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किसानों पर नरम, राजनीतिक दलों पर गरम रही पुलिस
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नगीना में सपा विधायक मनोज पारस के कैंप कार्यालय पर तैनात पुलिस।
- फोटो : BIJNOR
नेताओं के घरों पर रहा पुलिस का पहरा
बिजनौर। किसानों के आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन किसानों पर नरम व राजनीतिक दलों पर गरम रहा। किसानों को प्रशासन ने कलक्ट्रेट तक जाने दिया पर राजनीतिक दलों को वहां जाने की इजाजत नहीं दी। प्रशासन को डर था कि किसानों के आंदोलन में राजनीतिक दलों के लोग माहौल बिगाड़ सकते हैं। इस बात को लेकर प्रशासन पहले से ही चौकन्ना रहा। नेताओं के घरों पर पुलिस कर पहरा रहा।
सोमवार को किसानों के आंदोलन को लेकर प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। रात में ही राजनीतिक दलों के नेताओं को नजरबंद करना शुरू कर दिया था। उनके घरों पर पहरा बैठा दिया गया। पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश, मूलचंद चौहान, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शेरबाज पठान, रालोद जिलाध्यक्ष राहुल सिंह बिजनौर चेयरपर्सन के पति शमशाद अंसारी समेत कई नेताओं के घर पर पुलिस ने पहरा बैठा दिया। इन नेताओं को घर से नहीं निकलने दिया। प्रशासन ने पहले ही तय कर लिया था कि राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को किसानों के आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। किसान जत्थों के रूप में आते रहे पर उन्हें कहीं नहीं रोका। एक-दो जगह रोका भी तो उन्हें फिर कलक्ट्रेट जाने दिया। खुद डीएम व एसपी अपने हाथ में कमान लेकर किसानों के आंदोलन पर नजर गड़ाए हुए थे। जहां भी किसानों को रोका गया वहां दोनों अधिकारी खुद पहुंच रहे थे। कलक्ट्रेट में किसान पंचायत करते रहे। सपा नेता व कार्यकर्ताओं को पुलिस ने विकास भवन के बाहर बैरीकेडिंग पर रोक लिया। सपाइयों ने कलक्ट्रेट जाने की भरपूर कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं जाने दिया। ये सपाई सड़क पर धरना देकर बैठ गए। सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की, पर उनकी पुलिस ने एक नहीं सुनी।
रालोद के नेताओं पर भी पुलिस की नजर रही। गीतानगरी स्थित रालोद के जिलाध्यक्ष राहुल सिंह के आवास पर पार्टी के नेता पहुंच गए और वहां से निकलने की भरपूर कोशिश की। रालोद नेता भी किसानों के आंदोलन में शामिल होने की कोशिश में लगे थे पर पुलिस ने उन्हें वहां से नहीं जाने दिया। ये नेता भी वहीं धरना देकर बैठ गए। कलक्ट्रेट से किसानों की पंचायत खत्म होने के बाद किसान जब वापस लौटे तक प्रशासन ने राहत की सांस ली। किसानों के आंदोलन के मद्देनजर सिविल लाइन चौकी, कलक्ट्रेट व विकास भवन के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात कर रखा था। आंदोलन के दौरान किसान सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे तो उन्हें पुलिस कुछ नहीं कह रही थी।
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बिजनौर। किसानों के आंदोलन को लेकर पुलिस प्रशासन किसानों पर नरम व राजनीतिक दलों पर गरम रहा। किसानों को प्रशासन ने कलक्ट्रेट तक जाने दिया पर राजनीतिक दलों को वहां जाने की इजाजत नहीं दी। प्रशासन को डर था कि किसानों के आंदोलन में राजनीतिक दलों के लोग माहौल बिगाड़ सकते हैं। इस बात को लेकर प्रशासन पहले से ही चौकन्ना रहा। नेताओं के घरों पर पुलिस कर पहरा रहा।
सोमवार को किसानों के आंदोलन को लेकर प्रशासन ने पहले ही तैयारी कर ली थी। रात में ही राजनीतिक दलों के नेताओं को नजरबंद करना शुरू कर दिया था। उनके घरों पर पहरा बैठा दिया गया। पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश, मूलचंद चौहान, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शेरबाज पठान, रालोद जिलाध्यक्ष राहुल सिंह बिजनौर चेयरपर्सन के पति शमशाद अंसारी समेत कई नेताओं के घर पर पुलिस ने पहरा बैठा दिया। इन नेताओं को घर से नहीं निकलने दिया। प्रशासन ने पहले ही तय कर लिया था कि राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को किसानों के आंदोलन में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। किसान जत्थों के रूप में आते रहे पर उन्हें कहीं नहीं रोका। एक-दो जगह रोका भी तो उन्हें फिर कलक्ट्रेट जाने दिया। खुद डीएम व एसपी अपने हाथ में कमान लेकर किसानों के आंदोलन पर नजर गड़ाए हुए थे। जहां भी किसानों को रोका गया वहां दोनों अधिकारी खुद पहुंच रहे थे। कलक्ट्रेट में किसान पंचायत करते रहे। सपा नेता व कार्यकर्ताओं को पुलिस ने विकास भवन के बाहर बैरीकेडिंग पर रोक लिया। सपाइयों ने कलक्ट्रेट जाने की भरपूर कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं जाने दिया। ये सपाई सड़क पर धरना देकर बैठ गए। सरकार के खिलाफ खूब नारेबाजी की, पर उनकी पुलिस ने एक नहीं सुनी।
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रालोद के नेताओं पर भी पुलिस की नजर रही। गीतानगरी स्थित रालोद के जिलाध्यक्ष राहुल सिंह के आवास पर पार्टी के नेता पहुंच गए और वहां से निकलने की भरपूर कोशिश की। रालोद नेता भी किसानों के आंदोलन में शामिल होने की कोशिश में लगे थे पर पुलिस ने उन्हें वहां से नहीं जाने दिया। ये नेता भी वहीं धरना देकर बैठ गए। कलक्ट्रेट से किसानों की पंचायत खत्म होने के बाद किसान जब वापस लौटे तक प्रशासन ने राहत की सांस ली। किसानों के आंदोलन के मद्देनजर सिविल लाइन चौकी, कलक्ट्रेट व विकास भवन के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात कर रखा था। आंदोलन के दौरान किसान सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे तो उन्हें पुलिस कुछ नहीं कह रही थी।

बिजनौर के ग्राम स्वाहेड़ी में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष के घर पर तैनात पुलिस।- फोटो : BIJNOR
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