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राम भरोसे है पशुओं के चारे की व्यवस्था
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स्योहारा में गौशाला में बंधे गौवंश।
- फोटो : BIJNOR
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नूरपुर। नगरपालिका द्वारा संचालित कान्हा पशु आश्रय स्थल में क्षमता से डेढ़ गुना अधिक गोवंशीय पशुओं को पाला जा रहा है। क्षमता से अधिक पशु होने के कारण चारे पानी की व्यवस्था ठीक ढंग से नही हो पा रही है। गोशाला प्रभारी के अनुसार अप्रैल माह से गोशाला को पशुओं के चारे के लिए कोई भुगतान नही किया गया है।
नूरपुर में निराश्रित गोवंशीय पशुओं के आश्रय के लिए गौशाला का निर्माण कराया गया है। गोशाला में 50 पशुओं को रखे जाने की जगह है, लेकिन इसके विपरीत यहां 68 पशुओं को रखा गया है। गोशाला में पशुओं की देखभाल के लिए तीन केयर टेकर हैं। पशुओं की देखभाल में लगे आदेश कुमार ने बताया कि क्षमता से अधिक पशु होने के कारण उनके चारे पानी की व्यवस्था में परेशानी होती है। जगह कम होने के कारण पशुओं को सटाकर बांधना पड़ता है। शासन से केवल प्रति पशु 30 रुपये ही मिलते हैं। इतने पैसों में चारे की व्यवस्था होना बड़ा मुश्किल है। पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए पत्ती की विछावन के साथ ही तिरपाल से जगह को कवर करने की व्यवस्था की जा रही है। समय समय और पशु चिकित्साधिकारी से पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है।
गोशाला प्रभारी जगवीर सिंह ने बताया कि अप्रैल माह से गोशाला को पशुओं के चारे के लिए कोई भुगतान नही किया गया है। वह जैसे तैसे चारे व केयर टेकरों के मानदेय का भुगतान कर रहे हैं।
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पैसे होने के बाद भी तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ गोशाला निर्माण
नहटौर। तीन साल में भी नहटौर गौशाला का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। अब भी निर्माण चल रहा है। ढुलमुल रैवये से चल रहे निर्माण कार्य से कई पशुओं को छोटे-छोटे कमरों में रखना पड़ रहा है।
मोहल्ला नौधा में कान्हा गोआश्रय स्थल के लिए 2017 में तीन करोड़ तीन लाख 82 हजार रुपये आवंटित हुए थे लेकिन नगर पालिका ने अभी तक 65 लाख रुपये में एक हॉल व एक टीन शेड बनवाने के अलावा चारा रखने आदि के लिए कमरा ही बनवाया है। टीन शेड का कार्य अभी भी पूरा नहीं हो सका हैं। कम क्षमता होने पर कई बार पशुओं को रखने के लिए समस्या पैदा हो जाती हैं। गोशाला में 14 पशु हैं, जिनकी देखभाल के लिए एक कर्मचारी नियुक्त है। पशुओं के जो बच्चे लावारिस छोड़ दिए जाते हैं, ऐसे कई पशुओं को गो आश्रय स्थल में छोड़ा गया है। चिकित्सकों की टीम भी गोशाला में पशुओं की जांच करती है। इंचार्ज विशेष कुमार ने बताया कि प्रति दिन 80 किग्रा हरा व 70 किग्रा भूसा व 5 किग्रा चोकर दिया जा रहा है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उनके ऊपर बोरे की झूल आदि डाली जा रही है। पशुओं को समयानुसार चारे की व्यवस्था की जाती हैं।
कान्हा पशु आश्रय स्थल में हैं 31 गोवंश
फोटो-
चांदपुर। महमूदपुर रोड पर इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे कान्हा पशु आश्रय स्थल के नाम से बनी गोशाला में 31 गोवंश हैं। अधिशासी अधिकारी अनुज कौशिक ने बताया कि पशुओं की सेवा के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था है। पशुओं को ठंड के बचाव के लिए गोवर्धन पर्व से ही गुड़ दिया जा रहा है। पशुओं के नीचे पत्ती, पुराल डलवा दी गई है। गेट पर पर्दे लगाए गए हैं। पानी आदि की समुचित व्यवस्था है।
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नूरपुर में निराश्रित गोवंशीय पशुओं के आश्रय के लिए गौशाला का निर्माण कराया गया है। गोशाला में 50 पशुओं को रखे जाने की जगह है, लेकिन इसके विपरीत यहां 68 पशुओं को रखा गया है। गोशाला में पशुओं की देखभाल के लिए तीन केयर टेकर हैं। पशुओं की देखभाल में लगे आदेश कुमार ने बताया कि क्षमता से अधिक पशु होने के कारण उनके चारे पानी की व्यवस्था में परेशानी होती है। जगह कम होने के कारण पशुओं को सटाकर बांधना पड़ता है। शासन से केवल प्रति पशु 30 रुपये ही मिलते हैं। इतने पैसों में चारे की व्यवस्था होना बड़ा मुश्किल है। पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए पत्ती की विछावन के साथ ही तिरपाल से जगह को कवर करने की व्यवस्था की जा रही है। समय समय और पशु चिकित्साधिकारी से पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है।
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गोशाला प्रभारी जगवीर सिंह ने बताया कि अप्रैल माह से गोशाला को पशुओं के चारे के लिए कोई भुगतान नही किया गया है। वह जैसे तैसे चारे व केयर टेकरों के मानदेय का भुगतान कर रहे हैं।
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पैसे होने के बाद भी तीन साल में भी पूरा नहीं हुआ गोशाला निर्माण
नहटौर। तीन साल में भी नहटौर गौशाला का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। अब भी निर्माण चल रहा है। ढुलमुल रैवये से चल रहे निर्माण कार्य से कई पशुओं को छोटे-छोटे कमरों में रखना पड़ रहा है।
मोहल्ला नौधा में कान्हा गोआश्रय स्थल के लिए 2017 में तीन करोड़ तीन लाख 82 हजार रुपये आवंटित हुए थे लेकिन नगर पालिका ने अभी तक 65 लाख रुपये में एक हॉल व एक टीन शेड बनवाने के अलावा चारा रखने आदि के लिए कमरा ही बनवाया है। टीन शेड का कार्य अभी भी पूरा नहीं हो सका हैं। कम क्षमता होने पर कई बार पशुओं को रखने के लिए समस्या पैदा हो जाती हैं। गोशाला में 14 पशु हैं, जिनकी देखभाल के लिए एक कर्मचारी नियुक्त है। पशुओं के जो बच्चे लावारिस छोड़ दिए जाते हैं, ऐसे कई पशुओं को गो आश्रय स्थल में छोड़ा गया है। चिकित्सकों की टीम भी गोशाला में पशुओं की जांच करती है। इंचार्ज विशेष कुमार ने बताया कि प्रति दिन 80 किग्रा हरा व 70 किग्रा भूसा व 5 किग्रा चोकर दिया जा रहा है। पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उनके ऊपर बोरे की झूल आदि डाली जा रही है। पशुओं को समयानुसार चारे की व्यवस्था की जाती हैं।
कान्हा पशु आश्रय स्थल में हैं 31 गोवंश
फोटो-
चांदपुर। महमूदपुर रोड पर इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे कान्हा पशु आश्रय स्थल के नाम से बनी गोशाला में 31 गोवंश हैं। अधिशासी अधिकारी अनुज कौशिक ने बताया कि पशुओं की सेवा के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था है। पशुओं को ठंड के बचाव के लिए गोवर्धन पर्व से ही गुड़ दिया जा रहा है। पशुओं के नीचे पत्ती, पुराल डलवा दी गई है। गेट पर पर्दे लगाए गए हैं। पानी आदि की समुचित व्यवस्था है।

किरतपुर गौशाला में ठंड से बंधा गोवंश।- फोटो : BIJNOR

नूरपुर गौशाला में बंधे पशु।- फोटो : BIJNOR

चांदपुर गौशाला में बंधे गौवंश।- फोटो : BIJNOR

नहटौर की गौशाला में अपूर्ण टीन शैड कार्य।- फोटो : BIJNOR