{"_id":"5e12270c8ebc3e87ab49230d","slug":"no-playgrounds-nazibabad-news-mrt4622899106","type":"story","status":"publish","title_hn":"सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं तोड़ रही हैं दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं तोड़ रही हैं दम
विज्ञापन
नजीबाबाद में खस्ताहाल पड़ा जीआईसी का खेल मैदान।
- फोटो : NAZIBABAD
सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं तोड़ रही हैं दम
नजीबाबाद। नगर में सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। वैकल्पिक क्रीड़ा स्थलों के खस्ताहाल होने से आउटडोर गेम्स युवाओं की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। हालांकि करीब तीन दशक पहले मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति ने क्रीड़ा स्थल के लिए संघर्ष किया तो युवाओं में क्रीड़ा स्थल निर्माण की उम्मीद जागी, लेकिन चाहरदीवारी तक ही क्रीड़ा स्थल का निर्माण सिमटकर रह गया।
नगर में कोई भी सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं इधर उधर भटक रही हैं। देखभाल के अभाव में वैकल्पिक क्रीड़ा स्थल भी बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं। बात रामलीला मैदान की हो चाहे रेलवे के क्रीड़ा स्थल की हो, पर्याप्त संसाधनों के अभाव में क्रीड़ा स्थल खस्ताहाल है। क्रीड़ा स्थलों में खस्ताहाल होने से युवाओं का आउटडोर गेम्स के स्थान पर इंडोर गेम्स के प्रति रुझान बढ़ा है। वॉलीबाल, क्रिकेट, फुटबाल, कबड्डी आदि आउटडोर गेम्स की खेल प्रतिभाएं क्रीड़ा स्थल के अभाव में दम तोड़ रही हैं। हालांकि करीब तीन दशक पहले संयोजक जफर जैदी, संरक्षक पूर्व सांसद राजा भारतेंद्र सिंह, शिक्षाविद् आचार्य आरएन केला, पूर्व विधायक मास्टर रामस्वरूप, पूर्व विधायक बलदेव सिंह, पूर्व विधायक शीशराम सिंह, बुद्धदेव शर्मा, जितेंद्र जैन, मुकुल माहेश्वरी आदि गणमान्य लोगों ने मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति बनाकर नगर को सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल दिलाने का सपना संजोया। समिति कार्यकर्ताओं का प्रयास सन 1998 में उस समय रंग लाया जब राजकीय इंटर कॉलेज की रोडवेज डिपो के बराबर में पड़े क्रीड़ा स्थल की चाहरदीवारी हो गई। राजकीय इंटर कॉलेज नजीबाबाद के हस्तक्षेप के बाद किसी अन्य कारणों से मिनी स्टेडियम का निर्माण चाहरदीवारी तक सिमटकर रह गया। समिति सदस्यों की काफी जद्दोजहद के बाद भी आज भी मिनी स्टेडियम सपना बना हुआ है।
मिनी स्टेडियम निर्माण की आज भी है आस
नजीबाबाद। मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति के संयोजक जफर जैदी का कहना है कि मिनी स्टेडियम निर्माण को लेकर उन्होंने आज भी आस नहीं छोड़ी है। उन्होंने डीएम, एडीएम और एसडीएम संगीता को स्टेडियम निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की है।
विज्ञापन
शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति के लिए आउटडोर गेम्स जरूरी
नजीबाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ.सर्वेश निराला का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल युवाओं के लिए आवश्यक हैं। शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति के लिए युवाओं को आउटडोर गेम्स के प्रति जागरूक किए जाने की आवश्कता है।
खेल मैदान निर्माण के लिए पूरा प्रयास करेंगी
नजीबाबाद। एसडीएम संगीता का कहना है कि मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति के संयोजक जफर जैदी ने उन्हें मामले से अवगत कराया है। लेकिन विभागीय दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण इस दिशा में अभी आगे नहीं बढ़ा गया है। क्रीड़ा स्थल निर्माण के लिए वे अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगी।
विज्ञापन
नजीबाबाद। नगर में सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। वैकल्पिक क्रीड़ा स्थलों के खस्ताहाल होने से आउटडोर गेम्स युवाओं की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। हालांकि करीब तीन दशक पहले मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति ने क्रीड़ा स्थल के लिए संघर्ष किया तो युवाओं में क्रीड़ा स्थल निर्माण की उम्मीद जागी, लेकिन चाहरदीवारी तक ही क्रीड़ा स्थल का निर्माण सिमटकर रह गया।
नगर में कोई भी सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल न होने से खेल प्रतिभाएं इधर उधर भटक रही हैं। देखभाल के अभाव में वैकल्पिक क्रीड़ा स्थल भी बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं। बात रामलीला मैदान की हो चाहे रेलवे के क्रीड़ा स्थल की हो, पर्याप्त संसाधनों के अभाव में क्रीड़ा स्थल खस्ताहाल है। क्रीड़ा स्थलों में खस्ताहाल होने से युवाओं का आउटडोर गेम्स के स्थान पर इंडोर गेम्स के प्रति रुझान बढ़ा है। वॉलीबाल, क्रिकेट, फुटबाल, कबड्डी आदि आउटडोर गेम्स की खेल प्रतिभाएं क्रीड़ा स्थल के अभाव में दम तोड़ रही हैं। हालांकि करीब तीन दशक पहले संयोजक जफर जैदी, संरक्षक पूर्व सांसद राजा भारतेंद्र सिंह, शिक्षाविद् आचार्य आरएन केला, पूर्व विधायक मास्टर रामस्वरूप, पूर्व विधायक बलदेव सिंह, पूर्व विधायक शीशराम सिंह, बुद्धदेव शर्मा, जितेंद्र जैन, मुकुल माहेश्वरी आदि गणमान्य लोगों ने मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति बनाकर नगर को सार्वजनिक क्रीड़ा स्थल दिलाने का सपना संजोया। समिति कार्यकर्ताओं का प्रयास सन 1998 में उस समय रंग लाया जब राजकीय इंटर कॉलेज की रोडवेज डिपो के बराबर में पड़े क्रीड़ा स्थल की चाहरदीवारी हो गई। राजकीय इंटर कॉलेज नजीबाबाद के हस्तक्षेप के बाद किसी अन्य कारणों से मिनी स्टेडियम का निर्माण चाहरदीवारी तक सिमटकर रह गया। समिति सदस्यों की काफी जद्दोजहद के बाद भी आज भी मिनी स्टेडियम सपना बना हुआ है।
विज्ञापन
मिनी स्टेडियम निर्माण की आज भी है आस
नजीबाबाद। मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति के संयोजक जफर जैदी का कहना है कि मिनी स्टेडियम निर्माण को लेकर उन्होंने आज भी आस नहीं छोड़ी है। उन्होंने डीएम, एडीएम और एसडीएम संगीता को स्टेडियम निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की है।
विज्ञापन
शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति के लिए आउटडोर गेम्स जरूरी
नजीबाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ.सर्वेश निराला का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल युवाओं के लिए आवश्यक हैं। शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति के लिए युवाओं को आउटडोर गेम्स के प्रति जागरूक किए जाने की आवश्कता है।
खेल मैदान निर्माण के लिए पूरा प्रयास करेंगी
नजीबाबाद। एसडीएम संगीता का कहना है कि मिनी स्टेडियम संघर्ष समिति के संयोजक जफर जैदी ने उन्हें मामले से अवगत कराया है। लेकिन विभागीय दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण इस दिशा में अभी आगे नहीं बढ़ा गया है। क्रीड़ा स्थल निर्माण के लिए वे अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगी।