे के 75 जिलों को किताब आपूर्ति करने के लिए तीन प्रकाशक कम है। विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। मामले में जल्द ही प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों से मिला जाएगा।
नोडल अधिकारियों ने शुरू की जांच
डीआईओएस कार्यालय के अनुसार शासन ने शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों से बाजार में पुस्तकों की उपलब्धता की जांच कराने को कहा है। ब्लाक वार 11 नोडल अधिकारी नियुक्त हैं। जांच हो रही है। नोडल अधिकारियों ने तीनों अधिकृत प्रकाशकों से संपर्क किया है। प्रकाशकों ने जल्द किताब उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
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बिजनौर। यूपी बोर्ड के विद्यालयों में बिना किताबों के पढ़ाई हो रही है। खुले बाजार में किताब उपलब्ध नहीं है। अभिभावक पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति होने के आरोप लगा रहे हैं। मामला शासन तक पहुंचा। जिस पर शासन ने बाजार में किताबों की उपलब्धता की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया है। स्कूल खुले करीब चार माह हो गए हैं। शासन के विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों से पठन पाठन करने के निर्देश हैं। खुले बाजार में किताब उपलब्ध नहीं है। कुछ बच्चों ने पुरानी किताबें खरीद ली है। डीआईओएस कार्यालय के अनुसार शासन के निर्देशानुसार विद्यालय छात्रों से किताब लाने के लिए कह रहे हैं।
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जिले में यूपी बोर्ड के 387 माध्यमिक विद्यालय है। जिनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यालयों में मासिक परीक्षा होती है। त्रैमासिक परीक्षा भी करीब है। आरोप है छात्रों को किताब नहीं होने यह पता नहीं चल रहा है कि परीक्षा में कितना कोर्स है। कौन से चैप्टर से सवाल पूछे जाएंगे। शिक्षक भी परेशान हैं।
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भविष्य से खिलवाड़
जिला अभिभावक संघ के अध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल, अभिभावक कौशल शर्मा, अंशु खन्ना, सुचित्रा रानी का कहना है कि बिना किताबों के पढ़ाई होना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। शासन व प्रशासन को मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए। बिना निर्धारित कोर्स की पढ़ाई के परीक्षा कैसे होगी। विद्यालय प्रकरण अधिकार क्षेत्र में नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। शासन ने सत्र शुरू होने के तीन माह बाद प्रकाशकों की घोषणा की है। सूबे के 75 जिलों को किताब आपूर्ति करने के लिए तीन प्रकाशक कम है। विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। मामले में जल्द ही प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों से मिला जाएगा।
नोडल अधिकारियों ने शुरू की जांच
डीआईओएस कार्यालय के अनुसार शासन ने शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों से बाजार में पुस्तकों की उपलब्धता की जांच कराने को कहा है। ब्लाक वार 11 नोडल अधिकारी नियुक्त हैं। जांच हो रही है। नोडल अधिकारियों ने तीनों अधिकृत प्रकाशकों से संपर्क किया है। प्रकाशकों ने जल्द किताब उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।