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टीबी को मात दे चुके मरीज कहलाएंगे ‘चैंपियन’
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टीबी को मात दे चुके मरीज कहलाएंगे ‘चैंपियन’
बिजनौर। टीबी से ग्रसित मरीजों को इलाज के लिए टीबी चैंपियन जागरूक करेंगे। ये वो लोग हैं जो टीबी से जंग जीत चुके हैं। इसके लिए जिले में 40 टीबी चैंपियन नियुक्त किए जाएंगे। इसकी सूचना शासन को भेज दी गई है। इसके लिए इन्हें सेल्फ लर्निंग कोर्स के तहत ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।
टीबी से ग्रसित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिसकी वजह से कुछ लोग टीबी होने पर खुद को असहाय और कमजोर महसूस करते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि बीमारी होने पर वे समाज से अलग हो गए हैं। इसी मानसिकता को खत्म करने के लिए टीबी चैंपियन नियुक्त किए जा रहे हैं। ये वो लोग हैं जो टीबी से जंग जीत चुके हैं। प्रत्येक ब्लॉक पर टीबी चैंपियनों को चिह्नित कर उनकी सूची शासन को भेज दी है। इस सूची में जिले के 40 लोगों को शामिल किया गया है। जो अपने-अपने क्षेत्र में टीबी से ग्रसित मरीज को ढूंढकर जागरूक करेंगे।
उन्हें बताएंगे कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर समय से इलाज किया जाए तो छह महीने में टीबी से ग्रसित मरीज ठीक हो सकता है। इसके साथ ही ये चैंपियन लोगों को सर्वे कर जागरूक करने के साथ-साथ उपचार के लिए प्रेरित करेंगे। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीएस रावत ने बताया कि जिले के 40 टीबी चैंपियनों को सेल्फ लर्निंग कोर्स के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। जिसमें उन्हें टीबी से ग्रसित मरीज से बात करने से लेकर उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करने के बारे में बताया जाएगा।
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बिजनौर। टीबी से ग्रसित मरीजों को इलाज के लिए टीबी चैंपियन जागरूक करेंगे। ये वो लोग हैं जो टीबी से जंग जीत चुके हैं। इसके लिए जिले में 40 टीबी चैंपियन नियुक्त किए जाएंगे। इसकी सूचना शासन को भेज दी गई है। इसके लिए इन्हें सेल्फ लर्निंग कोर्स के तहत ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।
टीबी से ग्रसित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिसकी वजह से कुछ लोग टीबी होने पर खुद को असहाय और कमजोर महसूस करते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि बीमारी होने पर वे समाज से अलग हो गए हैं। इसी मानसिकता को खत्म करने के लिए टीबी चैंपियन नियुक्त किए जा रहे हैं। ये वो लोग हैं जो टीबी से जंग जीत चुके हैं। प्रत्येक ब्लॉक पर टीबी चैंपियनों को चिह्नित कर उनकी सूची शासन को भेज दी है। इस सूची में जिले के 40 लोगों को शामिल किया गया है। जो अपने-अपने क्षेत्र में टीबी से ग्रसित मरीज को ढूंढकर जागरूक करेंगे।
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उन्हें बताएंगे कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर समय से इलाज किया जाए तो छह महीने में टीबी से ग्रसित मरीज ठीक हो सकता है। इसके साथ ही ये चैंपियन लोगों को सर्वे कर जागरूक करने के साथ-साथ उपचार के लिए प्रेरित करेंगे। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीएस रावत ने बताया कि जिले के 40 टीबी चैंपियनों को सेल्फ लर्निंग कोर्स के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। जिसमें उन्हें टीबी से ग्रसित मरीज से बात करने से लेकर उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करने के बारे में बताया जाएगा।
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