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आलमपुुरी गांव में रहा पुलिस का पहरा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 23 Feb 2018 11:55 PM IST
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लोकेंद्र चौहान के परिजनों से वार्ता के बाद कार्यकर्ताओं से वार्ता करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखने के लिए आसपास के गांवों की भीड़ उमड़ पड़ी। पर पुलिस ने किसी को गांव में नहीं फटकने दिया। मुख्यमंत्री की जगह हेलीकॉप्टर के दर्शन करके ही गांव वाले अपने घरों को लौट गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की झलक पाने के लिए गांव आलमपुरी समेत आसपास के गांवों के लोग बेताब थे। विधायक लोकेंद्र चौहान के घर की पुलिस ने पहले से ही किलेबंदी कर रखी थी। साथ ही गांव के सारे रास्ते सील कर दिए थे। किसी को गांव में नहीं जाने दिया जा रहा था। गांव के बाहर ही एक खेत में सभी वाहनों को रोका जा रहा था। केवल विधायक, मंत्री व अफसरों के वाहन ही अंदर जा रहे थे। गांव में जा रही भीड़ को पुलिस ने कई बार खदेड़ा और गांव में नहीं घुसने दिया। गांव में लोग नहीं जा सके। मुख्यमंत्री की झलक तो गांव वाले नहीं पा सके, हेलीकॉप्टर को देखकर ही वह वापस लौट गए। हेलीकॉप्टर को देखने के लिए गांव वालों ने तालाब तक की परवाह नहीं की और तालाब में भी घूस गए। मकान की छतों, ट्रैक्टर ट्रालियों व पेड़ों पर चढ़कर हेलीकॉप्टर को देखा। जहां लोकेंद्र चौहान की चिता जलाई गई थी, वहां काफी तादाद में लोग मौजूद थे। उन्हें उम्मीद थी कि पंडाल में मुख्यमंत्री आएंगे। पर मुख्यमंत्री वहां नहीं आए। लोकेंद्र चौहान के आवास से बाहर आकर वहां बैठे कार्यकर्ताओं का जरूर मुख्यमंत्री ने अभिवादन किया। मीडिया के चुनिंदा लोगों को ही अंदर जाने की इजाजत थी। एक जगह सभी मीडिया वालों को प्रशासन ने बैठा दिया था। बाद में किसी को अंदर नहीं जाने दिया। मुख्यमंत्री ने लोकेंद्र चौहान के आवास में जाकर सबसे पहले परिजनों का हालचाल मालूम किया। सबसे एकजुट रहने को कहा और कहा कि सब एक दूसरे का ख्याल रखो। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी अश्वनी त्यागी, मंत्री भूपेंद्र सिंह, मंत्री बलदेव पोलक, धनौरा विधायक राजीव तरारा, प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया, सांसद सर्वेश कुमार व डा.यशवंत सिंह, विधायक अशोक राणा, सुचि चौधरी, कमलेश सैनी, सुशांत सिंह, ओम कुमार, जिलाध्यक्ष राजीव समेत तमाम नेता व अधिकारी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की झलक पाने के लिए गांव आलमपुरी समेत आसपास के गांवों के लोग बेताब थे। विधायक लोकेंद्र चौहान के घर की पुलिस ने पहले से ही किलेबंदी कर रखी थी। साथ ही गांव के सारे रास्ते सील कर दिए थे। किसी को गांव में नहीं जाने दिया जा रहा था। गांव के बाहर ही एक खेत में सभी वाहनों को रोका जा रहा था। केवल विधायक, मंत्री व अफसरों के वाहन ही अंदर जा रहे थे। गांव में जा रही भीड़ को पुलिस ने कई बार खदेड़ा और गांव में नहीं घुसने दिया। गांव में लोग नहीं जा सके। मुख्यमंत्री की झलक तो गांव वाले नहीं पा सके, हेलीकॉप्टर को देखकर ही वह वापस लौट गए। हेलीकॉप्टर को देखने के लिए गांव वालों ने तालाब तक की परवाह नहीं की और तालाब में भी घूस गए। मकान की छतों, ट्रैक्टर ट्रालियों व पेड़ों पर चढ़कर हेलीकॉप्टर को देखा। जहां लोकेंद्र चौहान की चिता जलाई गई थी, वहां काफी तादाद में लोग मौजूद थे। उन्हें उम्मीद थी कि पंडाल में मुख्यमंत्री आएंगे। पर मुख्यमंत्री वहां नहीं आए। लोकेंद्र चौहान के आवास से बाहर आकर वहां बैठे कार्यकर्ताओं का जरूर मुख्यमंत्री ने अभिवादन किया। मीडिया के चुनिंदा लोगों को ही अंदर जाने की इजाजत थी। एक जगह सभी मीडिया वालों को प्रशासन ने बैठा दिया था। बाद में किसी को अंदर नहीं जाने दिया। मुख्यमंत्री ने लोकेंद्र चौहान के आवास में जाकर सबसे पहले परिजनों का हालचाल मालूम किया। सबसे एकजुट रहने को कहा और कहा कि सब एक दूसरे का ख्याल रखो। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी अश्वनी त्यागी, मंत्री भूपेंद्र सिंह, मंत्री बलदेव पोलक, धनौरा विधायक राजीव तरारा, प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया, सांसद सर्वेश कुमार व डा.यशवंत सिंह, विधायक अशोक राणा, सुचि चौधरी, कमलेश सैनी, सुशांत सिंह, ओम कुमार, जिलाध्यक्ष राजीव समेत तमाम नेता व अधिकारी मौजूद थे।
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