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रुद्रप्रयाग जैसा खौफ: आदमखोर गुलदार से दहशत में सांसें, अब तक पांच को बनाया निवाला, ये कहते हैं विशेषज्ञ

Wed, 26 Apr 2023 10:07 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 26 Apr 2023 10:07 PM IST
सार

UP News: बिजनौर जिले में रुद्रप्रयाग जैसा खौफ पैदा हो गया है। गुलदार अब तक पांच लोगों की जान ले चुका है। वहीं, आदमखोर गुलदार से लोगों की सांसें दहशत में हैं।

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People are in panic due to fear of Guldar in Bijnor and five people have killed till now
गुलदार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रुद्रप्रयाग और चंपावत से बिजनौर की तुलना भले ही भागौलिक स्थिति में न की जा सकती हो, लेकिन वन्य जीवों खासतौर से आदमखोर होते गुलदार की समानता बन रही है। वन्य जीवों के जानकार रेहड़ के गुलदार की तुलना रुद्रप्रयाग के गुलदार से कर रहे हैं, जिसने करीब सौ साल पहले 125 लोगों की जान लेकर पूरे क्षेत्र में डर का कर्फ्यू लगा दिया था। 

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वहीं चंतावत की बाघिन 200 से ज्यादा लोगों की जान लेकर डर का दूसरा नाम बन गई थी। यही हाल पिछले कुछ दिनों से बिजनौर के रेहड़ और नगीना क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। तमाम प्रयासों के बावजूद अभी तक इंसानों पर हमला करने वाले गुलदार को पकड़ा नहीं जा सका है। गुलदार पिछले दो महीने में पांच लोगों की जान ले चुका है।
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बिजनौर जिले में पांच साल बाद एक बार फिर गुलदार खौफनाक तरीके से इंसानों को मार रहा है। इससे पहले मंडावर से किरतपुर के बीच पांच लोगों की जान लेने वाले गुलदार ने सभी की नींद हराम कर दी थी। वहीं, वन्य जीवों के जानकारों को रुद्रप्रयाग का गुलदार याद आ रहा है।

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जिम कार्बेट ने अपनी एक पुस्तक ‘द मैन-ईटिंग लेपर्ड ऑफ रुद्रप्रयाग‘ में विस्तृत वर्णन किया है। जिम कार्बेट ने रुद्रप्रयाग के गुलदार के खौफ के बारे में यहां तक लिखा है कि “रूद्रप्रयाग के आदमखोर गुलदार के भय से कर्फ्यू का माहौल बन जाता था। यह शासन द्वारा लगाए गए कर्फ्यू से कहीं अधिक सख्त होता था।” 125 लोगों को मारने वाले गुलदार को जिम कार्बेट ने अपनी गोली का निशाना बनाया था। उस समय इस गुलदार की चर्चा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों तक होने लगी थी। वहां के समाचारपत्रों में भी इसकी खूब कहानियां प्रकाशित होती थी।

आदमखोर होने पर रात का राक्षस बन जाता है गुलदार: जोएल लाएल
जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर और वरिष्ठ वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लाएल कहते हैं कि गुलदार यूं तो गुलदार शर्मिला होता है, लेकिन आदमखोर होने पर इससे ज्यादा खतरनाक जानवर जंगल में नहीं होता। यह रात में सबसे ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि घास, खेत, पेड़, छत पर कहीं भी छिपकर बैठ सकता है और मौका लगने पर हमला कर देता है। छोटे बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो जाता है। यह अपने से ढाई गुना वजन को लेकर पेड़ पर भी चढ़ जाता है। रात में लोग इसे नहीं देख पाते, लेकिन यह आदमखोर होने पर अंधेरे में सबसे ज्यादा हमले करता है। इसलिए इसे आदमखोर होने पर रात का राक्षस भी कहते हैं। एक आदमखोर गुलदार दस से 20 किलोमीटर दूर जाकर भी अगला शिकार कर सकता है।

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बदले माहौल में ढल जाते हैं तेंदुए, फिर भी है खतरा
जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर और वरिष्ठ वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लाएल कहते हैं कि पहले रेत के टीले और बंजर जमीन के आसपास बड़ी घास होती थी। रिजर्व फॉरेस्ट के अलावा यह गुलदार इन क्षेत्र में भी रहते थे। इन सभी जगहों पर खेती हो रही है। ऐसे में गन्ने के खेत इनका सबसे सुरक्षित ठिकाना है। इनके व्यवहार की बात करें तो यह बदलते माहौल में खुद को ढाल लेता है। इसलिए इनकी संख्या अब 150 से ज्यादा हो चुकी है। बाघ रिजर्व फॉरेस्ट के बाहर अधिक समय नहीं रह सकता, लेकिन इसने आबादी के बीच खेतों को ही अपना घर मान लिया है।

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बाघों की तरह संरक्षित सूची में है शामिल
गुलदार भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की ‘अनुसूची 1‘ श्रेणी में आते हैं। यह जीव भी बाघों और शेरों जैसे अन्य संरक्षित जानवरों की सूची में हैं। इनकी हत्या या शिकार करने पर समान रूप से कठोर दंड का प्रावधान है। भले ही इसे लुप्त प्राय: सूची में शामिल किया गया हो, लेकिन बिजनौर में इनकी संख्या काफी ज्यादा है।

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