{"_id":"5e6d241d8ebc3ea821030cd8","slug":"new-species-of-wheat-will-not-be-damaged-due-to-storm-hail-bijnor-news-mrt473627365","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंधी, ओलावृष्टि से नहीं होगा गेहूं की नई प्रजातियों को नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंधी, ओलावृष्टि से नहीं होगा गेहूं की नई प्रजातियों को नुकसान
विज्ञापन
नगीना क्षेत्र में खेत में खड़ी गेहूं डीबीडब्लू-187 प्रजाति की फसल।
- फोटो : BIJNOR
आंधी, ओलावृष्टि से नहीं होगा गेहूं की नई प्रजातियों को नुकसान
बिजनौर। आंधी के थपेड़ों व ओलावृष्टि के बीच गेहूं की डीबीडब्लू 187 व एचडी 3226 प्रजाति किसानों के उम्मीदों पर खरी उतरती दिख रही है। ट्रायल के तौर पर ये दोनों प्रजाति पहली बार जिले में बुवाई गई है। बंपर उत्पादन वाली ये प्रजाति अब तक तेज हवा में नहीं गिरी है। अगर फसल न गिरे तो ओलावृष्टि का भी उस पर अधिक असर नहीं होता है। अगले साल से इन दोनों गेहूं के बीज किसानों को बड़ी तादाद में दिए जाएंगे।
तेज हवा के साथ ओलावृष्टि व बारिश फसलों पर आफत बनकर बरस रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण गन्ने की बुवाई अभी तक ठप पड़ी है। फसल गिरने व ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, मटर आदि फसलों को बहुत नुकसान हो रहा है। इन फसलों में 20 से 30 प्रतिशत का नुकसान बताया जा रहा है। गेहूं की फसल में नुकसान से किसान परेशान हैं। कृषि वैज्ञानिक जब किसी फसल का ट्रायल करते हैं तो उत्पादन के साथ-साथ बाकी अन्य बातों का भी ध्यान रखा जाता है। इस समय में कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के कृषि वैज्ञानिक डीबीडब्लू 187 व एचडी 3226 प्रजाति के गेहूं का ट्रायल कर रहे हैं। ये दोनों प्रजाति बंपर उत्पादन देते हैं, लेकिन इनकी एक बड़ी खासियत यह है कि इनका पौधा तेज हवा के झोंकों को भी आसानी से सह लेता है और बाकी प्रजातियों के मुकाबले बहुत कम गिरता है। गेहूं की फसल गिरने पर अगर खेत में पानी भरा हो तो बाली गल जाती हैं, दाना पतला रह जाता है और ओलावृष्टि हो तो बाली पर ज्यादा हिस्से में ओला गिरने की संभावना रहती है। इन सभी कारणों से गेहूं का उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक गिर जाता है। अगर गेहूं की फसल न गिरे तो यह नुकसान नहीं होगा। कृषि वैज्ञानिकों ने धामपुर में हरीश राजपूत, नूरपुर में यदुवीर सिंह व नांगलजट में तेजेंद्र सिंह किसानों के यहां इन दोनों प्रजाति की फसल बुवाई थी। अब तक की बारिश व तेज हवा में फसल नहीं गिरी है। यानि बंपर उत्पादन देने वाली ये फसल किसानों को नुकसान नहीं होने देगी।
दोनों प्रजातियों का है बंपर उत्पादन
गेहूं शोध निदेशालय करनाल द्वारा गेहूं की प्रजाति डीबीडब्लू 187 व एचडी 3226 का बीज किसानों को देने की तैयारी की जा रही है। यह प्रजाति 84 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन देगी। सामान्य तौर पर जिले में प्रति बीघा गेहूं का औसत उत्पादन तीन क्विंटल तक रहता है। डीबीडब्लू प्रजाति प्रति बीघा में करीब सात क्विंटल तक का उत्पादन देगी।
विज्ञापन
नहीं गिरी फसल
कृषि वैज्ञानिक डा. केके सिंह के अनुसार अब तक के ट्रायल में दोनों प्रजाति का गेहूं नहीं गिरा है। यह गेहूं जिले के किसानों के मुनाफे का सौदा रहेगा। अगले साल इसका बीज किसानों को दिया जाएगा।
विज्ञापन
बिजनौर। आंधी के थपेड़ों व ओलावृष्टि के बीच गेहूं की डीबीडब्लू 187 व एचडी 3226 प्रजाति किसानों के उम्मीदों पर खरी उतरती दिख रही है। ट्रायल के तौर पर ये दोनों प्रजाति पहली बार जिले में बुवाई गई है। बंपर उत्पादन वाली ये प्रजाति अब तक तेज हवा में नहीं गिरी है। अगर फसल न गिरे तो ओलावृष्टि का भी उस पर अधिक असर नहीं होता है। अगले साल से इन दोनों गेहूं के बीज किसानों को बड़ी तादाद में दिए जाएंगे।
तेज हवा के साथ ओलावृष्टि व बारिश फसलों पर आफत बनकर बरस रहे हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण गन्ने की बुवाई अभी तक ठप पड़ी है। फसल गिरने व ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, मटर आदि फसलों को बहुत नुकसान हो रहा है। इन फसलों में 20 से 30 प्रतिशत का नुकसान बताया जा रहा है। गेहूं की फसल में नुकसान से किसान परेशान हैं। कृषि वैज्ञानिक जब किसी फसल का ट्रायल करते हैं तो उत्पादन के साथ-साथ बाकी अन्य बातों का भी ध्यान रखा जाता है। इस समय में कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के कृषि वैज्ञानिक डीबीडब्लू 187 व एचडी 3226 प्रजाति के गेहूं का ट्रायल कर रहे हैं। ये दोनों प्रजाति बंपर उत्पादन देते हैं, लेकिन इनकी एक बड़ी खासियत यह है कि इनका पौधा तेज हवा के झोंकों को भी आसानी से सह लेता है और बाकी प्रजातियों के मुकाबले बहुत कम गिरता है। गेहूं की फसल गिरने पर अगर खेत में पानी भरा हो तो बाली गल जाती हैं, दाना पतला रह जाता है और ओलावृष्टि हो तो बाली पर ज्यादा हिस्से में ओला गिरने की संभावना रहती है। इन सभी कारणों से गेहूं का उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक गिर जाता है। अगर गेहूं की फसल न गिरे तो यह नुकसान नहीं होगा। कृषि वैज्ञानिकों ने धामपुर में हरीश राजपूत, नूरपुर में यदुवीर सिंह व नांगलजट में तेजेंद्र सिंह किसानों के यहां इन दोनों प्रजाति की फसल बुवाई थी। अब तक की बारिश व तेज हवा में फसल नहीं गिरी है। यानि बंपर उत्पादन देने वाली ये फसल किसानों को नुकसान नहीं होने देगी।
विज्ञापन
दोनों प्रजातियों का है बंपर उत्पादन
गेहूं शोध निदेशालय करनाल द्वारा गेहूं की प्रजाति डीबीडब्लू 187 व एचडी 3226 का बीज किसानों को देने की तैयारी की जा रही है। यह प्रजाति 84 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन देगी। सामान्य तौर पर जिले में प्रति बीघा गेहूं का औसत उत्पादन तीन क्विंटल तक रहता है। डीबीडब्लू प्रजाति प्रति बीघा में करीब सात क्विंटल तक का उत्पादन देगी।
विज्ञापन
नहीं गिरी फसल
कृषि वैज्ञानिक डा. केके सिंह के अनुसार अब तक के ट्रायल में दोनों प्रजाति का गेहूं नहीं गिरा है। यह गेहूं जिले के किसानों के मुनाफे का सौदा रहेगा। अगले साल इसका बीज किसानों को दिया जाएगा।