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Bijnor News: युवाओं को भी जकड़ रही पार्किंसंस बीमारी

Sat, 11 Apr 2026 12:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:45 AM IST
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Parkinson's disease is affecting young people too
बिजनौर। पार्किंसंस को बुढ़ापे की बीमारी के तौर पर जाना जाता है। मगर, अब कम उम्र में भी लोग पार्किंसंस की समस्या से जूझ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में भी हर सप्ताह एक से दो मरीज इस समस्या के पहुंच रहे हैं। पार्किंसंस एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें कुछ खास कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब होती जाती हैं।
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डॉ. पंकज त्यागी ने बताया कि पार्किंसंस तीन तरह तरह है। इसमें 20 साल से पहले होले वाली पार्किंसंस को जुवेनाइल पार्किंसंस, 50 साल से पहले शुरू होने पर यंग ओनेस्ट पार्किंसंस डिजीज और बुजुर्गो में पार्किंसंस होती है। बिजनौर में अब युवाओं में भी इस बीमारी के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। दिमाग के सबस्टैंशिया नाइग्रा हिस्से में डोपामिन केमिकल बनता है। यह शरीर को नियंत्रित करता है। इस हिस्से की कोशिकाएं मरने से डोपामिन कम बनता है। इससे शरीर अनियंत्रित होने लगता है। यहीं वजह है कि हाथ कांपना, चलने में दिक्कत आदि समस्या होने लगती हैं। दिमाग की कोशिकाओं के नष्ट होने से खासकर अल्फा सिन्यूक्लिन असामान्य रूप से जमा होने लगता है। इससे तंत्रिका कोशिकाएं प्रभावित होती हैं।
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मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. राजेश डाबरे का कहना है कि मस्तिष्क में डोपामिन बनना बंद होने से यह बीमारी होती है। बुजुर्ग इसकी चपेट में अधिक हैं।
रोग के प्रमुख लक्षण
-हाथ, पैर या ठुड्डी में कंपकंपी
-शरीर में जकड़न
-चलने में धीमापन
-संतुलन बनाए रखने में कठिनाई
-लिखावट का छोटा हो जाना
-चेहरे के भाव कम होना
-नींद में गड़बड़ी
-अवसाद या चिंता
-याददाश्त और ध्यान में कमी
-आवाज का धीमा या अस्पष्ट होना
-गंध पहचानने की क्षमता कम होना
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ऐसे काफी हद तक कर सकते हैं रोकथाम
-नियमित व्यायाम
-संतुलित और एंटीऑक्सीडेंट-समृद्ध आहार
-ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें
-सिर की चोट से बचाव करें
-कीटनाशकों और जहरीले रसायनों के अत्यधिक संपर्क से बचाव करें
-मानसिक रूप से सक्रिय रहें
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केस नंबर एक
बिजनौर निवासी 58 वर्षीय व्यक्ति पिछले एक वर्ष से दाहिने हाथ में हल्की कंपकंपी और लिखावट छोटी होने की शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने इसे उम्र का सामान्य प्रभाव समझकर नजरअंदाज किया। जांच करने पर शुरुआती चरण का पार्किंसंस रोग पाया गया। छह माह के फॉलोअप में उनकी दैनिक गतिविधियां सामान्य रहीं और बीमारी की प्रगति नियंत्रित रही।
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केस नंबर दो
बिजनौर निवासी 85 वर्षीय महिला को पिछले चार वर्षों से चलने में धीमापन, बार-बार गिरना और नींद की समस्या थी। परिवार ने इसे सामान्य अवस्था समझा। जब जांच हुई, तो पार्किंसंस बीमारी मध्यम स्तर पर पहुंच चुकी थी। उनका मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है।
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केस नंबर तीन
बिजनौर निवासी 45 वर्षीय व्यक्ति को पार्किंसंस की समस्या है। कुछ समय नजरअंदाज किया, लेकिन जांच कराने पर पुष्टि हुई। पिछले पांच सालों से उन्हें यह समस्या बनी हुई है। उनमें हाथ कंपकंपाना, तनाव जैसे लक्षण बढ़ते जा रहे हैं।

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वर्जन::
पार्किंसन एक जीवनभर चलने वाली बीमारी है, लेकिन सही इलाज, नियमित व्यायाम और परिवार के सहयोग से मरीज सक्रिय जीवन जी सकता है। डोपामिन की कमी से यह समस्या बढ़ती है। बुजुर्गों के अलावा युवाओं में भी यह समस्या बढ़ रही है। ....डॉ. नितिन कुमार, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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