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बिजनौर को पर्यटन का ‘गेट वे’ बनाने की तैयारी
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बिजनौर को पर्यटन का ‘गेट वे’ बनाने की तैयारी
रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिला बिजनौर वन्यजीव, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों से भरा पड़ा है। बात महाभारत काल की करें, बीती एक शताब्दी की या फिर अमानगढ़ जैसी वन्य जीव बाहुल्य वन रेंज की, सभी जगहों पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद आज तक जिला उपेक्षित रहा। न तो अधिकारी और न ही किसी नेता ने इन सभी विरासतों को जोड़ने का प्रयास किया। अब प्रशासन ने फिर से बिजनौर को पर्यटन के नक्शे पर जगह दिलाने का प्रयास शुरू किया है। सबकुछ ठीक रहा तो बिजनौर जिला मुख्यालय इन पर्यटन स्थलों तक जाने का गेट वे बन जाएगा। इससे जहां रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी, वहीं जिले का नाम देश-दुनिया में चमक उठेगा। पहले चरण में डीएम बिजनौर उमेश मिश्रा ने सभी महत्वपूर्ण विरासतों के लिए एक अलग वेबसाइट बनाने के निर्देश दिए हैं। दूसरे चरण में यहां संबंधित विभाग से प्रोजेक्ट मांगे गए हैं। (संवाद)
संजोई जाएगी जिले की विरासतें: डीएम
बिजनौर जिले की ऐतिहासिक, प्राचीन, पर्यटन विरासतों को संयोजा जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे और इसके लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। जो महत्वपूर्ण जगह हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है - उमेश मिश्रा, डीएम
राजा वेन का वेननगर है आज का बिजनौर
बिजनौर का नाम पहले वेन नगर था। राजा वेन के नाम पर इसका नाम वेन नगर पड़ा। आम बोलचाल की भाषा में आते गए परिवर्तन के कारण कुछ काल के बाद यह नाम विजनगर हुआ और अब बिजनौर है। वेन नगर के साक्ष्य आज भी बिजनौर से दो किलोमीटर दूर, दक्षिण-पश्चिम में खेतों में और खंडहरों के रूप में मिलते हैं। तत्कालीन वेन नगर की दीवारें, मूर्तियां एवं खिलौने आज भी यहां मिलते हैं। लगता है, यह नगर थोड़ी ही दूर से गुजरती गंगा की बाढ़ में काल कल्वित हो गया।
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बिजनौर से मिला था देश को भारत नाम
कालीदास के संस्कृत महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम में बिजनौर का जिक्र है। उसमें बताया गया है कि राजा दुष्यंत और शकुंतला का मिलन गंगा और मालन के मिलन स्थल पर हुआ था। हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत ने पहली बार शकुंतला को मालन और गंगा के मिलन पर ही देखा था और दोनों में प्रेम यहीं हुआ। शकुंतला ऋषि कण्व के आश्रम में ही रहती थीं। यह बिजनौर जिले के रावली क्षेत्र में स्थित है। यहीं पास में कण्व ऋषि आश्रम भी है। बताया जाता है कि शकुंतला और राजा दुष्यंत के पुत्र भरत ने बचपन में ही शेर के शावक को पकड़कर उसके दांत गिन दिए थे। उन्हीं के नाम पर आगे चलकर देश का नाम भारत पड़ा। बिजनौर से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंगा-मालन का मिलन और कण्व ऋषि आश्रम उपेक्षा के चलते अंधेरे में कहीं खो गए। हालांकि सरकारी कागजों की बात करें तो कण्व ऋषि आश्रम उत्तराखंड में बताया जाता है, जबकि अभिज्ञान शाकुंतलन जैसे महाकाव्य जैसे सबूत होने के बावजूद बिजनौर में इसे विकसित करने को आज तक कोई आगे नहीं आया।
भगवान श्रीकृष्ण ने साग विदुर घर खायो
बिजनौर जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर गंगा घाट पर स्थित विदुर कुटी यूं तो महाभारत सर्किट में शामिल हो चुकी है, लेकिन आज भी यहां पर्यटकों को बुलाने, घुमाने और रुकने के लिहाज से बहुत काम होना बाकी है। इस जगह के बारे में बात करें तो विदुरकुटी गंगा किनारे स्थित है। महात्मा विदुर की यह पावन आश्रम स्थली है। महाभारत काल से जोड़कर इसका भव्य इतिहास है। कहा जाता है कि महाभारत से पहले जब भगवान श्रीकृष्ण शांति प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर आए थे तो उन्होंने कोरवों का छप्पन भोग त्यागकर महात्मा विदुर की कुटी में बथुए का साग खाया था। कहते हैं कि यह बथुए को ऐसा वरदान है कि आज भी साल के 12 महीने यहां बथुआ उगता है। आसपास की बात करें तो यहां पास में ही महाभारत में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की विधवाओं के लिए भी आश्रम बनवाया गया था। जिसे आज दारानगर के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त महाभारत काल से ही जुड़ी एक और जगह है सैंद्वार, जो चांदपुर के पास एक गांव है। कहा जाता है कि महाभारत काल में सैन्यद्वार इसका नाम था। यहां पर भारद्वाज ऋषि के पुत्र द्रोण का आश्रम एवं उनका सैन्य प्रशिक्षण केंद्र हुआ करता था।
सुल्ताना के नाम से प्रसिद्ध है नजीबुद्दौला का किला
नजीबाबाद में एक किला मौजूद हैं, जिसे आज के समय में लोग सुल्ताना डाकू का किले के नाम से जानते हैं। असल में इस्लामिक साम्राज्यवादियों में से एक नजीबुद्दौला का किला है। कहा तो यह भी जाता है कि मोरध्वज के विशाल किले को बलपूर्वक तोड़कर उसके मलबे, ईंट आदि से यह विशाल किला बनवाया गया था। बिजनौर जिला गजेटियर कहता है कि इसमें लगे पत्थर मोरध्वज स्थान से लाकर लगाए गए हैं। मोरध्वज के किले की खोदाई में आज भी मिल रहे बड़े पत्थरों और नजीबुद्दौला के किले में लगे पत्थरों की गुणवत्ता एकरूपता और आकार बिल्कुल एक है। यहां पर नजीबुद्दौला के वंशजों की समाधियां भी हैं। इसके अलावा महाभारत काल के राजा मोरध्वज का नगर, मोरध्वज, बिजनौर से करीब 40 किलोमीटर दूर है। गढ़वाल विश्वविद्यालय ने जब खोदाई करायी तो यहां के भवनों में ईंटें ईसा से 5 शताब्दी पूर्व की प्राप्त हुईं। यहां पर बहुमूल्य मूर्तियां और धातु का मिलना आज भी जारी है। यहां के खेतों में बड़े-बड़े शिलालेख और किले के अवशेष अभी भी किसानों के हल के फलक से टकराते हैं।
अमानगढ़ पर्यटन का एक विशाल क्षेत्र
अमानगढ़ वन रेंज बिजनौर की सबसे महत्वपूर्ण और वन्य जीव बाहुल्य है। हालांकि वन निगम ने इसे हाल ही में पर्यटन जोन के रूप में विकसित करने की अनुमति दे दी है। करीब एक दशक पहले आईएफएस डॉ. एच राजा मोहन ने इसे गेट वे ऑफ कार्बेट का नाम दिया था और अमानगढ़ टूरिज्म जोन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। इस रेंज की बात करें तो यहां पर टाइगर, हाथी, तेंदुआ, भालू, लकड़ बग्गा, हिरन, पक्षियों की सैकड़ों प्रजाति देखने को मिलती हैं। इससे भी खास है इसका विशाल क्षेत्रफल जो करीब 9580 हेक्टेयर है। यहां सरकारी गेस्ट हाउस तो है, लेकिन बाहर क्षेत्रों में रुकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके के नजदीक पीली डैम भी बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिला बिजनौर वन्यजीव, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों से भरा पड़ा है। बात महाभारत काल की करें, बीती एक शताब्दी की या फिर अमानगढ़ जैसी वन्य जीव बाहुल्य वन रेंज की, सभी जगहों पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इसके बावजूद आज तक जिला उपेक्षित रहा। न तो अधिकारी और न ही किसी नेता ने इन सभी विरासतों को जोड़ने का प्रयास किया। अब प्रशासन ने फिर से बिजनौर को पर्यटन के नक्शे पर जगह दिलाने का प्रयास शुरू किया है। सबकुछ ठीक रहा तो बिजनौर जिला मुख्यालय इन पर्यटन स्थलों तक जाने का गेट वे बन जाएगा। इससे जहां रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी, वहीं जिले का नाम देश-दुनिया में चमक उठेगा। पहले चरण में डीएम बिजनौर उमेश मिश्रा ने सभी महत्वपूर्ण विरासतों के लिए एक अलग वेबसाइट बनाने के निर्देश दिए हैं। दूसरे चरण में यहां संबंधित विभाग से प्रोजेक्ट मांगे गए हैं। (संवाद)
संजोई जाएगी जिले की विरासतें: डीएम
बिजनौर जिले की ऐतिहासिक, प्राचीन, पर्यटन विरासतों को संयोजा जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे और इसके लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। जो महत्वपूर्ण जगह हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है - उमेश मिश्रा, डीएम
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राजा वेन का वेननगर है आज का बिजनौर
बिजनौर का नाम पहले वेन नगर था। राजा वेन के नाम पर इसका नाम वेन नगर पड़ा। आम बोलचाल की भाषा में आते गए परिवर्तन के कारण कुछ काल के बाद यह नाम विजनगर हुआ और अब बिजनौर है। वेन नगर के साक्ष्य आज भी बिजनौर से दो किलोमीटर दूर, दक्षिण-पश्चिम में खेतों में और खंडहरों के रूप में मिलते हैं। तत्कालीन वेन नगर की दीवारें, मूर्तियां एवं खिलौने आज भी यहां मिलते हैं। लगता है, यह नगर थोड़ी ही दूर से गुजरती गंगा की बाढ़ में काल कल्वित हो गया।
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बिजनौर से मिला था देश को भारत नाम
कालीदास के संस्कृत महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम में बिजनौर का जिक्र है। उसमें बताया गया है कि राजा दुष्यंत और शकुंतला का मिलन गंगा और मालन के मिलन स्थल पर हुआ था। हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत ने पहली बार शकुंतला को मालन और गंगा के मिलन पर ही देखा था और दोनों में प्रेम यहीं हुआ। शकुंतला ऋषि कण्व के आश्रम में ही रहती थीं। यह बिजनौर जिले के रावली क्षेत्र में स्थित है। यहीं पास में कण्व ऋषि आश्रम भी है। बताया जाता है कि शकुंतला और राजा दुष्यंत के पुत्र भरत ने बचपन में ही शेर के शावक को पकड़कर उसके दांत गिन दिए थे। उन्हीं के नाम पर आगे चलकर देश का नाम भारत पड़ा। बिजनौर से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंगा-मालन का मिलन और कण्व ऋषि आश्रम उपेक्षा के चलते अंधेरे में कहीं खो गए। हालांकि सरकारी कागजों की बात करें तो कण्व ऋषि आश्रम उत्तराखंड में बताया जाता है, जबकि अभिज्ञान शाकुंतलन जैसे महाकाव्य जैसे सबूत होने के बावजूद बिजनौर में इसे विकसित करने को आज तक कोई आगे नहीं आया।
भगवान श्रीकृष्ण ने साग विदुर घर खायो
बिजनौर जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर गंगा घाट पर स्थित विदुर कुटी यूं तो महाभारत सर्किट में शामिल हो चुकी है, लेकिन आज भी यहां पर्यटकों को बुलाने, घुमाने और रुकने के लिहाज से बहुत काम होना बाकी है। इस जगह के बारे में बात करें तो विदुरकुटी गंगा किनारे स्थित है। महात्मा विदुर की यह पावन आश्रम स्थली है। महाभारत काल से जोड़कर इसका भव्य इतिहास है। कहा जाता है कि महाभारत से पहले जब भगवान श्रीकृष्ण शांति प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर आए थे तो उन्होंने कोरवों का छप्पन भोग त्यागकर महात्मा विदुर की कुटी में बथुए का साग खाया था। कहते हैं कि यह बथुए को ऐसा वरदान है कि आज भी साल के 12 महीने यहां बथुआ उगता है। आसपास की बात करें तो यहां पास में ही महाभारत में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की विधवाओं के लिए भी आश्रम बनवाया गया था। जिसे आज दारानगर के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त महाभारत काल से ही जुड़ी एक और जगह है सैंद्वार, जो चांदपुर के पास एक गांव है। कहा जाता है कि महाभारत काल में सैन्यद्वार इसका नाम था। यहां पर भारद्वाज ऋषि के पुत्र द्रोण का आश्रम एवं उनका सैन्य प्रशिक्षण केंद्र हुआ करता था।
सुल्ताना के नाम से प्रसिद्ध है नजीबुद्दौला का किला
नजीबाबाद में एक किला मौजूद हैं, जिसे आज के समय में लोग सुल्ताना डाकू का किले के नाम से जानते हैं। असल में इस्लामिक साम्राज्यवादियों में से एक नजीबुद्दौला का किला है। कहा तो यह भी जाता है कि मोरध्वज के विशाल किले को बलपूर्वक तोड़कर उसके मलबे, ईंट आदि से यह विशाल किला बनवाया गया था। बिजनौर जिला गजेटियर कहता है कि इसमें लगे पत्थर मोरध्वज स्थान से लाकर लगाए गए हैं। मोरध्वज के किले की खोदाई में आज भी मिल रहे बड़े पत्थरों और नजीबुद्दौला के किले में लगे पत्थरों की गुणवत्ता एकरूपता और आकार बिल्कुल एक है। यहां पर नजीबुद्दौला के वंशजों की समाधियां भी हैं। इसके अलावा महाभारत काल के राजा मोरध्वज का नगर, मोरध्वज, बिजनौर से करीब 40 किलोमीटर दूर है। गढ़वाल विश्वविद्यालय ने जब खोदाई करायी तो यहां के भवनों में ईंटें ईसा से 5 शताब्दी पूर्व की प्राप्त हुईं। यहां पर बहुमूल्य मूर्तियां और धातु का मिलना आज भी जारी है। यहां के खेतों में बड़े-बड़े शिलालेख और किले के अवशेष अभी भी किसानों के हल के फलक से टकराते हैं।
अमानगढ़ पर्यटन का एक विशाल क्षेत्र
अमानगढ़ वन रेंज बिजनौर की सबसे महत्वपूर्ण और वन्य जीव बाहुल्य है। हालांकि वन निगम ने इसे हाल ही में पर्यटन जोन के रूप में विकसित करने की अनुमति दे दी है। करीब एक दशक पहले आईएफएस डॉ. एच राजा मोहन ने इसे गेट वे ऑफ कार्बेट का नाम दिया था और अमानगढ़ टूरिज्म जोन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। इस रेंज की बात करें तो यहां पर टाइगर, हाथी, तेंदुआ, भालू, लकड़ बग्गा, हिरन, पक्षियों की सैकड़ों प्रजाति देखने को मिलती हैं। इससे भी खास है इसका विशाल क्षेत्रफल जो करीब 9580 हेक्टेयर है। यहां सरकारी गेस्ट हाउस तो है, लेकिन बाहर क्षेत्रों में रुकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके के नजदीक पीली डैम भी बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।