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घाटों पर अर्थी छोड़ भाग गए थे लोग

Thu, 25 Jun 2020 11:06 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2020 11:06 PM IST
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People had run away from the valley on the ghats.
शिव कुमार शर्मा। - फोटो : BIJNOR
घाटों पर अर्थी छोड़ भाग गए थे लोग
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बिजनौर। देश में आपातकाल लगे 45 साल हो गए हैं। आपातकाल के विरोध में जिले वासियों ने भी बढ़ चढ़कर आंदोलन किए थे। रात को प्रदर्शन की रणनीति बनाई जाती थी और गांवों में पर्चे बांटे जाते थे। इमरजेंसी का दौर इतना भयावह था कि लोग घाटों पर अर्थी छोड़कर चले गए थे।
श्रीराम मंदिर निर्माण ट्रस्ट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे नगीना के चंपतराय बंसल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे हैं। आपातकाल का उन्होंने पुरजोर विरोध किया। गांव गांव जाकर जनता को अपने साथ आपातकाल के विरोध में जोड़ा। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और जेल भेज दिया। जेल में रहकर भी वह आपातकाल के विरोध में रणनीति बनाते रहे, तो उन्हें बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया। वे जेल से 19 महीने बाद रिहा हुए।
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लोकतंत्र सेनानी संगठन जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह गहलौत बताते हैं इमरजेंसी का दौर बहुत डरावना था। इमरजेंसी लगने का पता चलने पर लोग नदियों के घाटों पर अर्थी तक छोड़कर भाग गए थे। वह भी लोकतंत्र के विरोध में छह महीने तक जेल में रहे थे। तब लोकतंत्र पर लगे आघात के खिलाफ जेल से चौधरी चरण सिंह ने इंदिरा गांधी के लिए पांच-छह पेज का एक पत्र लिखा था। यह पत्र चौधरी साहब ने किसी तरह उन तक पहुंचाया। समय लेकर वह इंदिरा गांधी तक पहुंचे और वह पत्र उन्हें दिया। चौधरी साहब ने इमरजेंसी से देश में लोकतंत्र को लगे आघात के बारे में पत्र में लिखा था। यह पत्र पढ़ने के बाद ही इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी हटाने का निर्णय लिया था। उन्होंने बताया कि जिले से करीब 175 लोकतंत्र सेनानी आपात काल के विरोध में जेल गए थे।
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पूर्व विधायक सुखवीर सिंह आपातकाल के समय एमए कर रहे थे। वह शुरू से ही चौधरी चरण सिंह के साथ जुड़े थे। आपात काल लगते ही उन्होंने इसका विरोध करने के लिए जत्थे बना लिए। उनके जत्थे गांव गांव जाकर आपातकाल के खिलाफ लोगों को जागरूक करते थे। उन्होंने आपातकाल के विरोध में कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। तब एसओ सोमदत्त त्यागी ने उनसे कहा कि वह लिखकर दे दें कि प्रदर्शन में शामिल नहीं थे तो वे उन्हें बचा लेंगे। अगर जेल चले गए तो पता नहीं कब निकलेंगे। लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ लिखकर देने से मना कर दिया और साढ़े छह महीने जेल में रहे।

जिले के रहने वाले शिवकुमार शर्मा आपात काल के समय बरेली में रहते थे। वह जनसंघ के संगठन मंत्री थे और वर्तमान केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार जनसंघ युवा मोर्चे के जिलाध्यक्ष थे। तब बिजनौर में प्रचारक रहे ओमप्रकाश ने उनकी बैठक ली और पूरे देश में नवंबर में सत्याग्रह शुरू कराने की रणनीति बनाई। उन्हें, ब्रह्मशरण व पूर्व मंत्री महावीर सिंह को बिजनौर में सत्याग्रह करने की जिम्मेदारी दी गई। तीनों ने नवंबर में खुद ही कलक्ट्रेट में सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया था। तब पुलिस ने उन्हें पकड़कर जेल में डाल दिया था। वह करीब 18 महीने बाद जेल से रिहा हुए थे।

चंद्रवीर सिंह गहलौत।

चंद्रवीर सिंह गहलौत।- फोटो : BIJNOR

चम्पतराय बंसल।

चम्पतराय बंसल।- फोटो : BIJNOR

सुखबीर सिंह।

सुखबीर सिंह।- फोटो : BIJNOR

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