{"_id":"5422318b7ddf93c3e43dd1588e6983f6","slug":"narrow-streets-running-business-of-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संकरी गलियों में चला रहा मौत का धंधा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संकरी गलियों में चला रहा मौत का धंधा
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 17 Feb 2016 12:30 AM IST
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बिजनौर में कुटीर उद्योग के रूप में बड़े पैमाने पर आतिशबाजी का कारोबार जिले में धड़ल्ले से फलफूल रहा है। इस धंधे में सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया गया है। संकरी गली ओर मुहल्ला हादसों को भयावहता को बढ़ा रहे हैं। जब कोई बड़ी घटना होती है, तो प्रशासन की नींद टूटती है, फिर सब कुछ पहले की तरह चलता रहता है।
जिले में आतिशबाजी ने स्थायी कारोबार का रूप ले लिया है। शहर और कस्बों के मोहल्लों के गली-कूचों में आतिशबाजी निर्माण का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। इसमें पुरुष ही नहीं, बल्कि महिला व बच्चे भी जुटे रहते हैं। आतिशबाजी का कारोबार चलाने के लिए शासन के मानक तय है, लेकिन इनका पालन नहीं किया जा रहा। एक-एक लाइसेंस की आड़ में लाइसेंस धारक के दर्जनों परिजन व अन्य लोग इस धंधे में लिप्त है। जिले में आतिशबाजी विस्फोट की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। नहटौर में चार जनवरी 2013 में आतिशबाजी में आग लगने से पांच मौत हुई थी।
बिजनौर में 16 जुलाई 2015 में एक महिला की मौत हुई थी, लेकिन प्रशासन इसका स्थायी हल ढूंढने के बजाय तात्कालिक विकल्प के रूप में मामले की लीपापोती कर देता है। आतिशबाजी का धंधा घनी आबादी व संकरी गली मोहल्लों में संचालित है। घटना घटने के बाद इन मुहल्लों में बचाव के पर्याप्त साधन जुटा पाना संभव नहीं है। हादसे के बाद ऐसे स्थानों पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं पहुंच पाती और जानमाल का अधिक नुकसान होता है। हादसा विकराल रूप ले लेता है। आतिशबाजी के असुरक्षित कारणों से पड़ोसी मुहल्लों के लोग अधिकारियों को बताकर समस्या हल कराने की मांग करते रहते हैं, परंतु आज तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
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बारूद के ढेर पर है पूरा जिला
पूरा जिला आतिशबाजी के कारण बारूद के ढेर पर रखा है। कभी भी यह बारूद जिले में तबाही मचा सकता है। 14 जुलाई 2015 को बिजनौर के गांव बकली में पटाखे बनाते विस्फोट व पांच जनवरी 2014 को नहटौर में हुए विस्फोट से प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। बिजनौर में हुए विस्फोट में एक महिला की मौत हुई थी, जबकि नहटौर विस्फोट में दस झुलसे थे। अब चांदपुर में विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई। पूरा जिला बारूद के ढेर पर बैठा है। चांदपुर में जहां पर विस्फोट हुआ। वहां कई घरों में आतिशबाजी बनाने का कारोबार चलता है। बिजनौर का गांव बकली अौर बुखारा में तो यह काम खुले आम चल रहा है। यही हाल नहटौर, नजीबाबाद समेत जिले के अन्य शहरों का है। कही लाइसेंस धारक आतिशबाजी बना रहे है, तो अफसरों की सेटिंग से काम चल रहा है। घरों में भरा बारूद कभी भी तबाही कर सकता है।
दो वर्ष पहले भी पांच लोगों की हुई थी मौत
नहटौर में करीब दो वर्ष पूर्व मोहल्ला तीरग्रान में आतिशबाजी में हुए विस्फोट में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी। बारूद के इस कारोबार ने कई लोगों की जान छीन ली है।
घनी आबादी में इस कारोबार को किया जाता है। अधिकाश गरीब लोग इसके शिकार होते हैं। प्रशासन हादसा होने पर जागता है। इस मामले में शासन की ओर से इस परिवार को कोई मदद नहीं मिल सकी। हादसे का शिकार परिवार दो साल बाद भी अभी तक उभर नहीं सका है।
विगत चार जनवरी 2013 को मोहल्ला तीरग्रान में एक घर में आतिशबाजी बनाते समय अंगीठी से निकली चिंगारी से भयानक हादसा हो गया था। कई लोग बारूद की चपेट में आकर झुलस गए थे। मकान मालिक की पत्नी, पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री और पौत्र की मौत हो गई थी। बारूद का यह कारोबार नगर के कई मोहल्लों में होता हैं। इसमें गरीब परिवार के लोग रोजीरोटी के जुगाड़ में लगे रहते हैं। हादसा होने के बाद यह लोग प्रशासन की कार्रवाई के डर से किसी को बता भी नहीं पाते। चोरी छिपे उपचार कराते हैं और उपचार के अभाव में उनकी मौत हो जाती है। प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना रहता है। दीपावली के समय ही इस कारोबार से जुड़े लोगों की याद आती है।
चंद मिनट पहले ही निकले थे कुछ लोग
शादी के लिए यामीन के घर आतिशबाजी लेने आए स्याऊ के कई लोग आए थे। लोगों के अनुसार विस्फोट होने से पांच मिनट पहले ही ये लोग घर से बाहर निकले थे। वरना ये भी विस्फोट की चपेट में आ जाते। लोगों की माने, तो दिन भर यामीन के घर में आतिशबाजी के ग्राहकों का आना जाना लगा रहता था। यदि ग्राहक होते तो मरने अौर घायलों की संख्या काफी अधिक हो सकती थी।
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जिले में आतिशबाजी ने स्थायी कारोबार का रूप ले लिया है। शहर और कस्बों के मोहल्लों के गली-कूचों में आतिशबाजी निर्माण का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। इसमें पुरुष ही नहीं, बल्कि महिला व बच्चे भी जुटे रहते हैं। आतिशबाजी का कारोबार चलाने के लिए शासन के मानक तय है, लेकिन इनका पालन नहीं किया जा रहा। एक-एक लाइसेंस की आड़ में लाइसेंस धारक के दर्जनों परिजन व अन्य लोग इस धंधे में लिप्त है। जिले में आतिशबाजी विस्फोट की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। नहटौर में चार जनवरी 2013 में आतिशबाजी में आग लगने से पांच मौत हुई थी।
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बिजनौर में 16 जुलाई 2015 में एक महिला की मौत हुई थी, लेकिन प्रशासन इसका स्थायी हल ढूंढने के बजाय तात्कालिक विकल्प के रूप में मामले की लीपापोती कर देता है। आतिशबाजी का धंधा घनी आबादी व संकरी गली मोहल्लों में संचालित है। घटना घटने के बाद इन मुहल्लों में बचाव के पर्याप्त साधन जुटा पाना संभव नहीं है। हादसे के बाद ऐसे स्थानों पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं पहुंच पाती और जानमाल का अधिक नुकसान होता है। हादसा विकराल रूप ले लेता है। आतिशबाजी के असुरक्षित कारणों से पड़ोसी मुहल्लों के लोग अधिकारियों को बताकर समस्या हल कराने की मांग करते रहते हैं, परंतु आज तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
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बारूद के ढेर पर है पूरा जिला
पूरा जिला आतिशबाजी के कारण बारूद के ढेर पर रखा है। कभी भी यह बारूद जिले में तबाही मचा सकता है। 14 जुलाई 2015 को बिजनौर के गांव बकली में पटाखे बनाते विस्फोट व पांच जनवरी 2014 को नहटौर में हुए विस्फोट से प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। बिजनौर में हुए विस्फोट में एक महिला की मौत हुई थी, जबकि नहटौर विस्फोट में दस झुलसे थे। अब चांदपुर में विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई। पूरा जिला बारूद के ढेर पर बैठा है। चांदपुर में जहां पर विस्फोट हुआ। वहां कई घरों में आतिशबाजी बनाने का कारोबार चलता है। बिजनौर का गांव बकली अौर बुखारा में तो यह काम खुले आम चल रहा है। यही हाल नहटौर, नजीबाबाद समेत जिले के अन्य शहरों का है। कही लाइसेंस धारक आतिशबाजी बना रहे है, तो अफसरों की सेटिंग से काम चल रहा है। घरों में भरा बारूद कभी भी तबाही कर सकता है।
दो वर्ष पहले भी पांच लोगों की हुई थी मौत
नहटौर में करीब दो वर्ष पूर्व मोहल्ला तीरग्रान में आतिशबाजी में हुए विस्फोट में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी। बारूद के इस कारोबार ने कई लोगों की जान छीन ली है।
घनी आबादी में इस कारोबार को किया जाता है। अधिकाश गरीब लोग इसके शिकार होते हैं। प्रशासन हादसा होने पर जागता है। इस मामले में शासन की ओर से इस परिवार को कोई मदद नहीं मिल सकी। हादसे का शिकार परिवार दो साल बाद भी अभी तक उभर नहीं सका है।
विगत चार जनवरी 2013 को मोहल्ला तीरग्रान में एक घर में आतिशबाजी बनाते समय अंगीठी से निकली चिंगारी से भयानक हादसा हो गया था। कई लोग बारूद की चपेट में आकर झुलस गए थे। मकान मालिक की पत्नी, पुत्र, पुत्रवधू, पुत्री और पौत्र की मौत हो गई थी। बारूद का यह कारोबार नगर के कई मोहल्लों में होता हैं। इसमें गरीब परिवार के लोग रोजीरोटी के जुगाड़ में लगे रहते हैं। हादसा होने के बाद यह लोग प्रशासन की कार्रवाई के डर से किसी को बता भी नहीं पाते। चोरी छिपे उपचार कराते हैं और उपचार के अभाव में उनकी मौत हो जाती है। प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना रहता है। दीपावली के समय ही इस कारोबार से जुड़े लोगों की याद आती है।
चंद मिनट पहले ही निकले थे कुछ लोग
शादी के लिए यामीन के घर आतिशबाजी लेने आए स्याऊ के कई लोग आए थे। लोगों के अनुसार विस्फोट होने से पांच मिनट पहले ही ये लोग घर से बाहर निकले थे। वरना ये भी विस्फोट की चपेट में आ जाते। लोगों की माने, तो दिन भर यामीन के घर में आतिशबाजी के ग्राहकों का आना जाना लगा रहता था। यदि ग्राहक होते तो मरने अौर घायलों की संख्या काफी अधिक हो सकती थी।