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गंगा में डूबे लोगों को एनडीआरएफ ने किया था रेस्क्यू
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गंगा में डूबे लोगों को एनडीआरएफ ने किया था रेस्क्यू
बिजनौर। बिजनौर जिले में एनडीआरफ की कोई ब्रांच तो नहीं है, लेकिन कोई बड़ा हादसा होने पर एनडीआरएफ टीम बाहर से आकर मदद करती रही है। दो साल पहले मंडावर क्षेत्र में गंगा में नाव डूबने से से बहे लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू किया था। मंडावर से लेकर बैराज तक कई दिन तक ये टीम गंगा को खंगालने में जुटी रही थी।
24 अगस्त 2018 को मंडावर क्षेत्र के खादर के गांव राजारामपुर के ग्रामीण गंगा पार से नाव में लौट रहे थे। नाव में महिलाओं समेत 28 लोग सवार थे। उस समय गंगा उफान पर भी थी। गांव चाहड़वाला के सामने गंगा की बीच धारा में एक लहर आने से नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव में सवार सभी लोग गंगा की तेज धारा में बह गए। कुछ किसान तैरकर बाहर निकल आए। गंगा में डूबे अधिकतर लोग किसी तरह तैरकर सात किलोमीटर दूर गांव रावली के पास बाहर आए। गंगा में डूबने वालों की तलाश में गोताखोरों व गांव वालों को लगाया गया। हरेवली के पास गंगा से जय सिंह की पत्नी नागिनी (45) का शव मिला था। सूबे सिंह, वेदपाल, मूलचंद, नेत्रपाल, ज्योति, रामवती, शारदा, झोरी, कमलेश, संतोष देवी, रामेंद्र, आकाश, सुशील, शीशपाल, सरोज, सोजवीर, जेहरी गंगा की धारा में बह गए थे। उन्हें निकाल लिया गया था। मीना, रिया, कुसुम, भूरिया, परवेश, अमिता, सुनीता समेत दस किसान लापता हो गए थे हैं। इनकी तलाश में कई दिन तक गंगा में अभियान चलाया गया। गाजियाबाद व मुरादाबाद से आई एनडीआरएफ की टीम ने कई दिन तक गंगा में डूबे लोगों की तलाश की थी। मंडावर से लेकर गंगा बैराज तक एनडीआरएफ की टीम गंगा को खंगालने में जुटी रही थी। रावली में भारी जमावड़ा लगा था। रावली के गंगा किनारे अफसरों के साथ एनडीआरएफ की टीम मौजूद रहती थी। टीम के कई सदस्य गंगा में रोज सवेरे मोटर वोट के साथ निकल जाते थे। रात के अंधेरे में ये गंगा से बाहर आते थे। रात दिन तक गंगा में डूबे लोगों की तलाश की गई।
हैलीकाप्टर तक से ढूंढे थे गंगा में डूबे लोग
गंगा में डूबे लोगों को गंगा में हैलीकाप्टर से भी ढूंढा गया था। कई दिन तक हैलीकाप्टर भी गांग के ऊपर मंडराते रहे थे। गंगा में डूबे पांच लोगों का तो आज तक कोई पता नहीं चला। उनके शव भी नहीं मिल पाए थे। पांच लोगों के शव गोताखोर, एनडीआरफ की टीम ने गंगा में ढूंढ कर निकाल लिए थे। कई दिन गंगा को रेस्क्यू करने के बाद एनडीआरफ की टीम लौट गई थी। गंगा में डूबे लोगों को ढूंढने के लिए गंगा का जल स्तर भी कम किया गया था।
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बिजनौर। बिजनौर जिले में एनडीआरफ की कोई ब्रांच तो नहीं है, लेकिन कोई बड़ा हादसा होने पर एनडीआरएफ टीम बाहर से आकर मदद करती रही है। दो साल पहले मंडावर क्षेत्र में गंगा में नाव डूबने से से बहे लोगों को बचाने के लिए एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू किया था। मंडावर से लेकर बैराज तक कई दिन तक ये टीम गंगा को खंगालने में जुटी रही थी।
24 अगस्त 2018 को मंडावर क्षेत्र के खादर के गांव राजारामपुर के ग्रामीण गंगा पार से नाव में लौट रहे थे। नाव में महिलाओं समेत 28 लोग सवार थे। उस समय गंगा उफान पर भी थी। गांव चाहड़वाला के सामने गंगा की बीच धारा में एक लहर आने से नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव में सवार सभी लोग गंगा की तेज धारा में बह गए। कुछ किसान तैरकर बाहर निकल आए। गंगा में डूबे अधिकतर लोग किसी तरह तैरकर सात किलोमीटर दूर गांव रावली के पास बाहर आए। गंगा में डूबने वालों की तलाश में गोताखोरों व गांव वालों को लगाया गया। हरेवली के पास गंगा से जय सिंह की पत्नी नागिनी (45) का शव मिला था। सूबे सिंह, वेदपाल, मूलचंद, नेत्रपाल, ज्योति, रामवती, शारदा, झोरी, कमलेश, संतोष देवी, रामेंद्र, आकाश, सुशील, शीशपाल, सरोज, सोजवीर, जेहरी गंगा की धारा में बह गए थे। उन्हें निकाल लिया गया था। मीना, रिया, कुसुम, भूरिया, परवेश, अमिता, सुनीता समेत दस किसान लापता हो गए थे हैं। इनकी तलाश में कई दिन तक गंगा में अभियान चलाया गया। गाजियाबाद व मुरादाबाद से आई एनडीआरएफ की टीम ने कई दिन तक गंगा में डूबे लोगों की तलाश की थी। मंडावर से लेकर गंगा बैराज तक एनडीआरएफ की टीम गंगा को खंगालने में जुटी रही थी। रावली में भारी जमावड़ा लगा था। रावली के गंगा किनारे अफसरों के साथ एनडीआरएफ की टीम मौजूद रहती थी। टीम के कई सदस्य गंगा में रोज सवेरे मोटर वोट के साथ निकल जाते थे। रात के अंधेरे में ये गंगा से बाहर आते थे। रात दिन तक गंगा में डूबे लोगों की तलाश की गई।
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हैलीकाप्टर तक से ढूंढे थे गंगा में डूबे लोग
गंगा में डूबे लोगों को गंगा में हैलीकाप्टर से भी ढूंढा गया था। कई दिन तक हैलीकाप्टर भी गांग के ऊपर मंडराते रहे थे। गंगा में डूबे पांच लोगों का तो आज तक कोई पता नहीं चला। उनके शव भी नहीं मिल पाए थे। पांच लोगों के शव गोताखोर, एनडीआरफ की टीम ने गंगा में ढूंढ कर निकाल लिए थे। कई दिन गंगा को रेस्क्यू करने के बाद एनडीआरफ की टीम लौट गई थी। गंगा में डूबे लोगों को ढूंढने के लिए गंगा का जल स्तर भी कम किया गया था।
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