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बाजार की मांग पर तैयार करें उत्पादन : डीएम
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बिजनौर कलक्ट्रेट में महात्मा विदुर सभागार में कृषक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक लेत?
- फोटो : BIJNOR
बाजार की मांग पर तैयार करें उत्पादन : डीएम
बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कृषक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वह बाजार की मांग के अनुसार कलस्टर के रूप में गुणवत्ता युक्त उत्पादों का उत्पादन करें। कलस्टर के अंदर ही उत्पादित उत्पादों के प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग व विपणन का कार्य सक्षम लोगों से लिए जाने की आवश्यकता है। उत्पादित उत्पादों का अधिक से अधिक एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त करने के लिए विपणन का कार्य योग्य और निपुण हाथों में देना होगा।
कलक्ट्रेट के महात्मा विदुर सभागार में डीएम ने कहा कि उत्पादों के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन की तकनीक भी हमें सीखनी होगी। इन सब कार्यों के लिए निश्चित रूप से पूंजी की आवश्यकता होगी और जो भी किसान उत्पादक संगठन अथवा कलस्टर यह कार्य करने के लिए तैयार हैं, तो जिला प्रशासन संबंधित विभाग सहयोग करने के लिए कटिबद्ध है। जनपद में गन्ना, खाद्यान्न, दलहनी व तिलहनी फसलों, सब्जियों, मसाले, जड़ी-बूटी व फूलों की असीम संभावनाएं हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण की विषय वस्तु, उद्देश्य व महत्व से अवगत कराया।
मुख्य प्रशिक्षक डॉ. जेपी शर्मा, महाप्रबंधक शील बायोटेक ने कृषक उत्पादक संगठन के गठन, संगठनात्मक ढांचे, आवश्यकता एवं महत्व के बारे में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने प्राकृतिक खेती तथा कृषि विज्ञान केंद्र पर प्राकृतिक खेती पर आयोजित ट्रायल एवं नवरत्न हरी खाद तथा फसलों की बायोफोर्टीफाइड प्रजातियों एवं उसके महत्व के बारे में बताया। डॉ. सोबन ने निर्यात के क्षेत्र में संभावना, देय सुविधाएं, विभिन्न निर्धारित मानक व शर्तें, पैकेज फॉर ग्रांटिंग आदि के बारे में बताया। उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने कलस्टर अप्रोच के आधार पर खेती के महत्व और लाभ बताए। आत्मा प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी ने भी विचार व्यक्त किए।
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बिजनौर। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कृषक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वह बाजार की मांग के अनुसार कलस्टर के रूप में गुणवत्ता युक्त उत्पादों का उत्पादन करें। कलस्टर के अंदर ही उत्पादित उत्पादों के प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग व विपणन का कार्य सक्षम लोगों से लिए जाने की आवश्यकता है। उत्पादित उत्पादों का अधिक से अधिक एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त करने के लिए विपणन का कार्य योग्य और निपुण हाथों में देना होगा।
कलक्ट्रेट के महात्मा विदुर सभागार में डीएम ने कहा कि उत्पादों के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन की तकनीक भी हमें सीखनी होगी। इन सब कार्यों के लिए निश्चित रूप से पूंजी की आवश्यकता होगी और जो भी किसान उत्पादक संगठन अथवा कलस्टर यह कार्य करने के लिए तैयार हैं, तो जिला प्रशासन संबंधित विभाग सहयोग करने के लिए कटिबद्ध है। जनपद में गन्ना, खाद्यान्न, दलहनी व तिलहनी फसलों, सब्जियों, मसाले, जड़ी-बूटी व फूलों की असीम संभावनाएं हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण की विषय वस्तु, उद्देश्य व महत्व से अवगत कराया।
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मुख्य प्रशिक्षक डॉ. जेपी शर्मा, महाप्रबंधक शील बायोटेक ने कृषक उत्पादक संगठन के गठन, संगठनात्मक ढांचे, आवश्यकता एवं महत्व के बारे में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने प्राकृतिक खेती तथा कृषि विज्ञान केंद्र पर प्राकृतिक खेती पर आयोजित ट्रायल एवं नवरत्न हरी खाद तथा फसलों की बायोफोर्टीफाइड प्रजातियों एवं उसके महत्व के बारे में बताया। डॉ. सोबन ने निर्यात के क्षेत्र में संभावना, देय सुविधाएं, विभिन्न निर्धारित मानक व शर्तें, पैकेज फॉर ग्रांटिंग आदि के बारे में बताया। उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने कलस्टर अप्रोच के आधार पर खेती के महत्व और लाभ बताए। आत्मा प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह योगी ने भी विचार व्यक्त किए।
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