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Bijnor News: विधायक ने उठाए कोऑपरेटिव बैंक के बोर्ड पर सवाल
Sun, 05 Mar 2023 12:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 05 Mar 2023 12:02 AM IST
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बिजनौर। दी अरबन कोऑपरेटिव बैंक का मामला अब राजनीति तूल भी पकड़ने लगा है। जहां सदर विधायक ने पुराने मामलों की जांच कराने की मांग करते हुए बोर्ड पर ही सवाल उठा दिए। वहीं दूसरा पक्ष इसे राजनीति षड़यंत्र बता रहा है। एक दिन पहले ही बैंक के सचिव शंकर लाल को पद से हटा दिया गया था और उनकी हस्ताक्षर मान्यता समाप्त कर दी गई थी।
बिजनौर का दी अरबन कोऑपरेटिव बैंक एक बार फिर विवादों में हैं। सदर विधायक सुची चौधरी ने कहा कि सन 2016 में डॉक्टर सीमा चौधरी जोकि बैंक के चेयरमैन थीं, उनके द्वारा समिति का गठन किया गया। इस समिति में वह थी, सदस्य बैंक डायरेक्टर अनवर उल रहमान एवं बैंक डायरेक्टर अजय कुमार गुप्ता और सचिव शंकरलाल थे। आरोप लगाया कि सभी ने बैंक की संचालन बैठक में एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें सरकार की एकमुश्त योजना का लाभ उन खातेदारों को दिया गया, जिन पर लंबे समय से बैंक का ऋण बकाया था।
जिन लोगों को इस योजना का लाभ दिया गया। उसमें स्वयं बैंक के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान डायरेक्टर की कंपनी कोनकोरण इंजीनियर भी शामिल थे। सदर विधायक ने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार बैंक का कोई भी सदस्य एवं चेयरमैन इस योजना का लाभ स्वयं नहीं ले सकते, परंतु नियमों का उल्लंघन हुआ है। वहीं बैंक सचिव शंकर लाल इस कार्रवाई को पहले ही गलत बता चुके हैं।
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उधर इस संबंध बोर्ड में शामिल रहे लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जो भी हुआ था, वह नियमों के तहत ही हुआ है। सभी बैंक रिजर्व बैंक के अधीन हैं। हर साल ऑडिट होता है। कुछ भी गलत नहीं किया गया।
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बिजनौर का दी अरबन कोऑपरेटिव बैंक एक बार फिर विवादों में हैं। सदर विधायक सुची चौधरी ने कहा कि सन 2016 में डॉक्टर सीमा चौधरी जोकि बैंक के चेयरमैन थीं, उनके द्वारा समिति का गठन किया गया। इस समिति में वह थी, सदस्य बैंक डायरेक्टर अनवर उल रहमान एवं बैंक डायरेक्टर अजय कुमार गुप्ता और सचिव शंकरलाल थे। आरोप लगाया कि सभी ने बैंक की संचालन बैठक में एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें सरकार की एकमुश्त योजना का लाभ उन खातेदारों को दिया गया, जिन पर लंबे समय से बैंक का ऋण बकाया था।
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जिन लोगों को इस योजना का लाभ दिया गया। उसमें स्वयं बैंक के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान डायरेक्टर की कंपनी कोनकोरण इंजीनियर भी शामिल थे। सदर विधायक ने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार बैंक का कोई भी सदस्य एवं चेयरमैन इस योजना का लाभ स्वयं नहीं ले सकते, परंतु नियमों का उल्लंघन हुआ है। वहीं बैंक सचिव शंकर लाल इस कार्रवाई को पहले ही गलत बता चुके हैं।
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उधर इस संबंध बोर्ड में शामिल रहे लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जो भी हुआ था, वह नियमों के तहत ही हुआ है। सभी बैंक रिजर्व बैंक के अधीन हैं। हर साल ऑडिट होता है। कुछ भी गलत नहीं किया गया।