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आरसीईपी संधि से देश की खेती पर पड़ेगा बुरा असर
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‘आरसीईपी संधि से देश की खेती पर पड़ेगा बुरा असर’
बिजनौर। रालोद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागेदारी (आरसीईपी) व्यापार संधि का विरोध किया।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि आरसीईपी संधि से देश की खेती व कुटीर उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा। दूध, गेहूं, कपास, ईलायची, सुपारी, काली मिर्च आदि की कीमत बहुत कम हो जाएंगी। जिलाध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि दूसरे देशों की सरकारें किसानों को लाभकारी मूल्य पर भारी भरकम सब्सिडी देती हैं। दूध व उससे बने उत्पादों के आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड से आने से करीब दस करोड़ मजदूर व किसान अपना कारोबार गवा देंगे। दूसरे देश के बिना रोक टोक के अपना सस्ता सामान हमारे देश में भेज देंगे और यहां के करोड़ों दुकानदारों का उद्योग भी बंद हो जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार दबाव में आकर जल्दबाजी कर रही है। इस संधि पर हस्ताक्षर न करने की मांग की गई। इस संबंध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम बृजेश कुमार को दिया गया है। इस दौरान प्रवीण सिंह देशवाल, यादराम सिंह चंदेल, हरपाल सिंह, कुलदीप चिकारा, ओमप्रकाश सिंह, नृपेंद्र देशवाल, राजेंद्र सिंह, नेपाल सिंह, गजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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बिजनौर। रालोद कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागेदारी (आरसीईपी) व्यापार संधि का विरोध किया।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि आरसीईपी संधि से देश की खेती व कुटीर उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा। दूध, गेहूं, कपास, ईलायची, सुपारी, काली मिर्च आदि की कीमत बहुत कम हो जाएंगी। जिलाध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि दूसरे देशों की सरकारें किसानों को लाभकारी मूल्य पर भारी भरकम सब्सिडी देती हैं। दूध व उससे बने उत्पादों के आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड से आने से करीब दस करोड़ मजदूर व किसान अपना कारोबार गवा देंगे। दूसरे देश के बिना रोक टोक के अपना सस्ता सामान हमारे देश में भेज देंगे और यहां के करोड़ों दुकानदारों का उद्योग भी बंद हो जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार दबाव में आकर जल्दबाजी कर रही है। इस संधि पर हस्ताक्षर न करने की मांग की गई। इस संबंध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम बृजेश कुमार को दिया गया है। इस दौरान प्रवीण सिंह देशवाल, यादराम सिंह चंदेल, हरपाल सिंह, कुलदीप चिकारा, ओमप्रकाश सिंह, नृपेंद्र देशवाल, राजेंद्र सिंह, नेपाल सिंह, गजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।