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बान नदी के जीर्णोद्धार के लिए जुटे अफसर और ग्रामीण

Sun, 23 Jun 2019 12:16 AM IST
NAVEEN GUPTA ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर Published by: NAVEEN GUPTA Updated Sun, 23 Jun 2019 12:16 AM IST
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Officers and villagers gathered for the restoration of Ban river
बिजनौर क्षेत्र के ग्राम लालवाला में सामूहिक श्रमदान करते डीएम व ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के बरुकी में बान नदी के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में पहुंचकर जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने श्रमदान किया। उन्होंने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री का जल संचयन विषय में लिखा गया पत्र भी पढ़कर सुनाया गया।
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ग्राम पंचायत लालपुर के ग्राम जीवनपुर स्थित विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने कहा कि जल संचयन आज के समय में सबसे जरूरी कार्य है। उन्होंने समस्त क्षेत्र वासियों से अपील की कि वे बान नदी की सफाई कार्य में अधिक से अधिक जागरूकता से कार्य करें और सुझाव दें। बान नदी से जहां क्षेत्र की सिंचाई की व्यवस्था सुदृढ़ होगी, वहीं वाटर लेवल भी सुधरेगा। इसके बाद जिलाधिकारी ने बान नदी की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने फावड़ा चलाकर बांध नदी जीर्णोद्धार कार्यक्रम में श्रमदान भी किया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी श्री प्रवीण मिश्र, जिला पंचायत राज अधिकारी सतीश कुमार, एसडीएम नजीबाबाद उमेश कुमार मिश्रा, बीडीओ किरतपुर अमरीश कुमार, एडीओ पंचायत राकेश कुमार, ग्राम प्रधान अशोक कुमार, मोहित कुमार आदि उपस्थित रहे।।
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डीएम को दिए ज्ञापन
ग्राम जीवनपुर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर गांव को किरतपुर-नहटौर मार्ग से जोड़ने वाली पुलिया पर पुल निर्माण की मांग की। इसके अलावा मनरेगा मजदूर साजन कश्यप ,लवकुश कुमार ने कहा कि कई बार मनरेगा मजदूरी आने में भी देरी होती है। जिलाधिकारी ने मजदूरों को शासन को उनकी समस्या भेजने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही किसान सौपाल सिंह कश्यप, भूरे सिंह, ब्रह्म पाल सिंह ने कहा कि बान नदी की सफाई के दौरान उनकी जमीन को अधिग्रहित कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने किसानों की समस्याओं के लिए राजस्व अधिकारी को निर्देश दिए।
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प्रधानमंत्री के जल संचयन संदेश को हकीकत बनाने में जुटा पंचायत विभाग
बिजनौर। पंचायतराज विभाग प्रधानमंत्री के जलसंचयन के संदेश को मुहूर्त रुप देने में जुट गया हैं। गांवों में श्रमदान से तालाब खुदेंगे। गंदगी से अटे तालाबों की सफाई होगी। इसके लिए गांववार व मोहल्लेवार तालाब बचाओ कमेटी बनाकर तालाबों की निगरानी होगी। इस बारे में कर्मचारियों को निर्देश व जरूरी टिप्स दिए गए हैं। जिला पंचायतराज अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार प्रधानमंत्री की मंशा है कि खेत का खेत में तथा गांव का पानी गांव में रहे। बरसात के पानी का संचरण हो। इसके लिए गांवों में मिट्टी से समतल हो गए तालाबों की खुदाई हो। गंदगी से अटे तालाबों की सफाई हो। यह काम श्रमदान से होगा। इसका श्रीगणेश डीएम सुजीत कुमार ने किरतपुर ब्लाक की लालपुर पंचायत से किया है। जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं। ग्राम पंचायतों में तीन तक गांव हैं। एक ग्राम विकास अधिकारी / ग्रामपंचायत अधिकारी के कार्यक्षेत्र में सात तक ग्रामपंचायत हैं। बीडीओ व सहायक विकास अधिकारियों को ग्रामपंचायत दी जा रही हैं। अधिकारी भी गांवों में जाकर श्रमदान करेंगे। वह स्वयं भी गांवों में जाकर श्रमदान करेंगे। तालाबों के बचाने में ग्रामवासियों का सहयोग लिया जाएगा। मोहल्लों में महिला व पुरुषों की अलग-अलग कमेटी बनेंगी। युवकों को जल व उनका भविष्य का पाठ पढ़ाकर अभियान से जोड़ा जाएगा। महिलाएं घर-घर जाकर पानी की बरबादी रोकने व जल संचरण का संदेश देंगी। डीपीआरओ के मुताबिक जिले की कुछ ग्राम पंचायतों में पेयजल टंकी बनी हैं। गांवों में सार्वजनिक टोंटी लगी हैं। यदि किसी टोंटी के खराब होने से पानी बह रहा है तो उन्हें ठीक कराकर पानी की बरबादी रोकेंगे।



तालाबों में नहीं जाने दें गंदगी
जिला पंचायत राज विभाग लोगों को इस बात के लिए भी जागरूक करेगा कि वे तालाबों में गंदगी नहीं जाने दें। गांवों में पशुओं को तालाबों में खुला छोड़ देने की शिकायत मिलती रहती है। पशुओं के गोबर करने से तालाब गंदे हो जाते हैं।  विभाग ग्रामवासियों की खुली बैठक करके जल संरक्षण के लिए सहयोग की अपील करेगा। नालियों की सफाई पर ध्यान देंगे जिससे घरों व सड़क की गंदगी तालाबों में नहीं जाएं।




जल संरक्षण से जमीन की बनी रहेगी उर्वरा शक्ति
बिजनौर। जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार जल संरक्षण प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है। यदि खेत का पानी खेत में रहेगा तो खेत की मिट्टी खेत में रहेगी। जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी। पानी के साथ खेत की मिट्टी बह जाती है। जमीन की फसल पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है। बरसात का पानी भूमि के अंदर जाएगा। भूमिगत जल का स्तर बढे़गा। किसानों को नलकूपों के बोरिंग कम गहराई पर कराएगा। इससे किसान के पैसे की बचत होगी। समय की बरबादी नहीं होगी।
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