फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Post offices running on the lines of banks

बैंकों की तर्ज पर चल रहे डाकघर

Fri, 09 Oct 2020 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 12:39 AM IST
विज्ञापन
Post offices running on the lines of banks
बैंकों की तर्ज पर चल रहे डाकघर
विज्ञापन

बिजनौर। पिछले दस वर्षों में डाकघरों ने काफी तरक्की की है। जिले के शहरी क्षेत्रों में स्थित सभी डाकघरों को कंप्यूटराइज्ड किया जा चुका है। डाकघरों से लोगों को अधिक से अधिक संख्या में जोड़ने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चल रही हैं। कोरियर कंपनियों से मिल रही चुनौती से निपटने के लिए डाकघरों की स्पीड पोस्ट सेवा में काफी विस्तार हुआ है। पिछले पांच वर्षों में स्पीड पोस्ट की रफ्तार दोगुनी हो गई है। पांच साल पहले जिले भर के डाकघरों में रोजाना करीब चार हजार स्पीड पोस्ट होती थीं जो वर्तमान में बढ़कर आठ हजार पहुंच गई है।
जिले में लगभग 303 डाकघर हैं। इनमें प्रधान डाकघर बिजनौर, मुख्य डाकघर नजीबाबाद और धामपुर शामिल हैं। इसके अलावा 43 शहरी क्षेत्रों के अन्य डाकघर स्थित हैं। ग्रामीण इलाकों में लगभग 258 शाखा डाकघर संचालित हैं। बैंकों की तर्ज पर बिजनौर और धामपुर डाकघरों में एटीएम की सुविधा प्रदान की गई है। डाक अधीक्षक राधेश्याम शर्मा के अनुसार पिछले दस वर्षों की अपेक्षा आज के समय में डाकघरों में काफी बदलाव आया है। पहले सभी डाकघरों में हस्तचालित कार्य होता था, लेकिन अब सभी पैसे जमा करने से लेकर आहरित करने तक का कार्य कंप्यूटर हो गया है।
विज्ञापन

डाक अधीक्षक ने बताया कि एशियाई देशों में सबसे पहले भारत एक जुलाई 1876 को भारत यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का सदस्य बना। हमारे देश में डाक सेवाओं का इतिहास बहुत पुराना है। वर्ष 1854 में लार्ड डलहौजी ने भारत में डाक को एक विभाग के रूप में स्थापित किया। अब इसमें काफी बदलाव आए हैं, नई तकनीकों से जुड़ने के कारण यह ओर भी अधिक लोकप्रिय हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अरुण अग्रवाल के पास है 1400 डाक टिकटों का संग्रह
फोटो-
बिजनौर। मोहल्ला सिविल लाइन निवासी अरुण अग्रवाल डाक टिकटों के संग्रह करने के शौकीन हैं। अरुण ने बताया कि वह बचपन से ही डाक टिकट एकत्र कर रहे हैं। धीरे-धीरे उनकी यह प्रवृत्ति शौक में बदल गई। वर्तमान में उनके पास में लगभग 1400 डाक टिकटों का संग्रह है। उनके पास 1947 से लेकर आज तक के यानी करीब 73 साल पुराने डाक टिकट हैं। अरुण के मुताबिक पहले वे बिजनौर से टिकट खरीद लेते थे, लेकिन बीच में टिकट नहीं आने से उन्होंने 15 साल पहले अपने खाते लखनऊ और देहरादून के प्रधान डाकघरों में खुलवाए। समय समय पर जारी होने वाले टिकट अब उनके पास इन्हीं डाकघरों से आते हैं। इससे पूर्व वे डाक टिकट हैदराबाद, कोलकाता और जयपुर से मंगाते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed