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न जमीन न बजट, कागजों में फंसे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
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न जमीन न बजट, कागजों में फंसे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
बिजनौर। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए हैं। जिले में सत्र 2021-22 में 87 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण होना था। जिनमें से अधिकांश का काम बजट और जमीन उपलब्ध न होने की वजह से अधर में ही लटका हुआ है। इन सेंटरों का निर्माण साढे़ पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत में होना है, लेकिन बिना बजट और जमीन के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अभी फाइलों तक सीमित हैं।
जिले में कुल 267 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का निर्माण होना है। इनमें से 180 का निर्माण हो चुका है, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सिर्फ 136 सेंटरों पर कार्यरत हैं। 44 सेंटरों पर किसी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की तैनाती नहीं है। इसके साथ ही 87 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में से अधिकांश का निर्माण बजट और जमीन की वजह से रुका हुआ है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण पांच लाख 82 हजार रुपये की लागत से होना है। इनका निर्माण सिडको और पीसीसीडी संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है।
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने के लिए सिडको संस्था को 25 लाख रुपये और पीसीसीडी संस्था को एक करोड़ दस लाख रुपये दिए गए हैं। हालांकि 85 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण पांच करोड़ 63 लाख चालीस हजार रुपये की लागत से होना है। जबकि अभी तक कुल एक करोड़ 35 लाख रुपये ही दिए गए हैं। जिसकी वजह से अधिकांश हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का निर्माण कार्य रुका हुआ है। इन सेंटरों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर जीएनएम या बीएससी नर्सिंग को रखा जाता है। साथ ही इन सेंटरों पर हल्की बीमारी की दवाई, टीका आदि लगाए जाने की सुविधा दी जा रही है। इन सेंटरों के खोलने का मकसद ही गांवों में हल्की बीमारी का इलाज उपलब्ध कराना है।
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बजट आने पर निर्माण को दी जाएगी गति : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल ने बताया कि अभी स्वास्थ्य विभाग को बजट नहीं मिला है। जिसकी वजह से निर्माण कार्य और योजनाएं रुकी हुई हैं। जैसे ही बजट आता है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के निर्माण कार्य को गति दी जाएगी।
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बिजनौर। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए हैं। जिले में सत्र 2021-22 में 87 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण होना था। जिनमें से अधिकांश का काम बजट और जमीन उपलब्ध न होने की वजह से अधर में ही लटका हुआ है। इन सेंटरों का निर्माण साढे़ पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत में होना है, लेकिन बिना बजट और जमीन के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अभी फाइलों तक सीमित हैं।
जिले में कुल 267 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का निर्माण होना है। इनमें से 180 का निर्माण हो चुका है, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी सिर्फ 136 सेंटरों पर कार्यरत हैं। 44 सेंटरों पर किसी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की तैनाती नहीं है। इसके साथ ही 87 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में से अधिकांश का निर्माण बजट और जमीन की वजह से रुका हुआ है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण पांच लाख 82 हजार रुपये की लागत से होना है। इनका निर्माण सिडको और पीसीसीडी संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है।
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हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बनाने के लिए सिडको संस्था को 25 लाख रुपये और पीसीसीडी संस्था को एक करोड़ दस लाख रुपये दिए गए हैं। हालांकि 85 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निर्माण पांच करोड़ 63 लाख चालीस हजार रुपये की लागत से होना है। जबकि अभी तक कुल एक करोड़ 35 लाख रुपये ही दिए गए हैं। जिसकी वजह से अधिकांश हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का निर्माण कार्य रुका हुआ है। इन सेंटरों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर जीएनएम या बीएससी नर्सिंग को रखा जाता है। साथ ही इन सेंटरों पर हल्की बीमारी की दवाई, टीका आदि लगाए जाने की सुविधा दी जा रही है। इन सेंटरों के खोलने का मकसद ही गांवों में हल्की बीमारी का इलाज उपलब्ध कराना है।
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बजट आने पर निर्माण को दी जाएगी गति : सीएमओ
सीएमओ डॉ. विजय कुमार गोयल ने बताया कि अभी स्वास्थ्य विभाग को बजट नहीं मिला है। जिसकी वजह से निर्माण कार्य और योजनाएं रुकी हुई हैं। जैसे ही बजट आता है हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के निर्माण कार्य को गति दी जाएगी।