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मौसम में धुल के कणों ने बढ़ाई सीओपीडी के मरीजों की परेशानी
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धुंध और धूल से लोगों की घुट रहीं सांसें
बिजनौर। बदलते मौसम के साथ बढ़ी धुंध और धूल के कणों ने क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा के मरीजों की सांसे फूला दी हैं। छाती रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास इस समय 80 प्रतिशत मरीज इन दोनों बीमारियों से पीड़ित ही पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि इस मौसम में सबसे ज्यादा अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को परेशानी होती है। केवल सतर्कता बरतकर ऐसे मरीज परेशानी से बच सकते हैं।
दिन और रात के तापमान में भारी अंतर के कारण सुबह के समय धुंध छा जाती है। वहीं सड़कों पर दौड़ते वाहनों के कारण वातावरण में धूल उड़ रही है। रात में तापमान घट रहा है तो यह धूल के कारण धुंध के साथ मिलकर देर तक वातावरण में घूमते रहते हैं। ऐसे में सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल से लेकर निजी नर्सिंगहोम तक इन मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहर के वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि मेरे पास इस समय सबसे ज्यादा इन दोनों बीमारियों के मरीज आते हैं। अब 80 प्रतिशत मरीज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन सीओपीडी का खतरा बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा हो जाता है। इसका सबसे मुख्य कारण तंबाकू और धुआं है। खराब वातावरण वाले घरों में रसोई और गर्माहट के लिए उपयोग में लाए जा रहे ईंधनों से घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण से भी यह समस्या बढ़ती है।
शुरू होने से पहले ही सीओपीडी को रोक सकते हैं
डॉ.अनिल अग्रवाल ने बताया कि सीओपीडी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि धूम्रपान शुरू न करें। रासायनिक धुएं और धूल के कण भी सीओपीडी का बड़ा कारण हैं।
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तापमान सामान्य होने पर ही निकलें
डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि सुबह के समय धुंध और धूल के कण ज्यादा होते हैं। इसलिए सीओपीडी और अस्थमा के मरीज तापमान सामान्य होने पर ही निकलें। मास्क आदि लगा लें। इसके अलावा कमरे का तापमान सामान्य रखें, इस मौसम में सर्दी के कारण सांस की नली पर सूजन, बलगम बनना आदि होता है तो सीओपीडी, अस्थमा का अटैक पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
सीओपीडी के लक्षण
-सांस फूलना, बार-बार खांसी आना।
-बलगम के साथ खांसी आना।
-बार-बार नाक बहना और गले का संक्रमण होना।
-होंठ या नाखून नीले पड़ने के साथ थकान होना।
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बिजनौर। बदलते मौसम के साथ बढ़ी धुंध और धूल के कणों ने क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा के मरीजों की सांसे फूला दी हैं। छाती रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास इस समय 80 प्रतिशत मरीज इन दोनों बीमारियों से पीड़ित ही पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि इस मौसम में सबसे ज्यादा अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को परेशानी होती है। केवल सतर्कता बरतकर ऐसे मरीज परेशानी से बच सकते हैं।
दिन और रात के तापमान में भारी अंतर के कारण सुबह के समय धुंध छा जाती है। वहीं सड़कों पर दौड़ते वाहनों के कारण वातावरण में धूल उड़ रही है। रात में तापमान घट रहा है तो यह धूल के कारण धुंध के साथ मिलकर देर तक वातावरण में घूमते रहते हैं। ऐसे में सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल से लेकर निजी नर्सिंगहोम तक इन मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहर के वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि मेरे पास इस समय सबसे ज्यादा इन दोनों बीमारियों के मरीज आते हैं। अब 80 प्रतिशत मरीज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन सीओपीडी का खतरा बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा हो जाता है। इसका सबसे मुख्य कारण तंबाकू और धुआं है। खराब वातावरण वाले घरों में रसोई और गर्माहट के लिए उपयोग में लाए जा रहे ईंधनों से घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण से भी यह समस्या बढ़ती है।
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शुरू होने से पहले ही सीओपीडी को रोक सकते हैं
डॉ.अनिल अग्रवाल ने बताया कि सीओपीडी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि धूम्रपान शुरू न करें। रासायनिक धुएं और धूल के कण भी सीओपीडी का बड़ा कारण हैं।
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तापमान सामान्य होने पर ही निकलें
डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि सुबह के समय धुंध और धूल के कण ज्यादा होते हैं। इसलिए सीओपीडी और अस्थमा के मरीज तापमान सामान्य होने पर ही निकलें। मास्क आदि लगा लें। इसके अलावा कमरे का तापमान सामान्य रखें, इस मौसम में सर्दी के कारण सांस की नली पर सूजन, बलगम बनना आदि होता है तो सीओपीडी, अस्थमा का अटैक पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
सीओपीडी के लक्षण
-सांस फूलना, बार-बार खांसी आना।
-बलगम के साथ खांसी आना।
-बार-बार नाक बहना और गले का संक्रमण होना।
-होंठ या नाखून नीले पड़ने के साथ थकान होना।