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Bijnor News: आर्थिक सेहत सुधारने को बनाया पोषाहार, उद्योग को लगा कर्ज का कुपोषण

Thu, 04 Dec 2025 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 04 Dec 2025 12:42 AM IST
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Nutrition designed to improve economic health, industry suffers from debt malnutrition.
संवाद न्यूज एजेंसी
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बिजनौर/स्योहारा। जीवन संवारने के लिए कारोबार की दिशा में कदम बढ़ाने वाली महिलाएं 2.30 करोड़ की कर्जदार हो चुकी हैं। दरअसल महिलाओं के प्रबंधन में चल रहा पोषाहार बनाने का कारखाना कर्ज में डूबा है। प्रबंधन संभालने के साथ ये महिलाएं कारखाने में खुद ही काम करती हैं, जिन्हें 267 रुपया प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। मगर महिलाओं की भरपूर मेहनत के बाद भी घाटे से उबरना मुश्किल लग रहा है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में छह जगहों पर उद्यम लगाए गए थे। इनमें पालनपुर में मां सीता प्रेरणा महिला माइक्रो इंटरप्राइजेज उद्योग स्थापित किया गया, जिसकी जिम्मेदारी समूह से जुड़ी महिलाओं को सौंपते हुए अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और सचिव बनाया गया। साल 2022 में करीब 90 लाख रुपये की लागत से यह कारखाना महिलाओें को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से लगाया गया, जिसमें आटा-बेसन हलवा, आटा-बेसन बर्फी, मूंग दाल खिचड़ी, ऊर्जायुक्त हलवा आदि तैयार कर बाल विकास सेवा योजना को सप्लाई किया जाता है, जो कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होता है।
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उद्यमी बनी इन महिलाओं ने दिन रात मेहनत भी की। कुल बीस महिलाएं इसमें काम करती हैं, जिन्हें मजदूरी मिलती है। ये कमेटी में सदस्य भी हैं। मगर यह उद्यम आर्थिक संकट की कगार पर पहुंच चुका है, जो कि सवा दो करोड़ रुपये के कर्ज में दब चुका है। वहीं दूसरी ओर विभागीय उदासीनता का आलम यह कि आईसीडीएस पर मात्र 70 लाख रुपये का बकाया होते हुए भी महीनों तक भुगतान अटका पड़ा है।
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दो शिफ्टों में 20 महिलाएं कार्यरत हैं और प्रतिमाह लगभग 129 मैट्रिक टन खाद्य सामग्री तैयार की जाती है। यह पूरी फैक्ट्री महिलाओं द्वारा संचालित है और हर महिला को महज 267 रुपये प्रतिदिन मानदेय दिया जाता है। महिलाओं की मेहनत से चलने वाला यह उद्योग, विभागीय ढिलाई से आज बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है।
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