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गंगा को निर्मल बनाने के लिए प्रभात ने किया शोध
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गंगा को निर्मल बनाने के लिए प्रभात ने किया शोध
बिजनौर। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए केंद्र सरकार की मुहिम में गांव बिसाठ निवासी प्रभात वशिष्ठ ने पेपर मिलों से निकलने वाले हानिकारक पदार्थों पर शोध किया है। इसी रिसर्च के आधार पर हिमाचल में कंक्रीट ब्लॉक के उत्पादन के लिए एक इकाई स्थापित की है। इसके लिए उन्हें वहां सम्मानित किया गया है।
हल्दौर क्षेत्र के गांव बिसाठ निवासी पंडित चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल के डॉक्टर अवधेश वशिष्ठ के छोटे भाई प्रभात ने कागज उद्योगों से उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों पर शोध किया है। उन्होंने विभिन्न उद्योगों के अपशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण के अनुकूल सीमेंट, कम वजन वाली ईंटों और कंक्रीट का विकास किया। रुचिरा पेपर इंडस्ट्री कालाअंब, हिमाचल प्रदेश ने उनके शोध के आधार पर कंक्रीट ब्लॉक के उत्पादन के लिए एक इकाई स्थापित की है।
डॉक्टर अवधेश ने बताया कि औद्योगिक कचरे के निपटान की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए प्रभात का शोध महत्वपूर्ण है, जो पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ-साथ गंगा और अन्य नदियों के जल प्रदूषण को कम करने में भी मदद करेगा। उन्होंने बताया कि कल कारखानों का अपशिष्ट, वेस्ट मैटरियल गंगा और अन्य नदियों में ऐसे ही बहा दिया जाता है। इससे नदियों का जल जहरीला होने लगता है। लेकिन प्रभात ने वेस्ट मेटिरियल को ही दोबारा से प्रयोग में लाकर पेपर इंडस्ट्री में आने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। वहीं, गंगा की अविरल धारा को भी निर्मल बनाया जा सकता है। प्रभात ने एमडीएस इंटर कॉलेज नजीबाबाद से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की है। जबकि सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ से बी टेक और रुड़की आईआईटी से एम टेक और पीएचडी की है।
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बिजनौर। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए केंद्र सरकार की मुहिम में गांव बिसाठ निवासी प्रभात वशिष्ठ ने पेपर मिलों से निकलने वाले हानिकारक पदार्थों पर शोध किया है। इसी रिसर्च के आधार पर हिमाचल में कंक्रीट ब्लॉक के उत्पादन के लिए एक इकाई स्थापित की है। इसके लिए उन्हें वहां सम्मानित किया गया है।
हल्दौर क्षेत्र के गांव बिसाठ निवासी पंडित चंद्रकांत आत्रेय हॉस्पिटल के डॉक्टर अवधेश वशिष्ठ के छोटे भाई प्रभात ने कागज उद्योगों से उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों पर शोध किया है। उन्होंने विभिन्न उद्योगों के अपशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण के अनुकूल सीमेंट, कम वजन वाली ईंटों और कंक्रीट का विकास किया। रुचिरा पेपर इंडस्ट्री कालाअंब, हिमाचल प्रदेश ने उनके शोध के आधार पर कंक्रीट ब्लॉक के उत्पादन के लिए एक इकाई स्थापित की है।
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डॉक्टर अवधेश ने बताया कि औद्योगिक कचरे के निपटान की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए प्रभात का शोध महत्वपूर्ण है, जो पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ-साथ गंगा और अन्य नदियों के जल प्रदूषण को कम करने में भी मदद करेगा। उन्होंने बताया कि कल कारखानों का अपशिष्ट, वेस्ट मैटरियल गंगा और अन्य नदियों में ऐसे ही बहा दिया जाता है। इससे नदियों का जल जहरीला होने लगता है। लेकिन प्रभात ने वेस्ट मेटिरियल को ही दोबारा से प्रयोग में लाकर पेपर इंडस्ट्री में आने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। वहीं, गंगा की अविरल धारा को भी निर्मल बनाया जा सकता है। प्रभात ने एमडीएस इंटर कॉलेज नजीबाबाद से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की है। जबकि सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ से बी टेक और रुड़की आईआईटी से एम टेक और पीएचडी की है।
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