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दिलों के तार जोड़ने का काम करती थी चिट्ठी

Wed, 31 Mar 2021 11:34 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 31 Mar 2021 11:34 PM IST
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Naveen Gupta, resident of village Shadipur
बिजनौर के ग्राम शादीपुर के नवनीत गुप्ता 62 साल पुरानी दिखाते चिट्ठी। - फोटो : BIJNOR
दिलों के तार जोड़ने का काम करती थी चिट्ठी
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बरूकी। आज के समय में संचार के तमाम साधन मौजूद हैं। मोबाइल फोन, ई मेल से लेकर फेसबुक, व्हाट्सअप और सोशल मीडिया के अनेकों प्लेटफार्म इंसान को एक दूसरे से जोड़ते हैं, लेकिन कुछ सालों पहले तक चिट्ठी और पत्र व्यवहार ही संचार का एकमात्र साधन था। गांव शादीपुर निवासी नवीन गुप्ता ने उनके घर आने वाली सैकड़ों चिट्ठियां आज भी सहेज कर रखी हैं। उनका मानना है कि आज के समय में संचार के साधन तो अनेक हैं लेकिन दिलों के तार जोड़ने का कार्य यह चिट्ठियां ही करती थीं।
देश में पहले डाकघर की स्थापना एक अप्रैल 1854 को हुई थी, लेकिन इसका केंद्रीकरण एक अक्टूबर 1854 को किया गया। उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा संचालित 701 डाकघरों को मिलाकर देश में डाक व्यवस्था शुरू की गई थी। देश की आजादी के बाद डाक विभाग हर घर से जुड़ गया और चिट्ठियां ही संचार का सबसे मजबूत साधन बन गईं। चिट्ठियां पाने की अपनी एक अलग खुशी होती थी। डाक के माध्यम से ही मनी ऑर्डर और तार जैसी सुविधाएं मिलती थीं। गांव शादीपुर निवासी नवनीत गुप्ता ने लगभग 62 साल पुरानी चिट्ठियां भी सहेज कर रखी हुई हैं। उनका कहना है कि चिट्ठियों में आज भी अपनापन है। आज के समय में संचार के दर्जनों साधन प्रचलित हैं। लेकिन जो अपनापन चिट्ठियों में होता था या जो खुशी चिट्ठियां पाने की होती थी, वह आज के संचार के साधन में नहीं हैं। उनके पास 1959 तक की चिट्ठियां सुरक्षित हैं।
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नवनीत गुप्ता बताते हैं कि उनके घर पर जो भी चिट्ठी आती थीं उसे एक तार में लगाकर रख दिया जाता था। धीरे-धीरे चिट्ठियां आनी कम हो गईं, तब उन्होंने तार से निकालकर उन चिट्ठियों को सुरक्षित रख लिया। नवनीत गुप्ता बताते हैं कि उनके पिता अमरोहा में रहकर पढ़ते थे। 1960 के दशक में उन्होंने काफी चिट्ठियां लिखकर घर पर भेजी थीं। आज उनके पिता इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके लिखे हुए वह पत्र आज भी उन्हें पिता के पास होने का एहसास दिलाते हैं। पिता की लिखी हुई बातें उन्हें संबल प्रदान करती हैं। उनके पास छ: पैसे से शुरू हुआ पोस्टकार्ड तक मौजूद है। उनके पास अंतर्देशीय पत्र, मनी ऑर्डर, सरकारी पावती रशीद तथा सैनिकों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले पत्र भी सुरक्षित रखे हैं। हालांकि कुछ पत्र गल गए हैं लेकिन उन्होंने इन्हें सहेज कर रखा है। उनका मानना है कि आज के समय में संचार के साधन तो अनेक हैं लेकिन दिलों के तार जोड़ने का कार्य यह चिट्ठियां ही करती थीं।
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