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Bijnor News: सांसद ने की निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग
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नगीना। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर निजी स्कूलों की मनमानी, महंगी किताबों, यूनिफॉर्म व आरटीई के उल्लंघन के मामले में कार्रवाई की मांग की है।
सांसद ने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों में अभिभावकों के आर्थिक शोषण की अनेक शिकायतें सामने आ रहीं हैं। कई निजी विद्यालयों द्वारा एडमिशन फीस, महंगी किताबें, कॉपी, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। अधिकांश स्कूल अभिभावकों को कुछ तय दुकान/बुक स्टोर से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जहां पूरा सेट एक साथ महंगे दामों पर बेचा जाता है। कई मामलों में किताबों का विधिवत बिल भी नहीं दिया जाता, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय है कि कक्षा एक में भी लगभग 14 किताबों का पाठ्यक्रम रखा गया है, जिससे किताबों का पूरा सेट तीन से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता है। अन्य कक्षाओं में यह खर्च छह से सात हजार रुपये या उससे अधिक हो जाता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कई कक्षाओं की किताबों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है। कई निजी स्कूल हर वर्ष पाठ्यक्रम और किताबों के नए संस्करण लागू कर देते हैं, जिससे पुरानी किताबें दोबारा उपयोग में नहीं आ पातीं। इसके अतिरिक्त आरटीई के तहत कई निजी स्कूलों द्वारा प्रवेश देने में आनाकानी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
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सांसद ने पत्र में कहा है कि उत्तर प्रदेश में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों में अभिभावकों के आर्थिक शोषण की अनेक शिकायतें सामने आ रहीं हैं। कई निजी विद्यालयों द्वारा एडमिशन फीस, महंगी किताबें, कॉपी, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। अधिकांश स्कूल अभिभावकों को कुछ तय दुकान/बुक स्टोर से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जहां पूरा सेट एक साथ महंगे दामों पर बेचा जाता है। कई मामलों में किताबों का विधिवत बिल भी नहीं दिया जाता, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
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अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय है कि कक्षा एक में भी लगभग 14 किताबों का पाठ्यक्रम रखा गया है, जिससे किताबों का पूरा सेट तीन से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता है। अन्य कक्षाओं में यह खर्च छह से सात हजार रुपये या उससे अधिक हो जाता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कई कक्षाओं की किताबों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है। कई निजी स्कूल हर वर्ष पाठ्यक्रम और किताबों के नए संस्करण लागू कर देते हैं, जिससे पुरानी किताबें दोबारा उपयोग में नहीं आ पातीं। इसके अतिरिक्त आरटीई के तहत कई निजी स्कूलों द्वारा प्रवेश देने में आनाकानी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
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