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धीरज गुणवंत सेना में बने अधिकारी
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लेफ्टिनेंट बने अफजलगढ़ के गांव चकफेरी धीरज गुणवंत अपने माता-पिता के साथ।
- फोटो : BIJNOR
धीरज गुणवंत सेना में बने अधिकारी
अफजलगढ़। गांव चकफेरी निवासी देवेंद्र गुणवंत के पुत्र धीरज गुणवंत ने इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बनकर क्षेत्र व गांव का नाम रोशन किया।
धीरज ने अपनी प्राथमिक पढ़ाई गांव चकफेरी के स्कूल में की। इसके बाद वह अपने पिता के पास जसपुर चले गए। उन्होंने रानीखेत के ताड़ीखेत स्थित नवोदय विद्यालय में इंटर तक की पढ़ाई पूरी की। धीरज के दादा स्वर्गीय रामदत्त आर्मी में हवलदार के पद पर थे। उनसे प्रेरणा लेते हुए धीरज का रुझान आर्मी की ओर हो गया।
वर्ष 2010 में वह एयर फोर्स में एयरमैन के पद पर भर्ती हुए। वहां वह छह वर्ष तक रहे ओर एसीसी कमीशन की परीक्षा पास की। इसके बाद धीरज का चयन आर्मी बोर्ड में लेफ्टिनेंट पद पर हो गया। देहरादून में आर्मी कैडेट कॉलेज से चार वर्ष की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद धीरज की तैनाती राजस्थान के बीकानेर में मानिकशाह बटालियन में लेफ्टिनेंट पद पर हो गई है। धीरज के घर परिवार में खुशी का माहौल है। धीरज अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता देवेंद्र गुणवंत, माता आनंदी गुणवंत तथा अपने स्वर्गीय दादा रामदत्त को देते हैं।
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अफजलगढ़। गांव चकफेरी निवासी देवेंद्र गुणवंत के पुत्र धीरज गुणवंत ने इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बनकर क्षेत्र व गांव का नाम रोशन किया।
धीरज ने अपनी प्राथमिक पढ़ाई गांव चकफेरी के स्कूल में की। इसके बाद वह अपने पिता के पास जसपुर चले गए। उन्होंने रानीखेत के ताड़ीखेत स्थित नवोदय विद्यालय में इंटर तक की पढ़ाई पूरी की। धीरज के दादा स्वर्गीय रामदत्त आर्मी में हवलदार के पद पर थे। उनसे प्रेरणा लेते हुए धीरज का रुझान आर्मी की ओर हो गया।
वर्ष 2010 में वह एयर फोर्स में एयरमैन के पद पर भर्ती हुए। वहां वह छह वर्ष तक रहे ओर एसीसी कमीशन की परीक्षा पास की। इसके बाद धीरज का चयन आर्मी बोर्ड में लेफ्टिनेंट पद पर हो गया। देहरादून में आर्मी कैडेट कॉलेज से चार वर्ष की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद धीरज की तैनाती राजस्थान के बीकानेर में मानिकशाह बटालियन में लेफ्टिनेंट पद पर हो गई है। धीरज के घर परिवार में खुशी का माहौल है। धीरज अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता देवेंद्र गुणवंत, माता आनंदी गुणवंत तथा अपने स्वर्गीय दादा रामदत्त को देते हैं।
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