हार-जीत की कयासबाजी जारी: चार जून को साफ होगी तस्वीर, नगीना हाॅट सीट पर उलझे समीकरण, वोटबैंक में हुई सेंधमारी
नगीना(सुरक्षित) हाॅट सीट पर अब तक हुए पहले तीन लोकसभा चुनाव में सपा, भाजपा और बसपा को जीत मिल चुकी है। इस सीट पर मुस्लिमों और दलितों का झुकाव ये तय करेगा कि आखिर विजेता काैन होगा। वहीं अभी तक सभी दल खुद की जीत पक्की बता रहे हैं।
विस्तार
आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के उतर जाने के बाद सुर्खियों में आई नगीना लोकसभा सीट के चुनावी परिणाम पर दिग्गज नेताओं की भी निगाहें लगी हुई हैं। 19 अप्रैल को हुए मतदान के दिन लगभग सभी पार्टियों के कोर वोटों में हुई सेंधमारी ने चुनावी समीकरण पूरी तरह गड़बड़ा दिए हैं। यही वजह है कि अब तक कोई भी राजनीतिक जानकार यहां चुनावी परिणाम के निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पा रहा है।
नगीना लोकसभा (सुरक्षित) सीट के चुनावी इतिहास को खंगालें तो मतदाताओं का मूड आज तक कोई भी सही से नहीं समझ पाया है। जनता ने अब तक इस सीट पर हुए तीन लोकसभा चुनाव में सपा-भाजपा-बसपा तीनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों को एक-एक बार जीत दिलाकर किसी को भी निराश नहीं किया है।
मुस्लिम व दलित बाहुल्य नगीना सीट पर हर बार इन दोनों वर्गों के मतदाताओं के मूड ने ही चुनाव परिणाम का रुख तय किया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम-दलित गठजोड़ के सहारे सपा-बसपा के गठबंधन प्रत्याशी गिरीश चंद भारी अंतर से जीत दर्ज करने में कामयाब हो गए थे।
आसपा ने उलझा दिए सभी पार्टियों के समीकरण
2024 के चुनाव में जहां भाजपा-सपा- बसपा के प्रत्याशी अलग-अलग चुनावी मैदान में लड़े तो आजाद समाज पार्टी ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर सभी के समीकरण गड़बड़ा दिए हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार के चुनाव में सभी दलों के कोर वोट बैंक में जमकर सेंधमारी हुई है।
एक तरफ जहां आजाद समाज पार्टी के नेता सपा व बसपा के मूल वोट बैंक में सेंधमारी करने के दावे के साथ अपनी जीत का दावा कर रहे है, वहीं सपा-इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी मनोज कुमार अपने मुस्लिम मूल वोटों की एकजुटता व बसपा के मूल वोट बैंक में सेंधमारी के सहारे जीत निश्चित बता रहे हैं। उधर, भाजपा प्रत्याशी सपा और बसपा के कोर वोट बैंक में जमकर बिखराव होने का दावा करते हुए अपनी जीत का दंभ भर रहे हैं।
नगीना सीट पर इस बार भी दलित व मुस्लिम का रुख ही चुनाव परिणाम को तय करने जा रहा है। यदि इन दोनों वर्गों के वोटों में बिखराव हुआ होगा तो इसका सीधा फायदा भाजपा को हो सकता है। यदि यह दोनों वर्ग के मतदाता पिछले चुनाव की तरह इस बार भी किसी एक पार्टी के पक्ष में एकजुटता से अपना मतदान करने में कामयाब हुए होंगे तो भाजपा के लिए नुकसान का सबब बन सकता है।
उधर, राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा पर अगर विश्वास करें तो आसपा के आने से इस बार के चुनाव में नगीना सीट पर सबसे ज्यादा नुकसान बसपा को हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नगीना की जनता पुराने इतिहास पर ही कायम रहती है या कुछ नया गुल खिलाएगी।
इस बार मतदान प्रतिशत रहा कम
नगीना लोकसभा चुनाव में इस बार पिछले दो चुनाव के मुकाबले मतदान प्रतिशत कम रहना भी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को चिंता में डाल रहा है। 2014 के चुनाव में नगीना के मतदाताओं ने 63.27 प्रतिशत मतदान किया तो 2019 में यह बढ़कर 63.53 प्रतिशत हो गया था। इस बार 2024 के चुनाव में मतदान प्रतिशत मात्र 59.54 प्रतिशत रहा। यह पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले 3.99 प्रतिशत कम रहा।
नगीना लोकसभा सीट पर जातिगत मतदाताओं की स्थिति
मुस्लिम- लगभग 41 प्रतिशत
दलित - लगभग 23 प्रतिशत
चौहान/राजपूत- लगभग सात प्रतिशत
जाट- लगभग सात प्रतिशत
सैनी- लगभग सात प्रतिशत
ब्राह्मण व अन्य स्वर्ण जाति- लगभग 15 प्रतिशत।