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2014 की चुनावी सभा के बाद बिजनौर नहीं आ सके मुलायम सिंह
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2014 की चुनावी सभा के बाद बिजनौर नहीं आए मुलायम सिंह
बिजनौर। मुलायम सिंह यादव 2014 के लोकसभा चुनाव में आखिरी बार बिजनौर आए थे। इससे दो साल पहले 2012 में भी विधानसभा चुनाव की सभा में पहुंचे थे। 2012 में मतदान से तीन दिन पहले नुमाइश ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित किया। उस वक्त मुलायम सिंह यादव बिजनौर की जगह मुरादाबाद बोल गए थे।
सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन बताते हैं कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह यादव पहुंचे थे। उन्होंने नुमाइश ग्राउंड में सभा को संबोधित किया था। इसस पहले साल 2012 के विधानसभा चुनाव की जनसभा नुमाइश ग्राउंड में हुई थी। जिसके मंच पर बिजनौर की आठों विधानसभा सीटों के प्रत्याशी मौजूद थे। मुरादाबाद के बाद बिजनौर में सभा हुई थी और फिर संभल में। मुलायम सिंह यादव ने बिजनौर से अपने रिश्तों को दोहराते हुए वोट मांगे थे, लेकिन वह प्रत्याशियों के लिए अपील करना भूल गए।
बिजनौर सदर सीट से प्रत्याशी बनी रुचि वीरा ने मुलायम सिंह यादव को इसकी याद दिलाई। जिस पर मुलायम सिंह यादव ने दोबारा माइक पकड़ा। जिसके बाद जनसभा में प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताने की अपील की लेकिन, इस बार वह बिजनौर के बजाये हमारे मुरादाबाद के प्रत्याशियों बोल गए। दोबारा टोकने पर उन्होंने माइक पर ही कह दिया था कि हां, अब बिजनौर चलेंगे। साल 2014 के बाद उन्हें बिजनौर आने का मौका नहीं मिल पाया।
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खास हुआ करते थे स्व. नेपाल सिंह आर्य
बिजनौर के रहने वाले स्व. नेपाल सिंह आर्य सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खास रहे हैं। तीन से चार बार नेपाल सिंह आर्य के घर भी आए। नेेेपाल सिंह आर्य गन्ना बीज विकास निगम के चेयरमैन भी रहे हैं। नेपाल सिंह आर्य के बेटे विजयदीप बबलू बताते हैं कि उनके पिता तीन बार जिलाध्यक्ष रहे हैं। उनके पिता की साल 1985 में चौधरी चरण सिंह के यहां दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात हुई थी।
विधायक रामस्वरुप की ईमानदारी से प्रभावित थे मुलायम सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की नजीबाबाद से चुनावी यादें जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2002 में माकपा नेता मास्टर रामस्वरुप सिंह और 2007 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव विधायक रामस्वरुप की मृत्यु के बाद उनके बेटे राजकुमार की चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। मुलायम सिंह यादव विधायक रामस्वरुप की सादगी और ईमानदारी से इतने प्रभावित थे कि वर्ष 2002 के चुनाव में उन्होंने मास्टर रामस्वरुप सिंह को चुनाव प्रचार की न केवल स्वयं टोकन मनी दी, बल्कि उन्होंने जनसमूह से आश्वासन लिया कि उन्हें रामस्वरुप की जीत की खबर चाहिए। भरपूर समर्थन मिला और रामस्वरुप सपा गठबंधन से तीसरी बार विधायक बने।
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बिजनौर। मुलायम सिंह यादव 2014 के लोकसभा चुनाव में आखिरी बार बिजनौर आए थे। इससे दो साल पहले 2012 में भी विधानसभा चुनाव की सभा में पहुंचे थे। 2012 में मतदान से तीन दिन पहले नुमाइश ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित किया। उस वक्त मुलायम सिंह यादव बिजनौर की जगह मुरादाबाद बोल गए थे।
सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन बताते हैं कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह यादव पहुंचे थे। उन्होंने नुमाइश ग्राउंड में सभा को संबोधित किया था। इसस पहले साल 2012 के विधानसभा चुनाव की जनसभा नुमाइश ग्राउंड में हुई थी। जिसके मंच पर बिजनौर की आठों विधानसभा सीटों के प्रत्याशी मौजूद थे। मुरादाबाद के बाद बिजनौर में सभा हुई थी और फिर संभल में। मुलायम सिंह यादव ने बिजनौर से अपने रिश्तों को दोहराते हुए वोट मांगे थे, लेकिन वह प्रत्याशियों के लिए अपील करना भूल गए।
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बिजनौर सदर सीट से प्रत्याशी बनी रुचि वीरा ने मुलायम सिंह यादव को इसकी याद दिलाई। जिस पर मुलायम सिंह यादव ने दोबारा माइक पकड़ा। जिसके बाद जनसभा में प्रत्याशियों को भारी मतों से जिताने की अपील की लेकिन, इस बार वह बिजनौर के बजाये हमारे मुरादाबाद के प्रत्याशियों बोल गए। दोबारा टोकने पर उन्होंने माइक पर ही कह दिया था कि हां, अब बिजनौर चलेंगे। साल 2014 के बाद उन्हें बिजनौर आने का मौका नहीं मिल पाया।
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खास हुआ करते थे स्व. नेपाल सिंह आर्य
बिजनौर के रहने वाले स्व. नेपाल सिंह आर्य सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खास रहे हैं। तीन से चार बार नेपाल सिंह आर्य के घर भी आए। नेेेपाल सिंह आर्य गन्ना बीज विकास निगम के चेयरमैन भी रहे हैं। नेपाल सिंह आर्य के बेटे विजयदीप बबलू बताते हैं कि उनके पिता तीन बार जिलाध्यक्ष रहे हैं। उनके पिता की साल 1985 में चौधरी चरण सिंह के यहां दिल्ली में मुलायम सिंह यादव से मुलाकात हुई थी।
विधायक रामस्वरुप की ईमानदारी से प्रभावित थे मुलायम सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की नजीबाबाद से चुनावी यादें जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2002 में माकपा नेता मास्टर रामस्वरुप सिंह और 2007 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव विधायक रामस्वरुप की मृत्यु के बाद उनके बेटे राजकुमार की चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। मुलायम सिंह यादव विधायक रामस्वरुप की सादगी और ईमानदारी से इतने प्रभावित थे कि वर्ष 2002 के चुनाव में उन्होंने मास्टर रामस्वरुप सिंह को चुनाव प्रचार की न केवल स्वयं टोकन मनी दी, बल्कि उन्होंने जनसमूह से आश्वासन लिया कि उन्हें रामस्वरुप की जीत की खबर चाहिए। भरपूर समर्थन मिला और रामस्वरुप सपा गठबंधन से तीसरी बार विधायक बने।