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Bijnor News: चीनी के बढ़ते दामों पर सांसद चंद्रशेखर ने उठाए सवाल
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नगीना। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख व नगीना सांसद चंद्रशेखर ने पिछले 17 दिनों में चीनी के दामों में हुई लगातार वृद्धि पर सरकार को जमकर घेरा है। सोशल साइट एक्स पर की गई पोस्ट में सांसद ने लिखा है कि 17 दिन में चीनी 19 रुपये महंगी होकर फुटकर बाजार में 65 रुपये और थोक में 60 रुपये प्रति किलो पहुंच गई।
चाय दुकानदार, मिठाई कारोबारी और सबसे बढ़कर आम उपभोक्ता इसकी मार झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त को उन्होंने सवाल उठाया था कि ई-20 नीति के तहत गन्ने और मक्के जैसी फसलों को ‘खाद्य से ईंधन’ की दिशा में मोड़ने का असर देश की खाद्य सुरक्षा और चीनी की कीमतों पर क्या पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अब करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर उत्पादन एथेनॉल की ओर डायवर्ट होने की बात सामने आ रही है। कच्चे तेल के आयात और विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने के लिए ई-20 नीति लाई गई है, लेकिन भारत आयातित कच्चे तेल का उपभोग केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए नहीं करता, बल्कि उसे रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है।
कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रिफाइनिंग के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में निर्यात किया जाता है। जब भारत आयातित कच्चे तेल को रिफाइन करके निर्यात कर विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है, तो ई-20 के लक्ष्य पूरे करने के लिए गन्ने और मक्के जैसी खाद्य फसलों को एथेनॉल की ओर मोड़ने की कीमत देश की खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ता को क्यों चुकानी पड़े? इसका असर अब चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दिख रहा है और हालात चीनी आयात करने की नौबत तक पहुंच गए हैं। उन्होंने मांग कि सरकार ई-20 नीति की व्यापक समीक्षा करे और चीनी के बढ़ते दामों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाए।
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चाय दुकानदार, मिठाई कारोबारी और सबसे बढ़कर आम उपभोक्ता इसकी मार झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त को उन्होंने सवाल उठाया था कि ई-20 नीति के तहत गन्ने और मक्के जैसी फसलों को ‘खाद्य से ईंधन’ की दिशा में मोड़ने का असर देश की खाद्य सुरक्षा और चीनी की कीमतों पर क्या पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अब करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर उत्पादन एथेनॉल की ओर डायवर्ट होने की बात सामने आ रही है। कच्चे तेल के आयात और विदेशी मुद्रा के दबाव को कम करने के लिए ई-20 नीति लाई गई है, लेकिन भारत आयातित कच्चे तेल का उपभोग केवल घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए नहीं करता, बल्कि उसे रिफाइन करके पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है।
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कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रिफाइनिंग के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में निर्यात किया जाता है। जब भारत आयातित कच्चे तेल को रिफाइन करके निर्यात कर विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है, तो ई-20 के लक्ष्य पूरे करने के लिए गन्ने और मक्के जैसी खाद्य फसलों को एथेनॉल की ओर मोड़ने की कीमत देश की खाद्य सुरक्षा और आम उपभोक्ता को क्यों चुकानी पड़े? इसका असर अब चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दिख रहा है और हालात चीनी आयात करने की नौबत तक पहुंच गए हैं। उन्होंने मांग कि सरकार ई-20 नीति की व्यापक समीक्षा करे और चीनी के बढ़ते दामों पर तत्काल प्रभावी कदम उठाए।
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