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मिलों के गोदाम भरे, खुले में रखी जा रही चीनी
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बिजनौर में बहादरपुर चीनी मिल में खुले में रखी जा रही चीनी।
- फोटो : BIJNOR
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मिलों के गोदाम भरे, खुले में रखी जा रही चीनी
बिजनौर। लॉकडाउन की वजह से चीनी मिलों की हालत खराब होने लगी है। चीनी का उठान नहीं हो पा रहा है। मिलों के गोदामों में चीनी रखने की जगह नहीं बची है। मिलें अपनी चीनी खुले में रखने को मजबूर हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि मिलों को चीनी खुले में रखनी पड़ रही है। मिलें शासन से चीनी उठान के लिए व्यवस्था कराने की मांग कर रही हैं।
गन्ने का रकबा, पैदावार और चीनी रिकवरी हर साल बढ़ती जा रही है। रिकवरी बढ़ी तो बाजार में चीनी की आवक भी बढ़ गई। तब मिलों ने चीनी के उत्पादन को कम कर गन्ने के रस से बी हैवी मोलाइसिस बनाना शुरू किया। साथ ही रॉ शुगर बनाकर विदेशों को चीनी निर्यात की। मिलों में चीनी का उत्पादन तो कम कर दिया लेकिन अब लॉकडाउन ने अब मिलों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। लॉकडाउन में चीनी का उठान बंद है। चीनी मिलों के गोदाम चीनी के बोरों से भर गए हैं। मिलों को पहली बार खुले में चीनी रखनी पड़ रही है। बहादरपुर व स्योहारा चीनी मिल खुले में ईंट रखकर उन पर चीनी के बोरे रख रहे हैं और ऊपर से पॉलिथीन ढक रहे हैं। बगास रखने के लिए भी जगह नहीं बची है। चांदपुर चीनी मिल में छह दिन और बिलाई चीनी मिल में चार दिन के उत्पादन के बराबर चीनी रखने की ही जगह रह गई है।
किस चीनी मिमल में कितना स्टॉक
चीनी मिल चीनी शीरा
धामपुर 17.26 9.02
स्योहारा 16.63 7.17
बिलाई 13.09 4.44
बहादरपुर 10.95 3.03
बरकातपुर 10.87 4.77
बुुंदकी 10.81 4.14
चांदपुर 5.26 1.99
बिजनौर 3.41 1.29
नजीबाबाद 4.48 1.44
कुल 92.76 37.29
नोट : चीनी और शीरे के आंकड़े लाख क्विंटल में हैं।
चीनी की रैक भिजवाने की कोशिश
बहादरपुर चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक एसपी सिंह के अनुसार चीनी खुले में रखनी पड़ रही है। गोदाम में चीनी रखने के लिए जगह नहीं है। चीनी की रैक भिजवाने की कोशिश की जा रही है।
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बिजनौर। लॉकडाउन की वजह से चीनी मिलों की हालत खराब होने लगी है। चीनी का उठान नहीं हो पा रहा है। मिलों के गोदामों में चीनी रखने की जगह नहीं बची है। मिलें अपनी चीनी खुले में रखने को मजबूर हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि मिलों को चीनी खुले में रखनी पड़ रही है। मिलें शासन से चीनी उठान के लिए व्यवस्था कराने की मांग कर रही हैं।
गन्ने का रकबा, पैदावार और चीनी रिकवरी हर साल बढ़ती जा रही है। रिकवरी बढ़ी तो बाजार में चीनी की आवक भी बढ़ गई। तब मिलों ने चीनी के उत्पादन को कम कर गन्ने के रस से बी हैवी मोलाइसिस बनाना शुरू किया। साथ ही रॉ शुगर बनाकर विदेशों को चीनी निर्यात की। मिलों में चीनी का उत्पादन तो कम कर दिया लेकिन अब लॉकडाउन ने अब मिलों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। लॉकडाउन में चीनी का उठान बंद है। चीनी मिलों के गोदाम चीनी के बोरों से भर गए हैं। मिलों को पहली बार खुले में चीनी रखनी पड़ रही है। बहादरपुर व स्योहारा चीनी मिल खुले में ईंट रखकर उन पर चीनी के बोरे रख रहे हैं और ऊपर से पॉलिथीन ढक रहे हैं। बगास रखने के लिए भी जगह नहीं बची है। चांदपुर चीनी मिल में छह दिन और बिलाई चीनी मिल में चार दिन के उत्पादन के बराबर चीनी रखने की ही जगह रह गई है।
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किस चीनी मिमल में कितना स्टॉक
चीनी मिल चीनी शीरा
धामपुर 17.26 9.02
स्योहारा 16.63 7.17
बिलाई 13.09 4.44
बहादरपुर 10.95 3.03
बरकातपुर 10.87 4.77
बुुंदकी 10.81 4.14
चांदपुर 5.26 1.99
बिजनौर 3.41 1.29
नजीबाबाद 4.48 1.44
कुल 92.76 37.29
नोट : चीनी और शीरे के आंकड़े लाख क्विंटल में हैं।
चीनी की रैक भिजवाने की कोशिश
बहादरपुर चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक एसपी सिंह के अनुसार चीनी खुले में रखनी पड़ रही है। गोदाम में चीनी रखने के लिए जगह नहीं है। चीनी की रैक भिजवाने की कोशिश की जा रही है।
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