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एनजीटी सख्त, नहीं कटेगा जैन फार्म में आग का बाग
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बिजनौर का जैन फार्म।
- फोटो : BIJNOR
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एनजीटी सख्त, नहीं कटेगा जैन फार्म में आम का बाग
बिजनौर। नगर में पॉल्युशन फिल्टर कहे जाने वाले जैन फार्म में आम के बाग को काटने पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। बाग के पेड़ काटकर प्लाटिंग करने पर चिंता भी जताई है। साथ ही बिजनौर डीएफओ को इस मामले को गंभीरता से देखने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अब आम के बाग को वन स्वरूप में बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 1996 में आए आदेश का हवाला भी दिया है। इससे आम के बाग में प्लाटिंग करने और प्लाट खरीदने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
बिजनौर नगर में एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन पर आम का बाग है। यह बाग तीस साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। यह बाग किरतपुर रोड से शुरू होता है और दूसरी ओर चक्कर रोड बाईपास तक है। इसमें चार हजार से ज्यादा आम के पेड़ हैं। आम के फलदायक पेड़ों को काटने पर शासन की ओर से प्रतिबंध है, लेकिन फल नहीं दे रहे पेड़ों को उद्यान विभाग की रिपोर्ट के बाद काटा जा सकता है। इसी नियम को ढाल बनाकर अब तक सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं। नगर के ही विदित कुमार ने आम का बाग काटकर वहां की जा रही प्लाटिंग के खिलाफ एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था।
विदित कुमार की याचिका पर एनजीटी ने गंभीरता दिखाई है। पिछले सप्ताह ही एनजीटी की तीन सदस्यीय बेंच ने इसे लेकर एक आदेश जारी किया है। आदेश में आम के बाग के पेड़ काटने को सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 1996 में आए आदेश का उल्लंघन बताया है। इसके साथ ही बाग में खड़े आम के करीब चार हजार पेड़ों को काटकर प्लाटिंग करने को ग्रीन बेल्ट और मास्टर प्लान के खिलाफ बताया है। एनजीटी ने बिजनौर डीएफओ को मामले को गंभीरता से देखने और नियमानुुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
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प्लाटिंग करने पर खूब हुआ था बवाल
कुछ समय पहले बाग के एक बड़े हिस्से पर आम के पेड़ काटे गए। यह बात अलग है कि कुछ पर उद्यान विभाग ने रिपोर्ट लगा दी थी कि उनकी फल देने की क्षमता समाप्त हो गई। वहीं, कई पेड़ों को सूखा हुआ बताया गया था। इसे लेकर नगर के कई लोगों ने विरोध भी किया था। इसके बाद मामले को किसी तरह दबाया गया और धीरे-धीरे उस हिस्से पर प्लाटिंग कर दी गई।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा, प्रधानमंत्री पोर्टल पर हुई थी शिकायत
करीब दो साल पहले जैन फार्म से आम के बाग को बिजनौर महायोजना में शामिल करने का मामला प्रधानमंत्री के पोर्टल तक पहुंचा था। एमडी कॉलेज ऑफ हायर एजूकेशन के प्रबंधक डॉ. विदित कुमार ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री के पोर्टल पर की थी। आरोप लगाया था कि बिजनौर विनियमित प्राधिकरण ने 2011 बिजनौर महायोजना में करीब 500 बीघा भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में सूचीबद्ध किया था। क्योंकि इस क्षेत्र में आम के करीब पांच हजार हरे पेड़ हैं। तब भी राजनीतिक प्रभाव के चलते यह पूरा खेल हुआ था। दो साल पहले रात भर में करीब 100 आम के हरे पेड़ काट दिए गए थे। अमर उजाला दो साल पहले बाग काटे जाने का मामला जोर शोर से उठाया था। उस वक्त तमाम लोग जुड़े थे। उनका कहना था कि शहर के बीच से आम का बाग नहीं कटने देंगे।
विवादों में घिरी है बाग में की जा रही प्लाटिंग
नगर में आम का बाग कटने के बाद प्लाटिंग की गई थी। महंगे दामों पर प्लाट पर बेचे गए थे। लेकिन यह पूरी प्लाटिंग विवादों में घिरी हुई है। बता दें कि भले ही जमीन की श्रेणी बदल दी गई, लेकिन मास्टर प्लान में भू उपयोग नहीं बदला है। पिछले दिनों कॉलोनी विकसित करने के मकसद से यहां बिजली के खंभे लगा दिए गए थे। जिन्हें एसडीएम ने उखड़वा दिया था। मामले में नोटिस भी जारी किए गए थे।
यहां जो प्लाटिंग हुई थी, उसमें बिजली के खंभे लगा दिए गए थे। जिन्हें उखड़वाया गया। नोटिस जारी किए गए थे। यहां कोई निर्माण नहीं हो सकता है, अगर निर्माण किया गया तो कार्रवाई की जाएगी - विक्रमादित्य सिंह मलिक, एसडीएम सदर
एनजीटी का आदेश मिला है, नियम देखे जा रहे हैं। हम आम के पेड़ काटने की अनुमति नहीं देते। रही बात वन स्वरूप घोषित करने को लेकर तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तो उसे पढ़ा जा रहा है। जो नियम होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी - अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर
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बिजनौर। नगर में पॉल्युशन फिल्टर कहे जाने वाले जैन फार्म में आम के बाग को काटने पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। बाग के पेड़ काटकर प्लाटिंग करने पर चिंता भी जताई है। साथ ही बिजनौर डीएफओ को इस मामले को गंभीरता से देखने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अब आम के बाग को वन स्वरूप में बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 1996 में आए आदेश का हवाला भी दिया है। इससे आम के बाग में प्लाटिंग करने और प्लाट खरीदने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
बिजनौर नगर में एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन पर आम का बाग है। यह बाग तीस साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। यह बाग किरतपुर रोड से शुरू होता है और दूसरी ओर चक्कर रोड बाईपास तक है। इसमें चार हजार से ज्यादा आम के पेड़ हैं। आम के फलदायक पेड़ों को काटने पर शासन की ओर से प्रतिबंध है, लेकिन फल नहीं दे रहे पेड़ों को उद्यान विभाग की रिपोर्ट के बाद काटा जा सकता है। इसी नियम को ढाल बनाकर अब तक सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं। नगर के ही विदित कुमार ने आम का बाग काटकर वहां की जा रही प्लाटिंग के खिलाफ एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था।
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विदित कुमार की याचिका पर एनजीटी ने गंभीरता दिखाई है। पिछले सप्ताह ही एनजीटी की तीन सदस्यीय बेंच ने इसे लेकर एक आदेश जारी किया है। आदेश में आम के बाग के पेड़ काटने को सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 1996 में आए आदेश का उल्लंघन बताया है। इसके साथ ही बाग में खड़े आम के करीब चार हजार पेड़ों को काटकर प्लाटिंग करने को ग्रीन बेल्ट और मास्टर प्लान के खिलाफ बताया है। एनजीटी ने बिजनौर डीएफओ को मामले को गंभीरता से देखने और नियमानुुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
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प्लाटिंग करने पर खूब हुआ था बवाल
कुछ समय पहले बाग के एक बड़े हिस्से पर आम के पेड़ काटे गए। यह बात अलग है कि कुछ पर उद्यान विभाग ने रिपोर्ट लगा दी थी कि उनकी फल देने की क्षमता समाप्त हो गई। वहीं, कई पेड़ों को सूखा हुआ बताया गया था। इसे लेकर नगर के कई लोगों ने विरोध भी किया था। इसके बाद मामले को किसी तरह दबाया गया और धीरे-धीरे उस हिस्से पर प्लाटिंग कर दी गई।
अमर उजाला ने उठाया मुद्दा, प्रधानमंत्री पोर्टल पर हुई थी शिकायत
करीब दो साल पहले जैन फार्म से आम के बाग को बिजनौर महायोजना में शामिल करने का मामला प्रधानमंत्री के पोर्टल तक पहुंचा था। एमडी कॉलेज ऑफ हायर एजूकेशन के प्रबंधक डॉ. विदित कुमार ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री के पोर्टल पर की थी। आरोप लगाया था कि बिजनौर विनियमित प्राधिकरण ने 2011 बिजनौर महायोजना में करीब 500 बीघा भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में सूचीबद्ध किया था। क्योंकि इस क्षेत्र में आम के करीब पांच हजार हरे पेड़ हैं। तब भी राजनीतिक प्रभाव के चलते यह पूरा खेल हुआ था। दो साल पहले रात भर में करीब 100 आम के हरे पेड़ काट दिए गए थे। अमर उजाला दो साल पहले बाग काटे जाने का मामला जोर शोर से उठाया था। उस वक्त तमाम लोग जुड़े थे। उनका कहना था कि शहर के बीच से आम का बाग नहीं कटने देंगे।
विवादों में घिरी है बाग में की जा रही प्लाटिंग
नगर में आम का बाग कटने के बाद प्लाटिंग की गई थी। महंगे दामों पर प्लाट पर बेचे गए थे। लेकिन यह पूरी प्लाटिंग विवादों में घिरी हुई है। बता दें कि भले ही जमीन की श्रेणी बदल दी गई, लेकिन मास्टर प्लान में भू उपयोग नहीं बदला है। पिछले दिनों कॉलोनी विकसित करने के मकसद से यहां बिजली के खंभे लगा दिए गए थे। जिन्हें एसडीएम ने उखड़वा दिया था। मामले में नोटिस भी जारी किए गए थे।
यहां जो प्लाटिंग हुई थी, उसमें बिजली के खंभे लगा दिए गए थे। जिन्हें उखड़वाया गया। नोटिस जारी किए गए थे। यहां कोई निर्माण नहीं हो सकता है, अगर निर्माण किया गया तो कार्रवाई की जाएगी - विक्रमादित्य सिंह मलिक, एसडीएम सदर
एनजीटी का आदेश मिला है, नियम देखे जा रहे हैं। हम आम के पेड़ काटने की अनुमति नहीं देते। रही बात वन स्वरूप घोषित करने को लेकर तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तो उसे पढ़ा जा रहा है। जो नियम होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी - अनिल पटेल, डीएफओ बिजनौर