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142 खांडसारी इकाईयों में से केवल 30 क्रेशर ही हुए चालू
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142 खांडसारी इकाइयों में से केवल 30 क्रेशर ही चालू
धामपुर। खांडसारी उद्योग अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसी कारण वर्तमान गन्ना पेराई सत्र में 142 क्रेशरों (खांडसारी इकाइयां) में से केवल 30 क्रेशर ही चल सके हैं। उद्यमियों का कहना है कि गन्ना और लेबर महंगा और गुड़ के दाम कम होने से क्रेशरों को चला पाना मुश्किल है। जो चले हैं वे भी बंदी की कगार पर हैं। क्रेशर मालिकों आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की नई खांडसारी नीतियों के कारण ऐसा हुआ है। जिसमें अब आबकारी और प्रदूषण विभाग की एनओसी लेना अनिवार्य किया है।
धामपुर सहायक चीनी आयुक्त अधिकार क्षेत्र में चांदपुर और धामपुर तहसील शामिल हैं। इन दोनों तहसीलों में 142 लोगों के पास खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस हैं। दो दशक पहले क्षेत्र में हर दस किमी की परिधि में गन्ने के क्रेेशर चलते थे। लेकिन अब सिर्फ 30 ही चल रहीं हैं। क्रेशर मालिक राजेंद्र चौहान, दिनेश कुमार, भीम सिंह, नरेंद्र कुमार कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण खांडसारी इकाइयों ने दम तोड़ दिया। सरकार ने खांडसारी इकाईयों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया। केवल चीनी मिलों को प्रोत्साहित करने का काम किया है। जो इकाइयां चालू हो गईं हैं। वे सिसक सिसक कर चल रहीं हैं। जिसका कारण गन्ने का अधिक रेट, मजदूरों का न मिलना है।
पिछले साल के सापेक्ष कम हुई पेराई
सहायक चीनी आयुक्त नीरज कुमार का कहना है कि क्षेत्र में केवल तीस ही खांडसारी इकाइयां चल सकीं हैं। पिछले साल भी तीस ही चली थीं। इस बार पिछले साल की तुलना में न केवल कम गन्ने की पेराई हुई है, बल्कि गुड़ का उत्पादन भी कम हुआ है। पिछले साल तीस क्रेशरों ने 15 फरवरी तक 11.65 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर एक लाख 16 हजार क्विंटल गुड़ का उत्पादन किया था। जबकि इस बार अभी तक 9.90 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर एक लाख सात हजार क्विंटल गुड़ का उत्पादन ही किया जा सका है।
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महिलाओं को लोन पर 35 प्रतिशत का अनुदान
सहायक चीनी आयुक्त का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना को चलाया जा रहा है। लाइसेंस पुरुष के नाम से होता है तो उसे 25 प्रतिशत और महिला के नाम है तो 35 प्रतिशत का अनुदान मिलता है। मगर कोई भी लाइसेंस धारक योजना का लाभ लेने में रुचि नहीं ले रहा है। इस योजना के तहत 20 लाख रुपये का लोन मिलता है।
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धामपुर। खांडसारी उद्योग अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसी कारण वर्तमान गन्ना पेराई सत्र में 142 क्रेशरों (खांडसारी इकाइयां) में से केवल 30 क्रेशर ही चल सके हैं। उद्यमियों का कहना है कि गन्ना और लेबर महंगा और गुड़ के दाम कम होने से क्रेशरों को चला पाना मुश्किल है। जो चले हैं वे भी बंदी की कगार पर हैं। क्रेशर मालिकों आरोप लगाया है कि राज्य सरकार की नई खांडसारी नीतियों के कारण ऐसा हुआ है। जिसमें अब आबकारी और प्रदूषण विभाग की एनओसी लेना अनिवार्य किया है।
धामपुर सहायक चीनी आयुक्त अधिकार क्षेत्र में चांदपुर और धामपुर तहसील शामिल हैं। इन दोनों तहसीलों में 142 लोगों के पास खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस हैं। दो दशक पहले क्षेत्र में हर दस किमी की परिधि में गन्ने के क्रेेशर चलते थे। लेकिन अब सिर्फ 30 ही चल रहीं हैं। क्रेशर मालिक राजेंद्र चौहान, दिनेश कुमार, भीम सिंह, नरेंद्र कुमार कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण खांडसारी इकाइयों ने दम तोड़ दिया। सरकार ने खांडसारी इकाईयों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया। केवल चीनी मिलों को प्रोत्साहित करने का काम किया है। जो इकाइयां चालू हो गईं हैं। वे सिसक सिसक कर चल रहीं हैं। जिसका कारण गन्ने का अधिक रेट, मजदूरों का न मिलना है।
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पिछले साल के सापेक्ष कम हुई पेराई
सहायक चीनी आयुक्त नीरज कुमार का कहना है कि क्षेत्र में केवल तीस ही खांडसारी इकाइयां चल सकीं हैं। पिछले साल भी तीस ही चली थीं। इस बार पिछले साल की तुलना में न केवल कम गन्ने की पेराई हुई है, बल्कि गुड़ का उत्पादन भी कम हुआ है। पिछले साल तीस क्रेशरों ने 15 फरवरी तक 11.65 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर एक लाख 16 हजार क्विंटल गुड़ का उत्पादन किया था। जबकि इस बार अभी तक 9.90 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर एक लाख सात हजार क्विंटल गुड़ का उत्पादन ही किया जा सका है।
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महिलाओं को लोन पर 35 प्रतिशत का अनुदान
सहायक चीनी आयुक्त का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से खांडसारी उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना को चलाया जा रहा है। लाइसेंस पुरुष के नाम से होता है तो उसे 25 प्रतिशत और महिला के नाम है तो 35 प्रतिशत का अनुदान मिलता है। मगर कोई भी लाइसेंस धारक योजना का लाभ लेने में रुचि नहीं ले रहा है। इस योजना के तहत 20 लाख रुपये का लोन मिलता है।