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मां का कुपोषण भी बच्चों को कर रहा कुपोषित
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मां का कुपोषण भी बच्चों को कर रहा कुपोषित
बिजनौर। कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को पहली सीढ़ी से ही ग्रहण लग रहा है। गर्भवती महिलाएं ही कुपोषित हो रही हैं। सही खानपान न होने की वजह से उनके खून की मात्रा कम है। हालांकि कुपोषण को खत्म भी किया जा रहा है लेकिन यह कुपोषण विरासत में बच्चों में भी जा सकता है। ऐसी महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जा रही है।
केंद्र व प्रदेश सरकार कुपोषण को खत्म करने के लिए बड़े अभियान चला रही है। गर्भवती महिलाओं और छह साल तक के बच्चों में कुपोषण की जांच के लिए हर महीने आंगनबाड़ी व आशा महिलाओं के स्वास्थ्य की तय मानकों के अनुसार जांच करती हैं। जांच में हर महीने करीब पांच हजार बच्चे कुपोषण का शिकार मिलते हैं, लेकिन हालांकि आबादी के हिसाब से यह संख्या करीब एक प्रतिशत ही बैठती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं में अलग स्थिति देखने को मिल रही है। हर महीने करीब 15 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार मिलती हैं। इनके कुपोषण का पता चलते ही स्वास्थ्य में सुधार की कवायद शुरू कर दी जाती है। कुपोषण को खत्म करने के लिए महिलाओं को उचित खानपान की सलाह दी जाती है। अगर इन गर्भवती महिलाओं से कुपोषण का दंश नहीं मिट पाता है तो इनके बच्चों के भी कुपोषित होने की पूरी पूरी संभावना रहती है।
ब्लॉक गर्भवती महिलाएं कुपोषित महिलाएं
चंदक 3601 399
हल्दौर 2441 289
नहटौर 2926 1155
धामपुर 3374 1047
स्योहारा 3413 115
कासमपुर गढ़ी 3116 1359
कोतवाली 4548 700
किरतपुर 3373 331
नजीबाबाद 6122 586
नूरपुर 4488 154
जलीलपुर 3669 464
बिजनौर पीपीसी 1316 00
धामपुर पीपीसी 763 375
नगीना पीपीसी 1703 47
योग 44853 7021
नोट:आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से लिए गए हैं।
मौसमी फल और हरी सब्जी फायदेमंद
महिलाएं खानपान का ध्यान रखकर कुपोषण से मुक्ति पा सकती हैं। उन्हें खुराक में हरी सब्जी, मौसमी फल व आयरन वाले तत्व लेने चाहिएं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी इन महिलाओं को आयरन की गोली दी जाती हैं। खून की कमी ज्यादा होने पर आयरन और सुक्रोज चढ़ाए जाते हैं।
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रख रहे हैं ध्यान
एसीएमओ डा.आरके गुप्ता के अनुसार गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हर महीने हजारों गर्भवती महिलाओं से कुपोषण खत्म भी किया जा रहा है। महिलाओं से खानपान का ध्यान रखने की विशेेष अपील की जाती है।
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बिजनौर। कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को पहली सीढ़ी से ही ग्रहण लग रहा है। गर्भवती महिलाएं ही कुपोषित हो रही हैं। सही खानपान न होने की वजह से उनके खून की मात्रा कम है। हालांकि कुपोषण को खत्म भी किया जा रहा है लेकिन यह कुपोषण विरासत में बच्चों में भी जा सकता है। ऐसी महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जा रही है।
केंद्र व प्रदेश सरकार कुपोषण को खत्म करने के लिए बड़े अभियान चला रही है। गर्भवती महिलाओं और छह साल तक के बच्चों में कुपोषण की जांच के लिए हर महीने आंगनबाड़ी व आशा महिलाओं के स्वास्थ्य की तय मानकों के अनुसार जांच करती हैं। जांच में हर महीने करीब पांच हजार बच्चे कुपोषण का शिकार मिलते हैं, लेकिन हालांकि आबादी के हिसाब से यह संख्या करीब एक प्रतिशत ही बैठती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं में अलग स्थिति देखने को मिल रही है। हर महीने करीब 15 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार मिलती हैं। इनके कुपोषण का पता चलते ही स्वास्थ्य में सुधार की कवायद शुरू कर दी जाती है। कुपोषण को खत्म करने के लिए महिलाओं को उचित खानपान की सलाह दी जाती है। अगर इन गर्भवती महिलाओं से कुपोषण का दंश नहीं मिट पाता है तो इनके बच्चों के भी कुपोषित होने की पूरी पूरी संभावना रहती है।
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ब्लॉक गर्भवती महिलाएं कुपोषित महिलाएं
चंदक 3601 399
हल्दौर 2441 289
नहटौर 2926 1155
धामपुर 3374 1047
स्योहारा 3413 115
कासमपुर गढ़ी 3116 1359
कोतवाली 4548 700
किरतपुर 3373 331
नजीबाबाद 6122 586
नूरपुर 4488 154
जलीलपुर 3669 464
बिजनौर पीपीसी 1316 00
धामपुर पीपीसी 763 375
नगीना पीपीसी 1703 47
योग 44853 7021
नोट:आंकड़े स्वास्थ्य विभाग से लिए गए हैं।
मौसमी फल और हरी सब्जी फायदेमंद
महिलाएं खानपान का ध्यान रखकर कुपोषण से मुक्ति पा सकती हैं। उन्हें खुराक में हरी सब्जी, मौसमी फल व आयरन वाले तत्व लेने चाहिएं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी इन महिलाओं को आयरन की गोली दी जाती हैं। खून की कमी ज्यादा होने पर आयरन और सुक्रोज चढ़ाए जाते हैं।
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रख रहे हैं ध्यान
एसीएमओ डा.आरके गुप्ता के अनुसार गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हर महीने हजारों गर्भवती महिलाओं से कुपोषण खत्म भी किया जा रहा है। महिलाओं से खानपान का ध्यान रखने की विशेेष अपील की जाती है।