गांधी जयंती: बिजनौर से रहा है राष्ट्रपिता का गहरा नाता,धामपुर में बनवाई थी दाढ़ी, आए थे गुरुकुल कांगड़ी
महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध आंदोलन चला रहे थे। उस समय गुरुकुल कांगड़ी के ब्रह्मचारियों तथा छात्रों ने गांधी जी के लिए अपने घी और दूध की खपत को कम करके पैसे बचाए थे। आठ अप्रैल 1915 को गुरुकुल कांगड़ी में महात्मा गांधी आए थे।
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गुरुकुल कांगड़ी से जुड़े स्वामी श्रद्धानंद, ग्राम रतनगढ़ निवासी महावीर त्यागी, ग्राम पैजानिया निवासी शिवचरण त्यागी, नगीना निवासी हाफिज इब्राहिम, गजरौला शिव निवासी गोविंद सहाय से महात्मा गांधी के संबंध रहे।
तीन बार गुरुकुल कांगड़ी आए थे महात्मा गांधी
महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध आंदोलन चला रहे थे। उस समय गुरुकुल कांगड़ी के ब्रह्मचारियों तथा छात्रों ने गांधी जी के लिए अपने घी और दूध की खपत को कम करके पैसे बचाए थे। तथा गंगा पर बन रहे बांध पर मजदूरी करके 1500 रूपए की धनराशि दक्षिण अफ्रीका भेजी थी। साहित्यकार डॉ सुशील त्यागी बताते हैं कि महात्मा गांधी के साथ दक्षिण अफ्रीका से कुछ छात्र आए थे। उनके ठहरने की व्यवस्था गुरुकुल कांगड़ी में ही की गई थी। आठ अप्रैल 1915 को गुरुकुल कांगड़ी में महात्मा गांधी का सम्मान समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें महात्मा गांधी गुरुकुल कांगड़ी आए थे।
हल्दौर कस्बे की दो बेटियों का विवाह महात्मा गांधी के कुटुंब में हुआ था। ग्राम फीना निवासी इंजीनियर हेमंत कुमार बताते हैं कि हल्दौर निवासी लाला डालचंद की पुत्री अंबा देवी का विवाह महात्मा गांधी के चाचा उत्तमचंद के वंशज प्रभुदास गांधी के साथ हुआ था। हल्दौर के हीरालाल की पुत्री मनोज्ञा देवी का विवाह महात्मा गांधी के कुटुंब के कृष्णदास गांधी के साथ हुआ था। विवाह में महात्मा गांधी ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाई थी। दोनों विवाह वर्धा आश्रम ने हुए थे।
धामपुर में आए थे गांधी जी, बनवाई थी दाढ़ी
धामपुर निवासी डॉ. अनिल शर्मा बताते हैं कि 13 अक्टूबर 1929 को विजयदशमी के दिन महात्मा गांधी ट्रेन से धामपुर पहुंचे। धामपुर में गांधी जी ने छोटी मंडी में लगभग 5000 महिलाओं की एक सभा को संबोधित किया था। गांधी जी ने धामपुर निवासी निरंजन नाई से मुल्तानी मिट्टी से दाढ़ी बनवाई थी। धामपुर निवासियों ने गांधी जी को 644 रुपए पांच आने की एक थैली भेंट की थी।
ग्राम पैजनिया निवासी शिवचरण त्यागी गांधी जी के बेहद नजदीकी रहे। शिवचरण त्यागी के नवासे इतिहासकार भोलानाथ त्यागी बताते हैं कि महात्मा गांधी के पुत्र हरीलाल के द्वारा इस्लाम धर्म स्वीकार करने के बाद कस्तूरबा गांधी और जमनालाल बजाज के आग्रह पर शिवचरण त्यागी हरिलाल से मिलने मद्रास गए थे। शिवचरण त्यागी ने हरीलाल से मुलाकात कर उन्हें समझाया था। वहीं ग्राम रतनगढ़ निवासी महावीर त्यागी ने देहरादून में महात्मा गांधी की सभा कराई थी।
महावीर अधिकारी ने लिखी है लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी
देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्म दिवस 2 अक्टूबर को है। जनपद के ग्राम पैगंबरपुर में जन्मे महावीर अधिकारी ने लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी लिखी है। यह पुस्तक लाल बहादुर शास्त्री के जीवन परिचय से अवगत कराती है।
13 अक्तूबर को धामपुर में आए थे महात्मा गांधी
धामपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी धामपुर में 13 अक्तूबर 1929 को आए थे। उन्होंने केएम स्कूल के मैदान सभा को संबोधित कर अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट होने का लोगों को संदेश दिया था। जनता की ओर से 200 रुपये की थैली उन्हें भेंट की गई थी। सभा करने के बाद गांधी जी शाम को मुरादाबाद से आने वाली ट्रेन में सवार होकर हरिद्वार के लिए चले गए थे। पुरातन अभिलेखों, तथ्यों के संग्रहकर्ता वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र सिंह ने बताया कि गांधी जी के धामपुर आगमन के लिए व्यवस्थाएं करने को गांधी स्वागत कारिणी समिति गठित की गई थी।
इसके मंत्री डाक्टर डी. गांगुली और सदस्य खादी व्यापारी चौधरी उमराव सिंह बतौर सदस्य थे। उन्होंने प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। केएम स्कूल के मुख्य गेट से अंदर जाने वाले मार्ग पर चौधरी उमराव सिंह की ओर से खादी के कोरे थानों को उनके स्वागत में बिछवाया गया था। लोकतंत्र सेनानी रहे चरण सिंह सुमन की ओर से साल 1986 में प्रकाशित स्वाधीनता संग्राम के वीरों की गाथा पुस्तक में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। महेश शरण गर्ग की पुस्तक क्रांति समर के वीरों की गाथा साल 2004 में भी विस्तार से जिक्र है।