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हादसे में छीन ली बुढ़ापे की लाठी, अब मुफलिसी की छत गिरी
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बिजनौर। मुफलिसी में अगर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़े तो जीवन बेरंग ही नहीं बल्कि दयनीय भी हो जाता है। 70 वर्ष के बुजुर्ग मान सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ। बेदर्द मौसम की मार से बचने के लिए एक कच्चे मकान का सहारा था, उसकी छत भी चार दिन पहले गिर गई। अब पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे बसर करने को मजबूर है। मान सिंह के बुढ़ापे की लाठी यानि इकलौते के बेटे की सड़क हादसे में नौ महीने पहले मौत हो गई थी।
थाना कोतवाली शहर के गांव मोमनपुर दर्गो निवासी 70 वर्षीय वृद्व मान सिंह के 34 वर्षीय पुत्र योगेश की नौ माह पूर्व सड़क दुर्घटना मे मौत हो गई थी जोकि छह बहनों का इकलौता भाई था। घर में अकेला कमाने वाले की मौत हो जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। मृतक अपने पीछे मां सुदेशना पत्नी रेखा व तीन बच्चे दो पुत्री व एक पुत्र को रोता बिलखता छोड़ गया था। मृतक के जाने के बाद उसके बच्चों की पढ़ाई छूट गई। इसके बाद भी मुसीबतों ने पीछा नहीं छोड़ा। चार दिन पूर्व कड़ियों के मकान में रह रहे इस परिवार के एक कमरे की छत भरभराकर गिर पड़ी। बाकी दो कमरों की छत का भी कोई भरोसा नहीं है कि वो कब गिर जाए। इस डर से परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया ।
बुआ ने कराया बच्चों को दाखिला
योगेश की मौत के बाद बच्चों की पढ़ाई छूट गई थी। परिवार के पास पढानें के लिए पैसे नहीं थे । जब कोई मदद को आगे नहीं आया तो बच्चों की बुआ ने एक छोटे से स्कूल में तीनों बच्चों का दाखिला करा कर पढ़ाई शुरू कराई ।
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रक्षाबंधन मनाने को नहीं थे पैसे
जहा एक ओर भाई बहन के इस प्यार भरे पर्व रक्षाबंधन को मनाने के लिए पिछले कई दिनों से बाजार मे रौनक हो रही थी। सभी मिठाई, राखी व उपहार खरीदने मे व्यस्त रहे। जबकि इस परिवार के पास राखी व मिठाई खरीदने तक के पैसे नहीं थे । बच्चे नम आखों से अपने पिता के याद कर रहे हैं कि काश हम भी अपने पिता के साथ बाजार जाकर राखी और मिठाई खरीद कर लाते ।
वर्जन........
यह परिवार जिन योजनाओं का पात्र है, उनका लाभ दिलाया जाएगा। टीम भेजी जाएगी और हर संभव मदद कराई जाएगी। - विनय कुमार, एडीएम प्रशासन
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थाना कोतवाली शहर के गांव मोमनपुर दर्गो निवासी 70 वर्षीय वृद्व मान सिंह के 34 वर्षीय पुत्र योगेश की नौ माह पूर्व सड़क दुर्घटना मे मौत हो गई थी जोकि छह बहनों का इकलौता भाई था। घर में अकेला कमाने वाले की मौत हो जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। मृतक अपने पीछे मां सुदेशना पत्नी रेखा व तीन बच्चे दो पुत्री व एक पुत्र को रोता बिलखता छोड़ गया था। मृतक के जाने के बाद उसके बच्चों की पढ़ाई छूट गई। इसके बाद भी मुसीबतों ने पीछा नहीं छोड़ा। चार दिन पूर्व कड़ियों के मकान में रह रहे इस परिवार के एक कमरे की छत भरभराकर गिर पड़ी। बाकी दो कमरों की छत का भी कोई भरोसा नहीं है कि वो कब गिर जाए। इस डर से परिवार खुले आसमान के नीचे आ गया ।
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बुआ ने कराया बच्चों को दाखिला
योगेश की मौत के बाद बच्चों की पढ़ाई छूट गई थी। परिवार के पास पढानें के लिए पैसे नहीं थे । जब कोई मदद को आगे नहीं आया तो बच्चों की बुआ ने एक छोटे से स्कूल में तीनों बच्चों का दाखिला करा कर पढ़ाई शुरू कराई ।
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रक्षाबंधन मनाने को नहीं थे पैसे
जहा एक ओर भाई बहन के इस प्यार भरे पर्व रक्षाबंधन को मनाने के लिए पिछले कई दिनों से बाजार मे रौनक हो रही थी। सभी मिठाई, राखी व उपहार खरीदने मे व्यस्त रहे। जबकि इस परिवार के पास राखी व मिठाई खरीदने तक के पैसे नहीं थे । बच्चे नम आखों से अपने पिता के याद कर रहे हैं कि काश हम भी अपने पिता के साथ बाजार जाकर राखी और मिठाई खरीद कर लाते ।
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यह परिवार जिन योजनाओं का पात्र है, उनका लाभ दिलाया जाएगा। टीम भेजी जाएगी और हर संभव मदद कराई जाएगी। - विनय कुमार, एडीएम प्रशासन