{"_id":"5ebecb5c8ebc3e90440d5d60","slug":"no-relief-to-milk-business-guarantee-of-sale-of-crops-bijnor-news-mrt481933794","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुग्ध व्यवसाय को राहत नहीं, फसलों के बिकने की गारंटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुग्ध व्यवसाय को राहत नहीं, फसलों के बिकने की गारंटी
विज्ञापन
दुग्ध व्यवसाय को राहत नहीं, फसलों के बिकने की गारंटी
बिजनौर। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन के दौरान किसानों को राहत देने वाली घोषणाएं शुक्रवार को भी कीं। इन घोषणाओं से किसानों को सीधे तो कोई फायदा नहीं मिलेेगा, लेकिन अपने काम को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पशुपालन करने वाले किसानों को लॉकडाउन में खासा नुकसान हुआ है। लॉकडाउन से पहले दूध के दाम करीब 45 रुपये प्रति लीटर थे, जो अब 36 रुपये प्रति लीटर ही रह गए हैं। डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों को भारी नुकसान हुआ है। दूध के दाम कम होने पर भी लागत कम नहीं हुई है। किसानों को पराग से भुगतान भी समय से नहीं मिल रहा है। पशुपालक राजवीर सिंह का कहना है कि किसान को दूध में हुए नुकसान की सरकार को भरपाई करनी चाहिए। इस बार दुग्ध व्यवसाय से मुनाफा होने की उम्मीद थी, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। दुग्ध उत्पादक किसानों को सब्सिडी मिलनी चाहिए।
जिले में मत्स्य पालन का काम बड़े स्तर पर होता है। काफी लोग मत्स्य पालन का काम करते हैं। जिले से बाहर भी मछली सप्लाई होती है। मत्स्य पालन के लिए सरकार द्वारा योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। मत्स्य पालक विजेंद्र चौहान का कहना है कि सरकार की इस घोषणा से समय किसानों का ध्यान फसल से अलग दूसरे व्यवसायों पर जाएगा। यह किसानों को व्यापार में लाने की शुरूआत हो सकती है। सरकार इस पर पूरी जिम्मेदारी से काम कराए। किसानों ने सभी फसलों के बिकने की गारंटी सुनिश्चित करने की बात कही है। सरकार के इस कदम से आगे चलकर किसानों को फायदा होगा। गांव शाहपुरलाल निवासी किसान रूपेंद्र सिंह का कहना है किसानों की सभी फसलों के बिकने की गारंटी होना बहुत जरूरी है। ऐसा न होने की वजह से ही किसान केवल गन्ने के पीछे भाग रहा है। किसान की सभी फसलों के न्यूनतम रेट भी निर्धारित होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन के दौरान किसानों को राहत देने वाली घोषणाएं शुक्रवार को भी कीं। इन घोषणाओं से किसानों को सीधे तो कोई फायदा नहीं मिलेेगा, लेकिन अपने काम को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पशुपालन करने वाले किसानों को लॉकडाउन में खासा नुकसान हुआ है। लॉकडाउन से पहले दूध के दाम करीब 45 रुपये प्रति लीटर थे, जो अब 36 रुपये प्रति लीटर ही रह गए हैं। डेयरी उद्योग से जुड़े किसानों को भारी नुकसान हुआ है। दूध के दाम कम होने पर भी लागत कम नहीं हुई है। किसानों को पराग से भुगतान भी समय से नहीं मिल रहा है। पशुपालक राजवीर सिंह का कहना है कि किसान को दूध में हुए नुकसान की सरकार को भरपाई करनी चाहिए। इस बार दुग्ध व्यवसाय से मुनाफा होने की उम्मीद थी, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। दुग्ध उत्पादक किसानों को सब्सिडी मिलनी चाहिए।
विज्ञापन
जिले में मत्स्य पालन का काम बड़े स्तर पर होता है। काफी लोग मत्स्य पालन का काम करते हैं। जिले से बाहर भी मछली सप्लाई होती है। मत्स्य पालन के लिए सरकार द्वारा योजना शुरू करने की घोषणा की गई है। मत्स्य पालक विजेंद्र चौहान का कहना है कि सरकार की इस घोषणा से समय किसानों का ध्यान फसल से अलग दूसरे व्यवसायों पर जाएगा। यह किसानों को व्यापार में लाने की शुरूआत हो सकती है। सरकार इस पर पूरी जिम्मेदारी से काम कराए। किसानों ने सभी फसलों के बिकने की गारंटी सुनिश्चित करने की बात कही है। सरकार के इस कदम से आगे चलकर किसानों को फायदा होगा। गांव शाहपुरलाल निवासी किसान रूपेंद्र सिंह का कहना है किसानों की सभी फसलों के बिकने की गारंटी होना बहुत जरूरी है। ऐसा न होने की वजह से ही किसान केवल गन्ने के पीछे भाग रहा है। किसान की सभी फसलों के न्यूनतम रेट भी निर्धारित होनी चाहिए।
विज्ञापन