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बिजली कटौती से बिलबिला उठे लोग
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बिजली कटौती से बिलबिला उठे लोग
बिजनौर। जिलेवासियों को कुछ और दिनों बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। इस समय ओवरलोडिंग के कारण जमकर बिजली कटौती हो रही है। बारिश होने पर बिजली आपूर्ति सुधर सकती है, निगम अधिकारियों को मानसून आने का इंतजार है।
जिले में भीषण बिजली संकट चल रहा है। लगातार कई घंटे तक बिजली नदारद रहती है। लोगों की चिलचिलाती गर्मी ने नींद उड़ा दी है। मच्छरों की भरमार तथा बिजली कटौती के चलते रात जागकर गुजार रहे हैं। बिजली आपूर्ति ठप रहने से पीने के पानी को तरस रहे हैं। महिलाएं घरों से काफी दूरी पर गली मोहल्लों में लगे हैंडपंप से सुबह से ही पानी लाकर रसोई का काम चला रही है।
निगम अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने से एसी की संख्या बढ़ी है, जिस कारण बिजलीघरों पर लोड बढ़ा है। ओवरलोडिंग के कारण बिजलीघरों पर फाल्ट होने शुरू हो गए हैं, जिस कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
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बिजलीघरों का लोड करीब 800 एमवीए
बिजनौर सर्किल के अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त कामकाज देख रहे एसई सुनील कुमार अग्रवाल का कहना है कि जिले में 90 बिजलीघर संचालित है। एक बिजलीघर पर अलग-अलग क्षमता के दो से तीन ट्रांसफार्मर रखे होते हैं। एक बिजलीघर की क्षमता पांच से 10 एमवीए हैं। इस प्रकार जिले के बिजलीघरों की कुल क्षमता करीब 800 एमवीए है।
कंट्रोल रूम से शेडयूल घंटों के लिहाज से मिलती है बिजली
एसई बताते हैं कि जिले को राज्य कंट्रोल रूम से घंटों के लिहाज से विद्युत सप्लाई मिलती है। जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील मुख्यालय को 21.5 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे, कृषि पोषकों को 10 घंटे विद्युत आपूर्ति का शेडयूल है। जिले को इसी शेडयूल के अनुसार बिजली मिलेगी। लोड कम या अधिक होने का कोई असर नहीं होता है।
दो से तीन घंटे की रोजाना रोस्टिंग
जिले में विद्युत आपूर्ति पर बिजली कटौती का भी असर है। अंधाधुंध कटौती से विद्युत आपूर्ति चरमरा गई है। इस समय रोजाना दो से तीन घंटे नियमित बिजली कटौती हो रही है। इमरजेंसी में कटौती बढ़ा दी जाती है। उपभोक्ताओं को कटौती कोई पता नहीं चलता है। बिजली कटौती कब, कितनी, किस क्षेत्र में होनी है इसका निर्धारण राज्य कंट्रोल रूम से होता है। समय साप्ताहिक व आवश्यकता के अनुसार रोजाना बदल सकता है।
बारिश होने पर सुधरेंगे हालात
एसई सुनील कुमार अग्रवाल बताते हैं कि कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। प्रयोग होने वाले बिजली उपकरणों की संख्या बढ़ी है। बिजली की खपत बढ़ने का असर विद्युत आपूर्ति पर है। मानसून आने में देरी हो रही है, बारिश होने पर बिजलीघरों का लोड कम हो जाएगा। उसके बाद विद्युत आपूर्ति सुचारु हो जाएगी।
लोगों का कहना है
अधिवक्ता गौरव भारद्वाज, जितेंद्र कुमार का कहना है कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के स्पष्ट आदेश थे कि निगम अधिकारी बिजलीघरों का संभावित लोड बढ़ने का आकलन कर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर लें। साथ ही बिजलीघरों की मशीनों की भी मरम्मत करा लें। आरोप है कि लापरवाही के चलते ऐसा नहीं किया गया, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। मामले की जांच हो।
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बिजनौर। जिलेवासियों को कुछ और दिनों बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। इस समय ओवरलोडिंग के कारण जमकर बिजली कटौती हो रही है। बारिश होने पर बिजली आपूर्ति सुधर सकती है, निगम अधिकारियों को मानसून आने का इंतजार है।
जिले में भीषण बिजली संकट चल रहा है। लगातार कई घंटे तक बिजली नदारद रहती है। लोगों की चिलचिलाती गर्मी ने नींद उड़ा दी है। मच्छरों की भरमार तथा बिजली कटौती के चलते रात जागकर गुजार रहे हैं। बिजली आपूर्ति ठप रहने से पीने के पानी को तरस रहे हैं। महिलाएं घरों से काफी दूरी पर गली मोहल्लों में लगे हैंडपंप से सुबह से ही पानी लाकर रसोई का काम चला रही है।
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निगम अधिकारियों का कहना है कि गर्मी बढ़ने से एसी की संख्या बढ़ी है, जिस कारण बिजलीघरों पर लोड बढ़ा है। ओवरलोडिंग के कारण बिजलीघरों पर फाल्ट होने शुरू हो गए हैं, जिस कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
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बिजलीघरों का लोड करीब 800 एमवीए
बिजनौर सर्किल के अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त कामकाज देख रहे एसई सुनील कुमार अग्रवाल का कहना है कि जिले में 90 बिजलीघर संचालित है। एक बिजलीघर पर अलग-अलग क्षमता के दो से तीन ट्रांसफार्मर रखे होते हैं। एक बिजलीघर की क्षमता पांच से 10 एमवीए हैं। इस प्रकार जिले के बिजलीघरों की कुल क्षमता करीब 800 एमवीए है।
कंट्रोल रूम से शेडयूल घंटों के लिहाज से मिलती है बिजली
एसई बताते हैं कि जिले को राज्य कंट्रोल रूम से घंटों के लिहाज से विद्युत सप्लाई मिलती है। जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील मुख्यालय को 21.5 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे, कृषि पोषकों को 10 घंटे विद्युत आपूर्ति का शेडयूल है। जिले को इसी शेडयूल के अनुसार बिजली मिलेगी। लोड कम या अधिक होने का कोई असर नहीं होता है।
दो से तीन घंटे की रोजाना रोस्टिंग
जिले में विद्युत आपूर्ति पर बिजली कटौती का भी असर है। अंधाधुंध कटौती से विद्युत आपूर्ति चरमरा गई है। इस समय रोजाना दो से तीन घंटे नियमित बिजली कटौती हो रही है। इमरजेंसी में कटौती बढ़ा दी जाती है। उपभोक्ताओं को कटौती कोई पता नहीं चलता है। बिजली कटौती कब, कितनी, किस क्षेत्र में होनी है इसका निर्धारण राज्य कंट्रोल रूम से होता है। समय साप्ताहिक व आवश्यकता के अनुसार रोजाना बदल सकता है।
बारिश होने पर सुधरेंगे हालात
एसई सुनील कुमार अग्रवाल बताते हैं कि कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। प्रयोग होने वाले बिजली उपकरणों की संख्या बढ़ी है। बिजली की खपत बढ़ने का असर विद्युत आपूर्ति पर है। मानसून आने में देरी हो रही है, बारिश होने पर बिजलीघरों का लोड कम हो जाएगा। उसके बाद विद्युत आपूर्ति सुचारु हो जाएगी।
लोगों का कहना है
अधिवक्ता गौरव भारद्वाज, जितेंद्र कुमार का कहना है कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के स्पष्ट आदेश थे कि निगम अधिकारी बिजलीघरों का संभावित लोड बढ़ने का आकलन कर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर लें। साथ ही बिजलीघरों की मशीनों की भी मरम्मत करा लें। आरोप है कि लापरवाही के चलते ऐसा नहीं किया गया, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। मामले की जांच हो।