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पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता देने के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 07 Sep 2016 11:32 PM IST
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कालागढ़ में एनजीटी ने कार्बेट नेशनल पार्क में बसी जनता के पुनर्वास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के आदेश दिए। उधर. एनजीटी के आदेश से जनता को राहत मिली है।
कालागढ़ को खाली कर वन भूमि कार्बेट टाइगर रिजर्व को सौंपे जाने संबंधी मामले में एनजीटी में सुनवाई हुई। इस दौरान उत्तर प्रदेश की ओर से शपथपत्र दिया गया। दूसरी ओर, उत्तराखंड की ओर से विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। इस पर एनजीटी ने तीन सप्ताह का समय दिया है। एनजीटी ने कार्बेट नेशनल पार्क के इलाके में निवास कर रही जनता को दूसरी स्थान पर पुनर्वास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के आदेश दिए। यह आदेश न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार के कोरम ने दिया। साथ ही इस मामले के लिए अगली सुनवाई 20 अक्तूबर को होगी।
क्या है मामला
1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने कालागढ़ में बंाध परियोजना का निर्माण किया था, जिसके तहत यहां एक शहर बस गया था। बैंक, डाकघर, सरकारी कार्यालय, स्कूल कॉलेज, अस्पताल कर्मचारी आवास आदि बनाए गए थे। 1995 के दशक से यहां की भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने की मांग चल रही थी। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने कॉलोनी को खाली करने का आदेश जारी कर दिया था। इसी आदेश को लेकर एनजीटी में मामला चल रहा है। इन आदेशों का एनजीटी पालन कराने की कोशिश कर रही है।
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कालागढ़ को खाली कर वन भूमि कार्बेट टाइगर रिजर्व को सौंपे जाने संबंधी मामले में एनजीटी में सुनवाई हुई। इस दौरान उत्तर प्रदेश की ओर से शपथपत्र दिया गया। दूसरी ओर, उत्तराखंड की ओर से विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। इस पर एनजीटी ने तीन सप्ताह का समय दिया है। एनजीटी ने कार्बेट नेशनल पार्क के इलाके में निवास कर रही जनता को दूसरी स्थान पर पुनर्वास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के आदेश दिए। यह आदेश न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार के कोरम ने दिया। साथ ही इस मामले के लिए अगली सुनवाई 20 अक्तूबर को होगी।
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क्या है मामला
1960 के दशक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने कालागढ़ में बंाध परियोजना का निर्माण किया था, जिसके तहत यहां एक शहर बस गया था। बैंक, डाकघर, सरकारी कार्यालय, स्कूल कॉलेज, अस्पताल कर्मचारी आवास आदि बनाए गए थे। 1995 के दशक से यहां की भूमि को वन विभाग को सौंपे जाने की मांग चल रही थी। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने कॉलोनी को खाली करने का आदेश जारी कर दिया था। इसी आदेश को लेकर एनजीटी में मामला चल रहा है। इन आदेशों का एनजीटी पालन कराने की कोशिश कर रही है।
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