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आलू से किसानों को हो रही बंपर कमाई
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बिजनौर के गांव चंदनपुरा में आलू की खुदाई करता किसान।
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। आलू की दो महीने की फसल से होने वाली कमाई ने गन्ने के खेत से दो महीने में होने वाली कमाई को पीछे छोड़ दिया है। आलू की फसल से किसानों को बंपर आमदनी हो रही है। आढ़त पर आलू 35 से 40 रुपये प्रति किग्रा बिक रहा है। कुछ दिन पहले नया आलू 60 रुपये प्रति किग्रा तक बिक चुका है। किसान अब फिर से नई फसल बोने की तैयारी में जुट गए हैं।
लॉकडाउन लगने के बाद से आलू की फसल मुनाफे की गारंटी बन गई है। लॉकडाउन के समय से ही आलू के दाम 40 रुपये प्रति किग्रा से नीचे नहीं गए हैं। इस समय बाजार में आलू की नई फसल आ चुकी है। यह फसल सितंबर में बोई गई थी। आमतौर पर पिछले सालों में नई फसल के दाम आढ़त पर 15 से 20 रुपये प्रति किग्रा तक रहते थे। इस साल आलू की नई फसल के दाम आढ़त पर 35 से 40 रुपये प्रति किग्रा तक जा रहे हैं। यानि करीब दोगुनी कीमत पर नया आलू आढ़त पर बिक रहा है। उपभोक्ताओं को फुटकर 45 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले सप्ताह तो नई फसल के दाम आढ़त पर 60 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गए थे। प्रति बीघा किसानों को 35 से 40 हजार रुपये तक की कमाई आलू से हो रही है, जबकि खेत से गन्ने का 70 क्विंटल बीघा का औसत दो साल लगातार निकलने पर भी औसतन 45 हजार रुपये की ही कमाई होती है। जितना गन्ने की फसल दो साल में पैसा देती है उतना आलू की फसल ने दो ही महीने में मुनाफा दे दिया है। मंडी के अफसरों का कहना है कि पंजाब से हर साल के मुकाबले कम आलू आ रहा है। इसलिए आलू के दाम ज्यादा हैं।
तीन साल पहले नहीं निकले थे दाम
आलू की फसल को किसान गर्मियों में कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं। तीन साल पहले फसल के दाम इतने गिर गए थे कि किसान कोल्ड स्टोरेज का किराया तक नहीं भर पाए थे। किसानों ने कोल्ड स्टोरेज से आलू नहीं उठाया था। सर्दियों में इस समय खोदे आलू को ठंड की वजह से कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जाता है।
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गांव सिकंदरी निवासी आशीष चौधरी का कहना है कि उनकी फसल 60 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से आढ़त पर बिकी है। आलू की फसल ने बंपर कमाई कराई है। उन्होंने मंडी में फसल बेची है।
गांव महमूदपुर निवासी किसान रामगोपाल सिंह ने 25 बीघा आलू बोया है और खोदाई होने वाली है। उनका कहना है कि आज तक आलू की फसल ने इतना मुनाफा कभी नहीं दिया है। वे मंडी में ही फसल बेचेंगे।
गांव शाहपुर लाल निवासी किसान रंजीत सिंह के 25 बीघा आलू है। उनका कहना है कि आलू की फसल से बंपर कमाई हो रही है। सभी फसलों के दाम ऐसे ही मिलने चाहिए।
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लॉकडाउन लगने के बाद से आलू की फसल मुनाफे की गारंटी बन गई है। लॉकडाउन के समय से ही आलू के दाम 40 रुपये प्रति किग्रा से नीचे नहीं गए हैं। इस समय बाजार में आलू की नई फसल आ चुकी है। यह फसल सितंबर में बोई गई थी। आमतौर पर पिछले सालों में नई फसल के दाम आढ़त पर 15 से 20 रुपये प्रति किग्रा तक रहते थे। इस साल आलू की नई फसल के दाम आढ़त पर 35 से 40 रुपये प्रति किग्रा तक जा रहे हैं। यानि करीब दोगुनी कीमत पर नया आलू आढ़त पर बिक रहा है। उपभोक्ताओं को फुटकर 45 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले सप्ताह तो नई फसल के दाम आढ़त पर 60 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गए थे। प्रति बीघा किसानों को 35 से 40 हजार रुपये तक की कमाई आलू से हो रही है, जबकि खेत से गन्ने का 70 क्विंटल बीघा का औसत दो साल लगातार निकलने पर भी औसतन 45 हजार रुपये की ही कमाई होती है। जितना गन्ने की फसल दो साल में पैसा देती है उतना आलू की फसल ने दो ही महीने में मुनाफा दे दिया है। मंडी के अफसरों का कहना है कि पंजाब से हर साल के मुकाबले कम आलू आ रहा है। इसलिए आलू के दाम ज्यादा हैं।
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तीन साल पहले नहीं निकले थे दाम
आलू की फसल को किसान गर्मियों में कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं। तीन साल पहले फसल के दाम इतने गिर गए थे कि किसान कोल्ड स्टोरेज का किराया तक नहीं भर पाए थे। किसानों ने कोल्ड स्टोरेज से आलू नहीं उठाया था। सर्दियों में इस समय खोदे आलू को ठंड की वजह से कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जाता है।
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गांव सिकंदरी निवासी आशीष चौधरी का कहना है कि उनकी फसल 60 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से आढ़त पर बिकी है। आलू की फसल ने बंपर कमाई कराई है। उन्होंने मंडी में फसल बेची है।
गांव महमूदपुर निवासी किसान रामगोपाल सिंह ने 25 बीघा आलू बोया है और खोदाई होने वाली है। उनका कहना है कि आज तक आलू की फसल ने इतना मुनाफा कभी नहीं दिया है। वे मंडी में ही फसल बेचेंगे।
गांव शाहपुर लाल निवासी किसान रंजीत सिंह के 25 बीघा आलू है। उनका कहना है कि आलू की फसल से बंपर कमाई हो रही है। सभी फसलों के दाम ऐसे ही मिलने चाहिए।