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बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते अभिभाव

Thu, 24 Jun 2021 12:24 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jun 2021 12:24 AM IST
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Parents do not want to send children to school
बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते अभिभाव
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बिजनौर। माध्यमिक स्कूलों के मात्र 26 फीसदी अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्कूलों में आकर ऑनलाइन पढ़ाएं। अभिभावकों में कोरोना का खौफ बना हुआ है। इसलिए वे छात्रों को विद्यालय भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासन ने विद्यालयों से मिले सहमति पत्रों को शासन को भेज दिया है।
कोरोना कर्फ्यू हट गया है और कोरोना के मामले भी कम हुए हैं। शासन ने इसको देखते हुए माध्यमिक स्कूलों को खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। पहले चरण में कक्षा नौ से बारह तक के स्कूल खोलने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों के माध्यम से अभिभावकों से निश्चित प्रारूप पर सहमति पत्र मांगे गए थे।
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विद्यालयों की ओर से 23 मई शाम चार बजे तक सहमति पत्र बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किए जाने थे। जिले के यूपी बोर्ड के स्कूलों में नौंवी से बारहवीं तक 77,300 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। डीआईओएस दफ्तर के अनुसार तय समय तक परिषद की वेबसाइट पर मात्र 20,000 सहमति पत्र अपलोड हुए हुए हैं। कॉलेज से मिल रही जानकारी के अनुसार अभिभावकों में कोरोना का खौफ अभी बना है। वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। अभिभावक चाहते हैं कि शिक्षक स्कूलों में आकर ऑनलाइन पढ़ाई कराएं, बच्चों को अभी स्कूलों में न बुलाया जाए।
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क्या कहते हैं अभिभावक
अभिभावक नृपेंद्र सिंह, गौरव भारद्वाज, रनवीर सिंह आदि का कहना है कि स्कूल खोलने में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। कोरोना कम तो हुआ है, परंतु खत्म नहीं हुआ है। इसलिए सावधानी बरती जानी चाहिए। बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। साथ ही स्कूल खोलने से पहले स्कूलों में कोरोना से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। जब तक स्कूल नहीं खुलते हैं, छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई होनी चाहिए। शासन ने 20 मई से ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर रखी है। विभागीय जानकारी के अनुसार 75 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई से नहीं जुड़े हैं। इसके लिए शिक्षक स्कूल आएं और प्रधानाचार्य की देखरेख में आनलाइन पढ़ाई कराएं। शत-प्रतिशत छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए।
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