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शासन के आदेश पर जीआईसी के जर्जर भवन का आकलन शुरू
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शासन के आदेश पर जीआईसी के जर्जर भवन का आकलन शुरू
बिजनौर। राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर के भवन का आकलन शुरू हो गया है। शासन ने इसके लिए उच्च स्तरीय प्रशासनिक समिति गठित की है। साथ ही डीआईओएस दफ्तर ने भवन में पढ़ रहे छात्रों को स्थानांतरित करने के वैकल्पिक भवन की तलाश तेज कर दी है। अभिभावक संघ ने शासन के फैसले को सही बताया है।
राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर का भवन अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। करीब 110 साल पुराना भवन जर्जर अब हालत में है। इसकी दीवारों में दरार पड़ गई हैं और छत टपकती है। अभिभावक छात्रों को जर्जर भवन में पढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। शासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। डीआईओएस दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार शासन ने जीआईसी बिजनौर के भवन की स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। आकलन के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सदर हैं। जीआईसी बिजनौर के प्रधानाचार्य तथा लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता सदस्य हैं। बताया कि समिति भवन का भौतिक सत्यापन करके भवन की हालत की बिंदुवार स्थिति की जानकारी ले रही है। समिति यह भी रिपोर्ट देगी कि क्या भवन में पढ़ रहे छात्रों को तुरंत किसी वैकल्पिक भवन में स्थानांतरित करने की जरूरत है या नहीं। समिति ने जांच शुरू कर दी है। जल्द ही रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। अंतिम निर्णय शासन से होगा।
वैकल्पिक भवन की तलाश हुई तेज
राजकीय इंटर कॉलेज में करीब 2100 छात्र पढ़ते हैं। कॉलेज में दो शिफ्ट में पठन-पाठन होता है। शासन के छात्रों को पढ़ाने के लिए वैकल्पिक भवन तलाशने के निर्देश हैं। एक शिफ्ट के लिए बिजनौर इंटर कॉलेज बिजनौर का भवन लगभग फाइनल है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई हो रही है। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल ने शासन के फैसले को सही बताया है।
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बिजनौर। राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर के भवन का आकलन शुरू हो गया है। शासन ने इसके लिए उच्च स्तरीय प्रशासनिक समिति गठित की है। साथ ही डीआईओएस दफ्तर ने भवन में पढ़ रहे छात्रों को स्थानांतरित करने के वैकल्पिक भवन की तलाश तेज कर दी है। अभिभावक संघ ने शासन के फैसले को सही बताया है।
राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर का भवन अंग्रेजों के जमाने का बना हुआ है। करीब 110 साल पुराना भवन जर्जर अब हालत में है। इसकी दीवारों में दरार पड़ गई हैं और छत टपकती है। अभिभावक छात्रों को जर्जर भवन में पढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। अमर उजाला ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। शासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। डीआईओएस दफ्तर से मिली जानकारी के अनुसार शासन ने जीआईसी बिजनौर के भवन की स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। आकलन के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम सदर हैं। जीआईसी बिजनौर के प्रधानाचार्य तथा लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता सदस्य हैं। बताया कि समिति भवन का भौतिक सत्यापन करके भवन की हालत की बिंदुवार स्थिति की जानकारी ले रही है। समिति यह भी रिपोर्ट देगी कि क्या भवन में पढ़ रहे छात्रों को तुरंत किसी वैकल्पिक भवन में स्थानांतरित करने की जरूरत है या नहीं। समिति ने जांच शुरू कर दी है। जल्द ही रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। अंतिम निर्णय शासन से होगा।
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वैकल्पिक भवन की तलाश हुई तेज
राजकीय इंटर कॉलेज में करीब 2100 छात्र पढ़ते हैं। कॉलेज में दो शिफ्ट में पठन-पाठन होता है। शासन के छात्रों को पढ़ाने के लिए वैकल्पिक भवन तलाशने के निर्देश हैं। एक शिफ्ट के लिए बिजनौर इंटर कॉलेज बिजनौर का भवन लगभग फाइनल है। डीआईओएस राजेश कुमार ने बताया कि निर्देशों के अनुपालन में कार्रवाई हो रही है। अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष नृपेंद्र देशवाल ने शासन के फैसले को सही बताया है।
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