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‘अफसोस तो ये है यहां भाई बंट गए’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Dec 2016 12:02 AM IST
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वरिष्ठ शायर जफर रहमानी को सम्मानित करते स्थानीय कवि एवं शायर।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद। गरीबों के निवाले में हिस्सा मांगता है तू/तेरी फितरत तो मेरे गांव के प्रधान जैसी है... सरीखे दिल को छू लेने वाली रचनाओं से कवियों और शायरों ने भावविभोर किया। वरिष्ठ शायर जफर रहमानी को उर्दू अदब खिदमत के लिए शकील रहमानी एवार्ड से नवाजा गया।
अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू की ओर से पारस पब्लिक स्कूल में कवि सम्मेलन और मुशायरा आयोजित किया गया। हाफिज शादाब ने नात-ए-पाक से मुशायरे का आगाज किया। शायर तय्यब जमाल ने फरमाया-हमें मकान के बंटने का गम नहीं, अफसोस तो ये है यहां भाई बंट गए..., मुजक्किर नजीबाबादी ने हर शब ए हयात में मां-बाप की दुआ, रंजो अलम से मुझको बचाती चली गई..., बेगराज यादव ने जिंदगी की रौनकें बस दोस्तों से दोस्त है, हर एक दोस्त ही गद्दार हो ऐसा नहीं होता..., सलीम मुल्तानी ने गरीबों के निवाले में हिस्सा मांगता है तू, तेरी फितरत तो मेरे गांव के प्रधान जैसी है... कलाम पेश कर झकझोरा।
शादाब जफर शादाब ने ये कैसे लोग हैं शादाब ये कैसा जमाना है, जिसे भी देखिए बस नोट के पीछे दीवाना है..., प्रमोद प्रेम ने क्या है तन पर अगर उजाला है, मन तो काला है, दिल भी काला है..., अख्तर मुल्तानी ने जरा आप ये सोचें मुझे क्या खुशी मिलेगी, ये जवान होते बच्चे जो नजर बदल रहे हैं... कलाम पर खूब वाहवाही लूटी।
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वहीजुद्दीन, सुहेल शहाब शम्सी, नौशाद शाद, फरहत जमा खां, कुमुद कुमार ने भी कलाम पेश किए। कार्यक्रम में वरिष्ठ शायर जफर रहमानी को शकील रहमानी एवार्ड प्रदान किया गया। वसीम राजा, नबीहा फात्मा, हाफिज शादाब, रईस साइम, शिहाब अंसारी, तसलीम एडवोकेट, फहीम अहमद, अंजुम आदि मौजूद रहे।
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अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू की ओर से पारस पब्लिक स्कूल में कवि सम्मेलन और मुशायरा आयोजित किया गया। हाफिज शादाब ने नात-ए-पाक से मुशायरे का आगाज किया। शायर तय्यब जमाल ने फरमाया-हमें मकान के बंटने का गम नहीं, अफसोस तो ये है यहां भाई बंट गए..., मुजक्किर नजीबाबादी ने हर शब ए हयात में मां-बाप की दुआ, रंजो अलम से मुझको बचाती चली गई..., बेगराज यादव ने जिंदगी की रौनकें बस दोस्तों से दोस्त है, हर एक दोस्त ही गद्दार हो ऐसा नहीं होता..., सलीम मुल्तानी ने गरीबों के निवाले में हिस्सा मांगता है तू, तेरी फितरत तो मेरे गांव के प्रधान जैसी है... कलाम पेश कर झकझोरा।
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शादाब जफर शादाब ने ये कैसे लोग हैं शादाब ये कैसा जमाना है, जिसे भी देखिए बस नोट के पीछे दीवाना है..., प्रमोद प्रेम ने क्या है तन पर अगर उजाला है, मन तो काला है, दिल भी काला है..., अख्तर मुल्तानी ने जरा आप ये सोचें मुझे क्या खुशी मिलेगी, ये जवान होते बच्चे जो नजर बदल रहे हैं... कलाम पर खूब वाहवाही लूटी।
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वहीजुद्दीन, सुहेल शहाब शम्सी, नौशाद शाद, फरहत जमा खां, कुमुद कुमार ने भी कलाम पेश किए। कार्यक्रम में वरिष्ठ शायर जफर रहमानी को शकील रहमानी एवार्ड प्रदान किया गया। वसीम राजा, नबीहा फात्मा, हाफिज शादाब, रईस साइम, शिहाब अंसारी, तसलीम एडवोकेट, फहीम अहमद, अंजुम आदि मौजूद रहे।