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सुकरो नदी पर रेलवे पुल का पिलर ढहा
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:17 AM IST
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कोटद्वार ब्रांच लाइन के सुकरो नदी पर बने रेल पुल का गिरा पिलर।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में यूपी-उत्तराखंड सीमा पर सूकरो नदी पर बने रेलवे पुल का स्पान (पिलर) गिर गया। कोटद्वार ब्रांच लाइन पर अनिश्चितकाल के लिए रेलवे यातायात रोक देना पड़ा। शनिवार तड़के पिलर गिरने के चंद मिनट बाद ही मसूरी एक्सप्रेस ट्रेन को पुल से गुजरना था। संयोग से रेलवे के एक चौकीदार की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद डीआरएम समेत रेलवे के आला अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर नजीबाबाद से करीब 20 किलोमीटर दूर सूकरो नदी पर वर्ष 1860 में निर्मित रेलवे पुल है। भूतल से 9.15 मीटर ऊंचे सात स्पान (पिलर) पर रेलवे पुल बना है। नजीबाबाद एंड से चौथा पिलर शनिवार तड़के करीब 4.30 बजे जमींदोज हो गया। संयोग से उस समय रेलवे का एक चौकीदार पुल क्षेत्र में ही था। उसने शनिवार को करीब पांच बजे नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर इसकी सूचना दी। दिल्ली से चलकर नजीबाबाद पहुंची मसूरी एक्सप्रेस के कोचों को आनन-फानन में कोटद्वार के लिए रवाना होने से रोका गया। कुछ ही देर में रेलवे के एडीईएन सीताराम, आईओडब्लू एके शर्मा रेल मजदूरों को साथ लेकर सूकरो रेल पुल पर पहुंच गए। रेल ट्रैक का अवलोकन कर उन्होंने डीआरएम सहित मुरादाबाद मंडल के रेल अधिकारियों को सूचित किया। आला रेलवे अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से पहले स्थानीय अधिकारी अपने बचाव का ताना-बाना बुनने में जुट गए। शनिवार सुबह करीब 11 बजे डीआरएम प्रमोद कुमार के अलावा सीनियर डीईएन आरपी सिंह, सीनियर डीएसओ एपी गौतम, डीएसई-वन सहित कई प्रमुख अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
डीआरएम ने पिलर गिरने से पुल के ऊपर बने रेल ट्रैक को हुई क्षति और पुल के नीचे नदी क्षेत्र में उतरकर अन्य स्पान का निरीक्षण किया। रेलवे पुल के अन्य स्पान के आसपास भी नदी की तेज धारा द्वारा कटान किए जाने पर डीआरएम ने चिंता जताई। डीआरएम से क्षेत्रीय लोगों एवं मीडिया कर्मियों ने रेलवे अधिकारियों की लापरवाही से घटना होने की शिकायत की। उन्हें बताया गया कि अमर उजाला ने 26 जून व दो जुलाई के अंक में सचित्र खबरें प्रकाशित कर लापरवाह रेलवे अधिकारियों को झकझोरा था, मगर पुल को बचाने के लिए अपेक्षित बचाव कार्य नहीं किए गए। डीआरएम ने अधीनस्थ अधिकारियों को घटना की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
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पैसेंजर ट्रेनें अनिश्चितकाल के लिए रोकीं
नजीबाबाद। रेल पुल को क्षति पहुंचने के बाद रेलवे अधिकारियों ने नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच पैसेंजर ट्रेनों का संचालन अनिश्चितकाल तक के लिए रोक दिया गया है, जबकि गढ़वाल एक्सप्रेस व मसूरी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन नजीबाबाद से जारी रखा है।
व्हाट्सएप पर देख स्थिति जानी
नजीबाबाद। अमर उजाला द्वारा 26 जून को खतरे में पड़ा रेलवे पुल... और 2 जुलाई के अंक में अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है... शीर्षक से सचित्र प्रकाशित की गईं खबरों का डीआरएम ने व्हाट्सएप पर अवलोकन किया। उन्होंने माना कि अखबार द्वारा चेताने के बावजूद रेलवे अधिकारियों ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने समय रहते सूचना देने वाले रेलवे के चौकीदार की सराहना की।
अधीनस्थों पर डीआरएम मेहरबान
नजीबाबाद। रेलवे पुल के बचाव के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले एडीईएन से डीआरएम ने जवाब तलब तो किया, मगर उन पर नरमी बनाए रखी। दरअसल, एडीईएन ने डीआरएम को बताया कि अमर उजाला में खबरें प्रकाशित होने के बाद उन्होंने सीनियर डीईएन को स्थिति से अवगत करा दिया था। इस पर 28 जून को उन्होंने मौका मुआयना किया था। अपने अधीनस्थ को फंसते देख डीआरएम ने प्राकृतिक आपदा के चलते पुल का पिलर गिरने की बात कही।
पॉकेट डायरी पर आईओडब्लू को हड़काया
नजीबाबाद। रेलवे पुल को हुई क्षति का जायजा ले रहे आईओडब्लू के हाथों में पॉकेट डायरी देखकर डीएसई-वन ने फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पुल की मरम्मत कार्य की तैयारी को मजाक बना रहे हो। नोटिफिकेशन ऑफिस डायरी पर होना चाहिए।
पुल के आसपास होता रहा अवैध खनन
नजीबाबाद। गत वर्षों में सूकरो नदी रेल पुल के दोनों ओर काफी नजदीक खनन माफिया ने रेत-बजरी का ताबड़तोड़ अवैध खनन किया। खनन माफिया के हौसले इतने बढ़े हुए थे कि खनन वाहनों की आवाजाही के लिए पुल के नीचे रास्ता बना लिया गया था। रेल अधिकारियों ने इसका ठीकरा वन विभाग के अधिकारियों के सिर फोड़ा। उनका कहना था कि कौड़िया वन रेंजर एवं अन्य अधिकारी अवैध खनन पर चुप्पी साधे बैठे थे।
दोनों स्पानों को खतरा
नजीबाबाद। सूकरो नदी में उफान आया तो रेल पुल के तीन और स्पान को खतरा बढ़ जाएगा। दरअसल, नदी की तेज धारा से नजीबाबाद एंड के दूसरे व तीसरे तथा कोटद्वार एंड के तीसरे स्पान के नीचे कटान होने से पिलरों को क्षति पहुंचने की आशंका है। उधर, मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूकरो नदी पर बने सड़क पुल को भी खतरा बढ़ गया है। ताबड़तोड़ अवैैध खनन से सड़क पुल के तीन स्पान के आसपास से मिट्टी कटकर बह चुकी है।
ठेकेदार से कराया मुफ्त में काम
नजीबाबाद। रेलवे निर्माण खंड के अधिकारियों ने ठेकेदार पर ही क्षतिग्रस्त ठोकरों की मरम्मत की जिम्मेदारी थोपकर पीछा छुड़ा लिया। डीआरएम के सामने यह मुद्दा उठने पर एडीईएन ने बताया कि बचाव कार्य ठेकेदार के माध्यम से नि:शुल्क कराया गया है। अब यह बात डीआरएम के गले नहीं उतरी कि जनसुरक्षा से जुड़े अतिसंवेदनशील मामले में मुफ्त में किसी से बचाव कार्य कराने की कितनी उम्मीद की जा सकती है।
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नजीबाबाद-कोटद्वार ब्रांच लाइन पर नजीबाबाद से करीब 20 किलोमीटर दूर सूकरो नदी पर वर्ष 1860 में निर्मित रेलवे पुल है। भूतल से 9.15 मीटर ऊंचे सात स्पान (पिलर) पर रेलवे पुल बना है। नजीबाबाद एंड से चौथा पिलर शनिवार तड़के करीब 4.30 बजे जमींदोज हो गया। संयोग से उस समय रेलवे का एक चौकीदार पुल क्षेत्र में ही था। उसने शनिवार को करीब पांच बजे नजीबाबाद रेलवे स्टेशन पर इसकी सूचना दी। दिल्ली से चलकर नजीबाबाद पहुंची मसूरी एक्सप्रेस के कोचों को आनन-फानन में कोटद्वार के लिए रवाना होने से रोका गया। कुछ ही देर में रेलवे के एडीईएन सीताराम, आईओडब्लू एके शर्मा रेल मजदूरों को साथ लेकर सूकरो रेल पुल पर पहुंच गए। रेल ट्रैक का अवलोकन कर उन्होंने डीआरएम सहित मुरादाबाद मंडल के रेल अधिकारियों को सूचित किया। आला रेलवे अधिकारियों के मौके पर पहुंचने से पहले स्थानीय अधिकारी अपने बचाव का ताना-बाना बुनने में जुट गए। शनिवार सुबह करीब 11 बजे डीआरएम प्रमोद कुमार के अलावा सीनियर डीईएन आरपी सिंह, सीनियर डीएसओ एपी गौतम, डीएसई-वन सहित कई प्रमुख अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
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डीआरएम ने पिलर गिरने से पुल के ऊपर बने रेल ट्रैक को हुई क्षति और पुल के नीचे नदी क्षेत्र में उतरकर अन्य स्पान का निरीक्षण किया। रेलवे पुल के अन्य स्पान के आसपास भी नदी की तेज धारा द्वारा कटान किए जाने पर डीआरएम ने चिंता जताई। डीआरएम से क्षेत्रीय लोगों एवं मीडिया कर्मियों ने रेलवे अधिकारियों की लापरवाही से घटना होने की शिकायत की। उन्हें बताया गया कि अमर उजाला ने 26 जून व दो जुलाई के अंक में सचित्र खबरें प्रकाशित कर लापरवाह रेलवे अधिकारियों को झकझोरा था, मगर पुल को बचाने के लिए अपेक्षित बचाव कार्य नहीं किए गए। डीआरएम ने अधीनस्थ अधिकारियों को घटना की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
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पैसेंजर ट्रेनें अनिश्चितकाल के लिए रोकीं
नजीबाबाद। रेल पुल को क्षति पहुंचने के बाद रेलवे अधिकारियों ने नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच पैसेंजर ट्रेनों का संचालन अनिश्चितकाल तक के लिए रोक दिया गया है, जबकि गढ़वाल एक्सप्रेस व मसूरी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन नजीबाबाद से जारी रखा है।
व्हाट्सएप पर देख स्थिति जानी
नजीबाबाद। अमर उजाला द्वारा 26 जून को खतरे में पड़ा रेलवे पुल... और 2 जुलाई के अंक में अधिकारियों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है... शीर्षक से सचित्र प्रकाशित की गईं खबरों का डीआरएम ने व्हाट्सएप पर अवलोकन किया। उन्होंने माना कि अखबार द्वारा चेताने के बावजूद रेलवे अधिकारियों ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने समय रहते सूचना देने वाले रेलवे के चौकीदार की सराहना की।
अधीनस्थों पर डीआरएम मेहरबान
नजीबाबाद। रेलवे पुल के बचाव के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले एडीईएन से डीआरएम ने जवाब तलब तो किया, मगर उन पर नरमी बनाए रखी। दरअसल, एडीईएन ने डीआरएम को बताया कि अमर उजाला में खबरें प्रकाशित होने के बाद उन्होंने सीनियर डीईएन को स्थिति से अवगत करा दिया था। इस पर 28 जून को उन्होंने मौका मुआयना किया था। अपने अधीनस्थ को फंसते देख डीआरएम ने प्राकृतिक आपदा के चलते पुल का पिलर गिरने की बात कही।
पॉकेट डायरी पर आईओडब्लू को हड़काया
नजीबाबाद। रेलवे पुल को हुई क्षति का जायजा ले रहे आईओडब्लू के हाथों में पॉकेट डायरी देखकर डीएसई-वन ने फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पुल की मरम्मत कार्य की तैयारी को मजाक बना रहे हो। नोटिफिकेशन ऑफिस डायरी पर होना चाहिए।
पुल के आसपास होता रहा अवैध खनन
नजीबाबाद। गत वर्षों में सूकरो नदी रेल पुल के दोनों ओर काफी नजदीक खनन माफिया ने रेत-बजरी का ताबड़तोड़ अवैध खनन किया। खनन माफिया के हौसले इतने बढ़े हुए थे कि खनन वाहनों की आवाजाही के लिए पुल के नीचे रास्ता बना लिया गया था। रेल अधिकारियों ने इसका ठीकरा वन विभाग के अधिकारियों के सिर फोड़ा। उनका कहना था कि कौड़िया वन रेंजर एवं अन्य अधिकारी अवैध खनन पर चुप्पी साधे बैठे थे।
दोनों स्पानों को खतरा
नजीबाबाद। सूकरो नदी में उफान आया तो रेल पुल के तीन और स्पान को खतरा बढ़ जाएगा। दरअसल, नदी की तेज धारा से नजीबाबाद एंड के दूसरे व तीसरे तथा कोटद्वार एंड के तीसरे स्पान के नीचे कटान होने से पिलरों को क्षति पहुंचने की आशंका है। उधर, मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूकरो नदी पर बने सड़क पुल को भी खतरा बढ़ गया है। ताबड़तोड़ अवैैध खनन से सड़क पुल के तीन स्पान के आसपास से मिट्टी कटकर बह चुकी है।
ठेकेदार से कराया मुफ्त में काम
नजीबाबाद। रेलवे निर्माण खंड के अधिकारियों ने ठेकेदार पर ही क्षतिग्रस्त ठोकरों की मरम्मत की जिम्मेदारी थोपकर पीछा छुड़ा लिया। डीआरएम के सामने यह मुद्दा उठने पर एडीईएन ने बताया कि बचाव कार्य ठेकेदार के माध्यम से नि:शुल्क कराया गया है। अब यह बात डीआरएम के गले नहीं उतरी कि जनसुरक्षा से जुड़े अतिसंवेदनशील मामले में मुफ्त में किसी से बचाव कार्य कराने की कितनी उम्मीद की जा सकती है।