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पंचायतों के आरक्षण में बड़ा उलटफेर निश्चित
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पंचायतों के आरक्षण में बड़ा उलटफेर निश्चित
बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दावेदारों की धड़कन तेज हैं। कोर्ट के आरक्षण पर दिए आदेश के बाद दावेदारों ने विकास भवन में आवाजाही बढ़ा दी है। दावेदार यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि वर्ष 2015 के आधार पर उनकी पंचायत किस श्रेणी में आरक्षित हो सकती है।
दो मार्च को पंचायतों के आरक्षण की सूची प्रकाशित हुई थी। इसके बाद से जिले की 1123 ग्राम पंचायत में काफी संख्या में दावेदार सपनों में प्रधान बन गए थे। वोटरों को लुभाने का काम शुरू हो गया था। विरोधियों की घेराबंदी के लिए शिकायतें की जा रही थीं। परंतु 15 मार्च के कोर्ट के आदेशों ने दावेदारों के सपनों को जमीन पर ला दिया। अब फिर दावेदार किस्मत के भरोसे हो गए हैं। जिला पंचायतराज दफ्तर के अनुसार वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानकर आरक्षण से वर्तमान में आरक्षित हुई काफी पंचायत उधर से उधर हो जाएंगी। लोगों को अब आरक्षण को लेकर नए आदेश आने का इंतजार है। दावेदारों का विकास भवन में राजनेताओं के साथ आना जाना तेज हो गया है। गांवों में भी चौपालों व घेर में पंचायतों के आरक्षण का हिसाब किताब लगने लगा है। दावेदार डीपीआरओ दफ्तर में आरक्षण का फार्मूला पूछकर जा रहे हैं। जहां अनेक दावेदारों के डीपीआरओ दफ्तर से निकलते हुए चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी, वहीं कुछ मायूस दिख रहे थे।
पहले जिला पंचायत अध्यक्ष का आरक्षण घोषित होगा
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि पहले शासन से जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की सीट का आरक्षण घोषित होगा। उसके बाद प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण की गाइड लाइन प्राप्त होगी। बताया कि अभी तक शासन से नए आरक्षण को लेकर किसी भी प्रकार के आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। प्रशासन की आरक्षण को लेकर व्यवस्था अपडेट है। पहले आरक्षण का मूल वर्ष 1995 था। अब आरक्षण का मूल वर्ष 2015 होगा। इस प्रकार नए निर्देश पर आरक्षण से बदलाव निश्चित है। वर्तमान आरक्षित सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद बीसी को आरक्षित है। जिले में 11 क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के पद हैं। इनमें एक महिला अनुसूचित जाति, एक पुरुष अनुसूचित जाति, एक ओबीसी पुरुष, एक ओबीसी महिला, दो स्त्री के लिए आरक्षित हैं। पांच पद अनारक्षित हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन आरक्षण में बदलाव तय माना जा रहा है।
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बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दावेदारों की धड़कन तेज हैं। कोर्ट के आरक्षण पर दिए आदेश के बाद दावेदारों ने विकास भवन में आवाजाही बढ़ा दी है। दावेदार यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि वर्ष 2015 के आधार पर उनकी पंचायत किस श्रेणी में आरक्षित हो सकती है।
दो मार्च को पंचायतों के आरक्षण की सूची प्रकाशित हुई थी। इसके बाद से जिले की 1123 ग्राम पंचायत में काफी संख्या में दावेदार सपनों में प्रधान बन गए थे। वोटरों को लुभाने का काम शुरू हो गया था। विरोधियों की घेराबंदी के लिए शिकायतें की जा रही थीं। परंतु 15 मार्च के कोर्ट के आदेशों ने दावेदारों के सपनों को जमीन पर ला दिया। अब फिर दावेदार किस्मत के भरोसे हो गए हैं। जिला पंचायतराज दफ्तर के अनुसार वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानकर आरक्षण से वर्तमान में आरक्षित हुई काफी पंचायत उधर से उधर हो जाएंगी। लोगों को अब आरक्षण को लेकर नए आदेश आने का इंतजार है। दावेदारों का विकास भवन में राजनेताओं के साथ आना जाना तेज हो गया है। गांवों में भी चौपालों व घेर में पंचायतों के आरक्षण का हिसाब किताब लगने लगा है। दावेदार डीपीआरओ दफ्तर में आरक्षण का फार्मूला पूछकर जा रहे हैं। जहां अनेक दावेदारों के डीपीआरओ दफ्तर से निकलते हुए चेहरे पर खुशी नजर आ रही थी, वहीं कुछ मायूस दिख रहे थे।
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पहले जिला पंचायत अध्यक्ष का आरक्षण घोषित होगा
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि पहले शासन से जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष की सीट का आरक्षण घोषित होगा। उसके बाद प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व ग्राम पंचायत सदस्य के आरक्षण की गाइड लाइन प्राप्त होगी। बताया कि अभी तक शासन से नए आरक्षण को लेकर किसी भी प्रकार के आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। प्रशासन की आरक्षण को लेकर व्यवस्था अपडेट है। पहले आरक्षण का मूल वर्ष 1995 था। अब आरक्षण का मूल वर्ष 2015 होगा। इस प्रकार नए निर्देश पर आरक्षण से बदलाव निश्चित है। वर्तमान आरक्षित सूची में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद बीसी को आरक्षित है। जिले में 11 क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष के पद हैं। इनमें एक महिला अनुसूचित जाति, एक पुरुष अनुसूचित जाति, एक ओबीसी पुरुष, एक ओबीसी महिला, दो स्त्री के लिए आरक्षित हैं। पांच पद अनारक्षित हैं। कोर्ट के आदेश के बाद इन आरक्षण में बदलाव तय माना जा रहा है।
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